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Chaitra Purnima Vrat 2026: चैत्र पूर्णिमा का व्रत कब रखा जाएगा, 1 या 2 अप्रैल? स्नान-दान का मुहूर्त क्या रहेगा

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Mar 31, 2026 11:02 am IST,  Updated : Mar 31, 2026 11:18 am IST

Chaitra Purnima Vrat 2026: इस साल चैत्र पूर्णिमा व्रत को लेकर काफी कन्फ्यूजन चल रहा है। कोई 1 अप्रैल तो कोई 2 अप्रैल को इस व्रत की सही डेट बता रहा है। चलिए पंचांग से जानते हैं किस दिन रखा जाएगा चैत्र पूर्णिमा व्रत और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

चैत्र पूर्णिमा व्रत- India TV Hindi
चैत्र पूर्णिमा व्रत Image Source : CANVA

Chaitra Purnima Vrat 2026: सनातन धर्म में चैत्र पूर्णिमा व्रत का खास महत्व माना गया है। ऐसी मान्यता है इस व्रत को करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस व्रत में भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा होती है। इसके अलावा इस दिन शिव-पार्वती की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। इस साल चैत्र पूर्णिमा व्रत की तारीख को लेकर काफी कन्फ्यूजन चल रहा है। कोई 1 तो कोई 2 अप्रैल इस व्रत की सही डेट बता रहे है। चलिए जानते हैं इस साल चैत्र पूर्णिमा व्रत कब रखा जाएगा।

चैत्र पूर्णिमा का व्रत कब रखा जाएगा (Chaitra Purnima Vrat 2026 Date)

इस साल चैत्र पूर्णिमा व्रत 1 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा क्योंकि इस तारीख को पूरे दिन पूर्णिमा तिथि रहने वाली है। इस दिन चंद्रोदय समय शाम 06:11 का है। 

चैत्र पूर्णिमा मुहूर्त 2026 (Chaitra Purnima 2026 Muhurat)

  • लाभ - उन्नति - 06:11 AM से 07:45 AM
  • अमृत - सर्वोत्तम - 07:45 AM से 09:18 AM
  • शुभ - उत्तम - 10:52 AM से 12:25 PM
  • लाभ - उन्नति - 05:05 PM से 06:39 PM
  • शुभ - उत्तम - 08:05 PM से 09:32 PM

चैत्र पूर्णिमा स्नान-दान मुहूर्त 2026 (Chaitra Purnima Snan-Daan Muhurat 2026)

चैत्र पूर्णिमा पर स्नान-दान के शुभ मुहूर्त की बात करें तो वो मुहूर्त 2 अप्रैल 2026 को मिलेगा। इस दिन पूर्णिमा सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। बेहतर होगा इस समय से पहले ही स्नान-दान संबंधी अनुष्ठान संपन्न कर लें।

चैत्र पूर्णिमा पूजा विधि (Chaitra Purnima Puja Vidhi)

  • चैत्र पूर्णिमा पर प्रातःकाल किसी पवित्र नदी में स्नान और तर्पण करें। अगर आस-पास नदी नहीं है तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें। इसके बाद व्रत-पूजन करने का संकल्प लें।
  • इसके बाद कलश स्थापना करके भगवान गणेश का पूजन करें।
  • फिर देवी पार्वती और भगवान शिव की षोडशोपचार विधि से पूजा करें।
  • विभिन्न परम्पराओं में इस दिन भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और चन्द्रदेव का पूजन भी किया जाता है।
  • शाम में चन्द्रदेव को अर्घ्य अर्पित करें।
  • श्रद्धापूर्वक पूर्णिमा व्रत की कथा सुनें या पढ़ें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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