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Hanuamn Ji and Lord Ram Aarti: आज बड़े मंगल के दिन हनुमान जी के साथ ही करें प्रभु श्री राम की आरती, पूरी होगी हर मनोकामना

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Jun 16, 2026 12:03 am IST,  Updated : Jun 16, 2026 12:03 am IST

Hanuman Ji and Lord Ram Aarti Hindi Lyrics: बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की उपासना के साथ ही भगवान राम की भी पूजा जरूर करें। ऐसा करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और उनकी सभी मनोकामनाओं की भी शीघ्र पूर्ति होती है।

हनुमान जी और प्रभु श्री राम की आरती- India TV Hindi
हनुमान जी और प्रभु श्री राम की आरती Image Source : PEXELS

Hanuaman Ji and Lord Ram Aarti Lyrics In Hindi: हिंदू धर्म में बड़े मंगल का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की उपासना करने से सभी संकट दूर हो जाते हैं। हनुमान जी की पूजा भगवान राम और माता की सीता की पूजा के बिना अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी के दिल में सदैव भगवान श्री राम और माता सीता का वास रहता है। तो आज बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की आरती के साथ-साथ प्रभु श्री राम की आरती जरूर करें। ऐसा करने से बजरंगबली बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।

॥ आरती श्री हनुमानजी ॥

आरती कीजै हनुमान लला की।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर कांपे।रोग दोष जाके निकट न झांके॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई।सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए।लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र-सी खाई।जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे।सियारामजी के काज सवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे॥

पैठि पाताल तोरि जम-कारे।अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाएं भुजा असुरदल मारे।दाहिने भुजा संतजन तारे॥

सुर नर मुनि आरती उतारें।जय जय जय हनुमान उचारें॥

कंचन थार कपूर लौ छाई।आरती करत अंजना माई॥

जो हनुमानजी की आरती गावे।बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥

॥ आरती श्री रामचन्द्रजी ॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन,हरण भवभय दारुणम्।

नव कंज लोचन, कंज मुख करकंज पद कंजारुणम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि,नव नील नीरद सुन्दरम्।

पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचिनौमि जनक सुतावरम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...॥

भजु दीनबंधु दिनेशदानव दैत्य वंश निकन्दनम्।

रघुनन्द आनन्द कन्द कौशलचन्द्र दशरथ नन्द्नम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...॥

सिर मुकुट कुंडल तिलकचारू उदारु अंग विभूषणम्।

आजानुभुज शर चाप-धर,संग्राम जित खरदूषणम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...॥

इति वदति तुलसीदास,शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।

मम हृदय कंज निवास कुरु,कामादि खल दल गंजनम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...॥

मन जाहि राचेऊ मिलहिसो वर सहज सुन्दर सांवरो।

करुणा निधान सुजानशील सनेह जानत रावरो॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...॥

एहि भाँति गौरी असीससुन सिय हित हिय हरषित अली।

तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनिमुदित मन मन्दिर चली॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...॥

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