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Garun Puran: मृत व्यक्ति का बिस्तर इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं? जानिए क्या कहता है गरुड़ पुराण

 Written By: Arti Azad
 Published : May 20, 2026 09:17 pm IST,  Updated : May 20, 2026 09:17 pm IST

Garun Puran: गरुड़ पुराण और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मृत व्यक्ति के बिस्तर का उपयोग नहीं करना चाहिए। इन्हें दान, शुद्धिकरण या हटाने की सलाह दी जाती है। लेकिन क्या आपके पीछे की वजह जानते हैं कि ऐसा क्यों किया जाता है। जानिए गरुड़ पुराण में क्या बताया गया है।

Garud Puran- India TV Hindi
मृतक का बिस्तर इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं? Image Source : INDIA TV

Garun Puran: हिंदू धर्म ग्रंथों में जीवन और मृत्यु से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियम और मान्यताएं बताई गई हैं। इन्हीं में से एक है कि क्या मृत व्यक्ति का बिस्तर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए? गरुड़ पुराण में इस विषय पर विस्तार से बताया गया है। इस ग्रंथ में मृत्यु के बाद आत्मा और भौतिक वस्तुओं के संबंध का जिक्र मिलता है। मृतक का बिस्तर इस्तेमाल करना चाहिए, चलिए जानते हैं इस विषय पर गरुड़ पुराण में क्या वर्णित है। 

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद का संबंध

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद शरीर पंचतत्व में विलीन हो जाता है, लेकिन कुछ समय तक आत्मा का जुड़ाव अपनी प्रिय वस्तुओं से बना रह सकता है। माना जाता है कि व्यक्ति अपने जीवन में जिन वस्तुओं से गहरा लगाव रखता है, उनमें उसकी ऊर्जा कुछ समय तक बनी रहती है।

मृत व्यक्ति के बिस्तर को लेकर मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत व्यक्ति के बिस्तर पर सोना या उसे उपयोग में लेना उचित नहीं माना गया है। कहा जाता है कि मृत्यु के समय शरीर से निकलने वाली ऊर्जा या बीमारी के प्रभाव बिस्तर में रह सकते हैं। ऐसे में उस बिस्तर का उपयोग करने से मानसिक शांति और स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक प्रभाव

कहा जाता है कि मृत्यु के बाद घर में कुछ समय तक नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव रहता है। अगर मृतक का बिस्तर घर में रखा रहें तो यह ऊर्जा और बढ़ सकती है। इससे परिवार के सदस्यों में दुख और भावनात्मक जुड़ाव बना रहता है, जिससे आगे बढ़ने में कठिनाई महसूस हो सकती है।

सुतक और शुद्धिकरण की परंपरा

हिंदू परंपराओं में मृत्यु के बाद लगभग 12 दिनों तक सूतक काल माना जाता है, जिसमें पूजा-पाठ भी सीमित रहते हैं। इसके बाद शुद्धिकरण किया जाता है। इस अवधि के बाद मृत व्यक्ति की वस्तुएं, कपड़े और बिस्तर दान करने की परंपरा बताई गई है, ताकि मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति का अपनों से मोह कम हो और आत्मा की यात्रा सरल बने।

वस्तुओं के निवारण उपाय

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृतक की प्रिय वस्तुओं को दान करना सबसे उत्तम माना गया है। अगर कोई वस्तु कीमती हो और दान करना संभव न हो, तो उसे गंगाजल से शुद्ध कर उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, बिस्तर के मामले में इसे न उपयोग करना ही बेहतर बताया गया है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो लंबे समय तक बीमार रहने वाले व्यक्ति के बिस्तर में सूक्ष्मजीव और संक्रमण मौजूद हो सकते हैं। ऐसे में उसका उपयोग स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए भी मृतक के बिस्तर को बदलकर परिजनों को नया बिस्तर उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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