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किस पितृ का श्राद्ध किस तिथि को करना है कैसे चलता है पता? पितृपक्ष शुरू होने से पहले जान लें

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Sep 23, 2026 10:14 pm IST,  Updated : Sep 23, 2026 10:14 pm IST

पितृपक्ष में हम अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध-तर्पण करते हैं। हालांकि, श्राद्ध करने का महत्व तभी है जब इसे सही तिथि पर किया जाए। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि पितृ श्राद्ध की सही तिथि कैसे पता की जाती है।

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पितृपक्ष Image Source : PINTEREST

 

सनातन धर्म में पितरों को देव तुल्य माना गया है इसीलिए हर हिंदू परिवार में पितरों की पूजा की जाती है और पितृपक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध किया जाता है। साल 2026 में 26 सितंबर से पितृपक्ष शुरू हो रहे हैं और 10 सितंबर को समाप्त होंगे। पंचांग के अनुसार पितृपक्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन माह की अमावस्या तक चलते हैं। इन 15-16 दिनों के समयकाल में तिथि के अनुसार पितरों का श्राद्ध किया जाता है। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि किस तिथि पर पितृ का श्राद्ध करना है यह कैसे तय होता है।  

किस तिथि पर होगा पितृ का श्राद्ध ऐसे करते हैं पता 

श्राद्ध की तिथि का निर्धारण व्यक्ति की मृत्यु तिथि से लगाया जाता है। पूर्वज की मृत्यु किसी भी माह की जिस भी तिथि को हुई हो पितृपक्ष के दौरान उसी तिथि को उनका श्राद्ध किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए- अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु किसी भी महीने के किसी भी पक्ष की द्वितीय तिथि को हुई हो तो उसका श्राद्ध कर्म पितृपक्ष की द्वितीया तिथि को ही किया जाएगा। साल 2026 में पितृपक्ष के दौरान द्वितीया तिथि 28 सितंबर को है। इसी तरह आप भी अपने पूर्वज की मृत्यु के दिन का पता करके उस दिन जो भी तिथि थी उसके अनुसार श्राद्ध कर सकते हैं। याद रखें मृत्यु की तिथि का निर्धारण गलती से भी अंग्रेजी कैलेंडर को देखकर न करें। इसे हिंदू कैलेंडर के जरिए ही तय करना चाहिए। 

विशेष परिस्थितियों में श्राद्ध

  • हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिन माता, बहनों, बेटियों की मृत्यु पति के जीवित रहते हो गई हो उनका श्राद्ध पितृपक्ष की नवमी तिथि को किया जा सकता है इसलिए पितृपक्ष की नवमी को मातृ नवमी भी कहते हैं। यह मातृ पितरों को प्रसन्न करने का बेहद शुभ दिन होता है।
  • जिन लोगों की मृत्यु की तिथि का पता न हो या जिनकी मृत्यु दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा आदि में हो गई हो तो उनका श्राद्ध कर्म पितृपक्ष की अमावस्या के दिन किया जा सकता है। इसलिए पितृपक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या का श्राद्ध करने से सभी भूले-बिसरे पितृ प्रसन्न हो जाते हैं और आपको जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है। 
  • अगर आपके परिवार में किसी ने संन्यास लिया था और उनकी अब मृत्यु हो चुकी है तो उनका श्राद्ध कर्म पितृपक्ष की एकादशी या द्वादशी तिथि को किया जाना सही माना जाता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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