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33 Malpua Ka Daan: अधिकमास में 33 मालपुआ का दान क्यों है शुभ? संख्या में छिपा है बड़ा रहस्य, जानिए शास्त्रीय और आध्यात्मिक मान्यताएं

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : May 22, 2026 11:52 pm IST,  Updated : May 22, 2026 11:52 pm IST

Adhik Maas Mein 33 Malpua Ka Daan: अधिकमास के दौरान 33 मालपुओं का दान करने के लाभ और महत्व बताए गए हैं। इस विशेष दान को शास्त्रों में अत्यंत पुण्यदायी कहा है। मान्यता है कि यह परंपरा देव कृपा और पारिवारिक सुख-समृद्धि से जुड़ी है। चलिए जानते हैं इस परंपरा के पीछे क्या रहस्य छिपा है।

Adhik Maas daan- India TV Hindi
धिक मास में 33 मालपुआ दान Image Source : SOCIAL

Adhik Maas Mein 33 Malpua Ka Daan: अधिकमास की शुरुआत 17 मई से हो गई है। इसकी समाप्ति 15 जून 2026 को होगी। इसे हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी समय माना जाता है। इस दौरान किए गए दान और पूजा का महत्व सामान्य समय की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस विशेष माह में 33 मालपुओं का दान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। चलिए जानते हैं अधिकमास में क्यों करते हैं 33 मालपुआ का दान और इस संख्या के पीछे क्या रहस्य है। 

अधिकमास का धार्मिक महत्व

इसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस अवधि में श्रीहरि की पूजा, व्रत और दान-पुण्य करने से विशेष फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस महीने में किया गया दान सामान्य समय की तुलना में कई गुना अधिक फल देता है।

33 मालपुए का दान क्यों खास है

पद्म पुराण के अनुसार, अधिकमास में 33 मालपुओं का दान अत्यंत शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान विष्णु को मालपुए अत्यंत प्रिय हैं। यही कारण है कि मलमास के दौरान बनने वाली इस विशेष मिठाई का भोग पहले लगाया जाता है। फिर इनका दान करने की परंपरा है। लेकिन 33 मालपुआ ही क्यों दान किए जाते हैं, चलिए जानते हैं। 

33 संख्या का धार्मिक रहस्य

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 33 मालपुओं का संबंध 33 कोटि देवताओं से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि यह दान 33 कोटि देवताओं की तृप्ति और पितृ कृपा प्राप्त करने का माध्यम बनता है, जिससे जीवन में संतुलन और शांति आती है।

दान करने की सही विधि

शास्त्रों में बताया गया है कि 33 मालपुओं का दान कांसे के पात्र में करना शुभ माना जाता है। पहले इन्हें भगवान विष्णु को अर्पित करें। फिर मंदिर या जरूरतमंद लोगों में दान करने से पुण्य फल और अधिक बढ़ जाता है।

सुख-समृद्धि और दोष निवारण

अधिकमास में मिठाई दान सबसे बड़ा पुण्य कर्म बताया गया है। मान्यता है कि इस दौरान 33 मालपुओं का दान करने से घर की दरिद्रता दूर होती है। साथ ही जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है और घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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