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Garud Puran: बेटा न हो तो मुखाग्नि देने और पिंडदान करने का किसे है अधिकार, जानिए गरुड़ पुराण में इसके लिए क्या हैं नियम

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : May 05, 2026 12:59 pm IST,  Updated : May 05, 2026 12:59 pm IST

Garun Puran Niyam: गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति का पुत्र न हो, तो ऐसे परिवार में किसी सदस्य की मौत पर उसके अंतिम संस्कार का अधिकार कई अन्य रिश्तों को दिया गया है। चलिए जानते हैं कि मृतक के किन करीबियों को उन्हें मुखाग्नि देने और पिंडदान करने का अधिकार दिया गया है।

Garud Puran- India TV Hindi
बेटा न होने पर कौन करेगा अंतिम संस्कार Image Source : INDIA TV

Garun Puran Niyam: सनातन धर्म में जीवन से लेकर मृत्यु तक हर चरण के लिए संस्कार बताए गए हैं। इनमें व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके अंतिम संस्कार की क्रिया को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे आत्मा की शांति और मोक्ष का मार्ग जुड़ा होता है। आम धारणा यह है कि मुखाग्नि देने का अधिकार केवल बेटे को होता है, लेकिन क्या शास्त्रों में भी यही कहा गया है? चलिए जानते हैं कि किसी व्यक्ति के बेटा न हो तो अंतिम संस्कार कौन कर सकता है। गरुड़ पुराण में इसे लेकर क्या नियम बताए गए हैं। 

अंतिम संस्कार का महत्व

हिंदू परंपरा में 'सोलह संस्कारों' का विशेष स्थान है, जिनमें अंतिम संस्कार सबसे अहम माना जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से किए गए संस्कार और पिंडदान से आत्मा को मोक्ष मिलता है और वह प्रेत योनि से मुक्त होकर पितृ लोक में पहुंचती है। इसलिए इन क्रियाओं को सही तरीके से करना जरूरी माना गया है।

पुत्र न हो तो किसे है अधिकार

गरुड़ पुराण में स्पष्ट बताया गया है कि अगर पुत्र न हो, तो परिवार के अन्य सदस्य भी अंतिम संस्कार कर सकते हैं। इसमें सबसे पहले पौत्र (पोता) या प्रपौत्र का अधिकार माना गया है। इनके बाद अन्य रिश्तेदार भी इस जिम्मेदारी को निभा सकते हैं।

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पत्नी और पुत्री की भूमिका

अगर मृतक का कोई पुत्र नहीं है, तो पत्नी को मुखाग्नि देने और श्राद्ध करने का पूरा अधिकार है। वहीं, आज के समय में बेटियां भी आगे बढ़कर यह जिम्मेदारी निभा रही हैं। शास्त्रों में भी कहीं यह नहीं कहा गया कि पुत्री ऐसा नहीं कर सकती। इसलिए पुत्री या उसका पुत्र (नाती) भी पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार कर सकते हैं।

इन लोगों को भी है अंतिम संस्कार करने का अधिकार

अगर परिवार में न पुत्र, न पत्नी और न ही पुत्री हो, तो मृतक का भाई या भतीजा अंतिम संस्कार कर सकता है। हालांकि, विशेष परिस्थिति में शिष्य या करीबी मित्र को भी यह अधिकार दिया गया है। मुख्य बात यह है कि संस्कार श्रद्धा और नियमों के साथ किया जाए।

पिंडदान और तर्पण क्यों जरूरी

अंतिम संस्कार के बाद पिंडदान और तर्पण करना भी उतना ही जरूरी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन क्रियाओं से आत्मा को शांति मिलती है। अगर कोई भी योग्य व्यक्ति पूरी श्रद्धा और विधि से मृतक की अंतिम क्रिया करता है, तो उसका पूरा फल मिलता है।

इस तरह, शास्त्र के अनुसार अंतिम संस्कार केवल पुत्र तक सीमित नहीं है। परिस्थितियों के अनुसार परिवार के अन्य सदस्य भी इस जिम्मेदारी को निभा सकते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार, सही नियमों से किए गए अंतिम संस्कार और श्राद्ध कर्म से आत्मा मोक्ष पा सकती है और वह प्रेत योनि से मुक्त होकर पितृ लोक की ओर प्रस्थान करती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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