Prohibited Things in Shivling Puja: महाशिवरात्रि का पर्व इस साल 15 फरवरी को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। शिव जी को बेलपत्र, धतूरा, भांग जैसी कुछ चीजें अत्यंत प्रिय हैं, तो वहीं कुछ वस्तुएं ऐसी भी हैं, जिन्हें शिवलिंग पर अर्पित करना वर्जित है। भूलकर भी वर्जित चीजें शिवलिंग पर अर्पित ना करें, वरना आशीर्वाद पाना तो दूर की बात हैं आपकी पूजा अधूरी रह सकती है और भगवान शिव को अप्रसन्न कर सकते हैं। ऐसे में शिवलिंग पूजा के दौरान शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करना जरूरी है, ताकि पूजा पूर्ण और फलदायी हो सके।
पूजा के दौरान कुछ सावधानियां जरूरी
हिंदू मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि तप, साधना और भक्ति का विशेष पर्व है। इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा जीवन के कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करती है। पंचांग के अनुसार, इस साल महाशिवरात्रि की तिथि पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे पूजा का फल कई गुना बढ़ सकता है। शिव भक्त शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं, लेकिन पूजा के दौरान कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं।
शिवलिंग की पूजा में न करें शंख का उपयोग
शिवलिंग की पूजा में शंख बजाना या शंख से जल अर्पित करना वर्जित माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक दैत्य का वध किया था, जिससे शंख की उत्पत्ति जुड़ी मानी जाती है। इसलिए शिवलिंग पर जल या दूध सीधे पात्र से ही अर्पित करना चाहिए।
शिवलिंग को भेंट न करें ये चीजें
भगवान शिव वैराग्य और तप के प्रतीक हैं। इसी कारण शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम, सिंदूर और अन्य शृंगार सामग्री चढ़ाना उचित नहीं माना जाता। हालांकि, अगर माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित हो, तो वहां सुहाग सामग्री अर्पित की जा सकती है।
इन फूल-पत्तों से हैं शिव जी को परहेज
महाशिवरात्रि पर या किसी भी समय किए जाने वाले शिवलिंग पूजन में कोई भी फूल शिव जी को चढ़ाने से पहले जानकारी होना जरूरी है। शिव पुराण में उल्लेख है कि केतकी, कनेर, कमल और तुलसी के पत्ते शिवलिंग पर नहीं चढ़ाए जाते। इसके स्थान पर बेलपत्र, धतूरा, भांग और शमी के पत्ते अर्पित करना शुभ माना गया है। ये सामग्री भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।
शिवलिंग की परिक्रमा का विशेष नियम
सामान्य देवी-देवताओं की तरह शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती। परिक्रमा हमेशा आधी की जाती है और जलाधारी या सोमसूत्र को पार नहीं किया जाता। मान्यता है कि इसी मार्ग से दिव्य ऊर्जा प्रवाहित होती है।
अक्षत अर्पित करते समय रखें ध्यान
शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले अक्षत (चावल) साबुत और साफ होने चाहिए। टूटे हुए या खंडित चावल अर्पित करने से पूजा अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पूजन में इन नियमों का पालन करते हुए की गई पूजा से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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