हरतालिका तीज का व्रत सिर्फ निर्जला रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पूजा-पाठ के साथ आचरण से जुड़े नियमों का भी महत्व है। इस दिन सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और मां पार्वती का पूजन कर वैवाहिक सुख और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। ऐसे में व्रत के दौरान की गई छोटी-छोटी गलतियों को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं बताई गई हैं। अगर आप भी यह व्रत रखने वाली हैं, तो इन बातों का खास ध्यान रखें।
पहले जानें तिथि
हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस साल तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा।
हरतालिका तीज पर न करें ये गलतियां
- हरतालिका तीज पर सुहागिनों के शृंगार का विशेष महत्व है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन काले कपड़े या काली चूड़ियां नहीं पहनना चाहिए। पूजा और शृंगार के लिए लाल, हरे या पीले रंग को प्राथमिकता दी जाती है। इन रंगों को सुहाग और शुभता से जोड़कर देखा जाता है।
- पूरे दिन व्रत रखने के साथ मन की शांति बनाए रखना भी जरूरी है। इसलिए पति, परिवार या किसी अन्य व्यक्ति के साथ विवाद करने और क्रोध करने से बचें। व्रत के दौरान नकारात्मक भावनाओं से दूरी बनाकर ध्यान और भक्ति में मन लगाना चाहिए।
- हरतालिका तीज का व्रत अन्य व्रतों से अलग माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन व्रती को दिन में सोने से बचना चाहिए। खाली समय आराम करने के बजाय शिव-पार्वती का स्मरण, भजन, मंत्र जाप समय में बिताने की परंपरा है। रात में जागरण की भी मान्यता बताई है।
- हरतालिका तीज का व्रत एक बार शुरू करने के बाद उसे हर साल करने की परंपरा बताई जाती है। वहीं, व्रत के संकल्प का विशेष महत्व है। ऐसे में व्रत रखने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना भी जरूरी है और अस्वस्थ होने पर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- हरतालिका तीज की पूजा में गणेश जी की आराधना की जाती है। पूजा की शुरुआत गणेश जी के स्मरण और पूजन से करने की परंपरा है, क्योंकि वह प्रथम पूज्य हैं। इसके बाद शिव-पार्वती की पूजा कर दांपत्य जीवन की खुशहाली और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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