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Aditya Hridaya Stotra: सौभाग्य से लेकर शत्रु विजय तक; सिर्फ एक पाठ से बदलेगी किस्मत, मुश्किल में वरदान साबित होता है आदित्य हृदय स्तोत्र!

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Nov 23, 2025 12:40 pm IST,  Updated : Nov 24, 2025 10:14 am IST

Surya Powerful Morning Ritual: आदित्य हृदय स्तोत्र सूर्य उपासना का बहुत प्रभावशाली और पवित्र स्तोत्र माना जाता है। इसका पाठ करने से व्यक्ति को सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। हर दिन सूर्योदय से पहले नियम से इसका जप करने पर शत्रु बाधाएं दूर होती हैं और करियर-कारोबार में सफलता मिलती है।

Benefits Aditya Hridaya Stotra Path- India TV Hindi
आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ करने के लाभ Image Source : FREEPIK

Aditya Hridaya Stotra Path Benefits: सनातन परंपरा में भगवान सूर्य को सौभाग्य, आरोग्य और जीवन ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। नवग्रहों के राजा माने जाने वाले सूर्य देव की साधना करने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शक्ति बढ़ती है। इन्हीं के विशेष आशीर्वाद से युक्त एक दिव्य स्तोत्र है- आदित्य हृदय स्तोत्र, जिसे भगवान राम को स्वयं ऋषि अगस्त्य ने युद्धभूमि में शक्ति और विजय प्रदान करने के लिए बताया था। ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 

Aditya Hridaya Stotra Path: आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ करने के लाभ

रामायण में महर्षि अगस्त्य द्वारा श्रीराम को दिया गया यह उपदेश न सिर्फ मानसिक बल और साहस बढ़ाता है। ऐसा विश्वास है कि प्रातःकाल सूर्य उदय से पहले विधि-विधान से आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से जीवन की कई जटिल समस्याएं सहज ही दूर होने लगती हैं। प्रातःकाल स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य को अर्घ्य देकर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से साधक का आत्मविश्वास, अच्छा स्वास्थ्य, मान-सम्मान और सौभाग्य बढ़ता है। इस पावन स्तोत्र के जप से शत्रुओं पर विजय, कोर्ट-कचहरी में सफलता और नेत्र ज्योति में वृद्धि जैसे चमत्कारिक लाभ मिलते हैं।

आदित्य हृदय स्तोत्र: Aditya Hridaya Stotra

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्‌  

रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्‌

दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्‌  
उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस्तदा

राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्मं सनातनम्‌  
येन सर्वानरीन्‌ वत्स समरे विजयिष्यसे

आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्‌  
जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम्‌

सर्वमंगलमागल्यं सर्वपापप्रणाशनम्‌  
चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम्‌

रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्‌  
पुजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्‌

सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावन:  
एष देवासुरगणांल्लोकान्‌ पाति गभस्तिभि:

एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिव:स्कन्द: प्रजापति:  
महेन्द्रो धनद: कालोयम: सोमो ह्यापांपतिः

पितरो वसव: साध्या अश्विनौ मरुतो मनु:  
वायुर्वहिन: प्रजा प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकर:

आदित्य: सविता सूर्य: खग: पूषा गभस्तिमान्‌  
सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकर:

हरिदश्व: सहस्त्रार्चि: सप्तसप्तिर्मरीचिमान्‌  
तिमिरोन्मथन: शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्डकोंऽशुमान्‌

हिरण्यगर्भ: शिशिरस्तपनोऽहस्करो रवि:  
अग्निगर्भोऽदिते: पुत्रः शंखः शिशिरनाशन:

व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजु:सामपारग:  
घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः

आतपी मण्डली मृत्यु: पिगंल: सर्वतापन: 
कविर्विश्वो महातेजा: रक्त:सर्वभवोद् भव:

नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावन:  
तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन्‌ नमोऽस्तु ते

नम: पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नम:  
ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नम:

जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नम:  
नमो नम: सहस्त्रांशो आदित्याय नमो नम:

नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नम:  
नम: पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते

ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सुरायादित्यवर्चसे  
भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नम:

तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने  
कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नम:

तप्तचामीकराभाय हरये विश्वकर्मणे  
नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे

नाशयत्येष वै भूतं तमेष सृजति प्रभु:  
पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभि:

एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठित:  
एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम्‌

देवाश्च क्रतवश्चैव क्रतुनां फलमेव च  
यानि कृत्यानि लोकेषु सर्वेषु परमं प्रभु:

एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च  
कीर्तयन्‌ पुरुष: कश्चिन्नावसीदति राघव

पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगप्ततिम्‌  
एतत्त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि

अस्मिन्‌ क्षणे महाबाहो रावणं त्वं जहिष्यसि  
एवमुक्ता ततोऽगस्त्यो जगाम स यथागतम्‌

एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत्‌ तदा 
धारयामास सुप्रीतो राघव प्रयतात्मवान्‌

आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं परं हर्षमवाप्तवान्‌  
त्रिराचम्य शूचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्‌

रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा जयार्थं समुपागतम्‌  
सर्वयत्नेन महता वृतस्तस्य वधेऽभवत्‌

अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमना: परमं प्रहृष्यमाण:  
निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति

Aditya Hridaya Stotra Path PDF

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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