Chaitra Purnima Vrat Katha: चैत्र शुक्ल महीने की पूर्णिमा इस बार दो दिनों की पड़ रही है और जब पूर्णिमा दो दिनों की होती है तो पहले दिन व्रतादि की पूर्णिमा होती है। बता दें कि पूर्णिमा तिथि मंगलवार सुबह 10 बजकर 4 मिनट तक ही रहेगी। पूर्णिमा तिथि में पूर्ण चंद्रमा 1 अप्रैल की रात में उदयमान रहेगा। ऐसे में 1 अप्रैल 2026 को ही पूर्णिमा का व्रत किया जाएगा और 2 अप्रैल के दिन उदया तिथि पूर्णिमा में स्नान दान किया जाएगा। तो अगर आप भी चैत्र पूर्णिमा का व्रत रख रहे हैं तो इस पौराणिक कथा का पाठ जरूर करें।
चैत्र पूर्णिमा व्रत पौराणिक कथा
चैत्र पूर्णिमा व्रत कथा, एक नगर में सेठ-सेठानी रहते थे। सेठानी भगवान विष्णु की परम भक्त थीं और रोजाना श्री हरि की भक्ति भाव से उपासना करती थी। लेकिन सेठानी का पूजा करना सेठ को बिल्कुल पसंद नहीं था। नारायण की भक्ति की वजह से एक दिन सेठ ने उसे घर से निकाल दिया। इसके बाद सेठानी घर से निकल कर जंगल की तरफ चली गई। जंगल में सेठानी ने देखा कि चार आदमी मिट्टी खोद रहे थे। तभी सेठानी ने उनके पास जाकर कहा कि मुझे भी काम पर रख लो। उन आदमियों ने सेठानी को नौकरी पर रख लिया। लेकिन काम के दौरान सेठानी के हाथ में छाले पड़ गए। तब उन चार आदमियों ने सेठानी से काम छोड़ने के लिए कहा। उन्होंने सेठानी से कहा कि आप हमारे घर का काम कर दो। सेठानी के मान जाने पर वे उसे अपने घर ले गए। वहां वे चारों आदमी चार मुट्ठी चावल लाते और उसे बांटकर खा लेते हैं। ये देख सेठानी को बहुत बुरा लगता। इसे देख सेठानी ने उन चारों आदमी को 8 मुट्ठी चावल लाने को कहा। सेठानी के कहने पर चारों आदमी अगले दिन 8 मुट्ठी चावल लाए। उस आठ मुट्ठी चावल को सेठानी ने पका कर भोजन बनाया और उसे भगवान विष्णु को भोग लगाकर चारों आदमी को परोस दिया। जब चारों आदमी ने उस भोजन को खाया, तो वह भोजन उन लोगों को बहुत स्वादिष्ट लगा और उन्होंने सेठानी से कहा कि सुनों बहन आज जो तुमने खाना बनाया वह बहुत ही स्वादिष्ट है। यह सुनकर सेठानी ने कहा, यह भोजन भगवान विष्णु का झूठा है। इसी वजह से आप लोगों को यह बहुत स्वादिष्ट लग रहा है।
सेठानी के जाने के बाद सेठ भूखा रहने लगा। आसपास के लोग उसे देखकर ताना मारते थे कि यह आदमी सिर्फ अपनी पत्नी यानि सेठानी की वजह से ही भोजन किया करता था। यह सुनकर सेट एक दिन अपनी पत्नी सेठानी को खोजने के लिए जंगल की तरफ निकल पड़ा। रास्ते में उसे वही चार आदमी मिट्टी खोदते हुए दिखाई दिए। उसे देखकर सेठ ने कहा सुनों भाई क्या तुम मुझे काम पर रख सकते हो। तब चारों आदमी ने उसे भी काम पर रख लिया। लेकिन मिट्टी खोदने की वजह से सेठ के हाथों में छाले पड़ने लगे और उसके बाल उड़ गए। यह देखकर उस चारों आदमी ने कहा, सुनों भाई तुम यह काम रहने दो। तुम अच्छे घर के लगते हो, तुम हमारे घर चलो वहां कुछ काम कर लेना। तब सेठ ने उन चारों की बात मान ली और वह उनके साथ उनके घर के तरफ चल पड़ा।
घर पहुंचने के बाद सेठ ने सेठानी को देखते ही पहचान लिया। लेकिन सेठानी घूंघट में थी इस वजह से वह अपने पति यानी सेठ को नहीं पहचान पाई। हर दिन की तरह इस दिन भी सेठानी ने भोजन बनाकर भगवान विष्णु को भोग लगाकर सभी को खाना परोस दिया। जैसे ही सेठानी सेठ को भोजन देने लगी तभी भगवान विष्णु ने सेठानी का हाथ पकड़ लिया और कहा ये तुम क्या कर रही हो। यह सुनकर सेठानी ने कहा, मैं कुछ नहीं कर रही हूं, मैं तो भोजन दे रही हूं भगवान विष्णु ने मेरा हाथ पकड़ लिया है।
तब चारों भाई ने सेठानी से कहा हमें भी भगवान विष्णु के दर्शन कराओ। ऐसा कहने पर सेठानी भगवान विष्णु से हाथ जोड़कर अनुरोध करने लगी हे, प्रभु आप मेरी तरह इन्हें भी दर्शन दें। तब भगवान विष्णु वहां प्रकट हो गए। यह देखकर सेठ ने सेठानी से क्षमा मांगी और उसे अपने घर साथ चलने को कहा। तब चारों भाइयों ने अपनी बहन को बहुत सारा धन देकर विदा किया। उसी समय से सेठ भी भगवान विष्णु के भक्त बन गया और उनकी पूजा श्रद्धा पूर्वक करने लगा। ऐसा करने से उसके घर में फिर से धन की बरसात हो गई। धार्मिक मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा के दिन व्रत रखने से सत्यनारायण भगवान, हनुमान जी के साथ प्रभु श्री राम और माता सीता की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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