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सावन के महीने में रामायण पढ़ने का महत्व और फायदे

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jul 30, 2026 04:38 pm IST,  Updated : Jul 30, 2026 04:38 pm IST

सावन माह में अक्सर लोगों को श्री रामचरितमानस का पाठ करते हुए देखा जा सकता है। इस महीने में भगवान राम का सुमिरन करने से राम जी ही नहीं भोलेनाथ भी प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है।

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सावन में रामायण पढ़ने का महत्व और फायदे Image Source : PINTEREST

सावन के महीने में महादेव की विशेष आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस महीने में शिव की उपासना करके उन्हें जल्दी प्रसन्न किया जा सकता है। लेकिन एक बात ज्यादातर लोग नहीं जानते होंगे कि सावन में जितना शिव उपासना का महत्व है, उतनी ही मायने रखती है सावन में भगवान राम की पूजा। शास्त्रों में कहा गया है कि जहां शिव की पूजा होती है वहां राम प्रसन्न होते हैं, जहां राम पूजे जाते हैं वहां शिव भी प्रसन्न हो जाते हैं। जानिए सावन में रामायण पढ़ने का महत्व और फायदे क्या हैं। 

सावन में रामायण पाठ का महत्व

सनाधन धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान राम की पूजा बिना शिव पूजा के अधूरी रहती है, जबकि शिव जी के स्मरण के बिना श्री राम पूजा भी पूरा फल नहीं देती। यही कारण है कि दक्षिण भारत में स्थित रामेश्वरम को 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वोपरि माना गया है। इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं प्रभु राम द्वारा की गई है। ऐसे में सावन माह में सच्चे मन से राम नाम का सुमिरन करता है उसे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूरे माह में प्रतिदिन 1 से 2 घंटे रामायण पाठ करना शुभ माना गया है। इससे सावन में भगवान शिव के साथ श्रीराम को भी प्रसन्न किया जा सकता है।

देवों के देव महादेव ने खुद को राम जी के प्रति समर्पित करते हुए कहा है, "रामेश्वर तु राम यस्य ईश्वरः", यानी कि भगवान राम जिसके ईश्वर हैं।

वहीं श्रीराम कहते हैं ,"रामेश्वर तु रामस्य यः ईश्वरः" यानि कि जो राम के ईश्वर हैं।

लिंग थापि करि बिधिवत पूजा।
शिव समान प्रिय मोहि न दूजा।।
शिव द्रोही मम दास कहावा।
सो नर सपनेहु मोहि न भावा।।
(लंकाकांड, दोहा 1, चौपाई 3)

अर्थात भगवान श्रीराम कहते हैं कि भगवान शिव के समान मुझे कोई दूसरा प्रिय नहीं है, इसलिए शिव मेरे आराध्य हैं। जो व्यक्ति शिव का अनादर करके मुझे प्राप्त करना चाहता है, वह मुझे सपने में भी प्रिय नहीं होता। 

रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी लिखा है:

शंकर प्रिय मम द्रोही, शिव द्रोही मम दास।
ते नर करहिं कल्प भरि, घोर नरक महुँ वास।।

अर्थ: जो व्यक्ति राम जी से बैर रखकर शिव की उपासना करता है या फिर भगवान शिव का विरोध करके स्वयं को राम का भक्त मानता है, वह पुण्य नहीं, बल्कि पाप का भागी बनता है।

सावन में रामायण पढ़ने के फायदे

  • सावन शिव को समर्पित है और शिवजी स्वयं श्रीराम के नाम का जाप करते हैं। इसलिए इस मास में रामायण पाठ करने से भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
  • सावन के 30 दिनों तक रामायण का नियमित पाठ करने वाले घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • सावन में सामूहिक या व्यक्तिगत रूप से रामायण का पाठ करने कि परंपरा है, जिससे घर-परिवार में सुख और शांति बनी रहता है।
  • रामायण के आदर्श चरित्र और प्रेरणादायक प्रसंग व्यक्ति को धर्म, धैर्य और मर्यादा का मार्ग दिखाते हैं, जिससे मन शांत और एकाग्र रहता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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