1. Hindi News
  2. धर्म
  3. सावन में क्या है वो चमत्कारी 'शिवार्चन'? जिसमें 1000 बेलपत्रों के साथ शिवलिंग पर चढ़ाई जाती हैं 1000 किशमिश!

सावन में क्या है वो चमत्कारी 'शिवार्चन'? जिसमें 1000 बेलपत्रों के साथ शिवलिंग पर चढ़ाई जाती हैं 1000 किशमिश!

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Aug 04, 2026 02:02 pm IST,  Updated : Aug 04, 2026 02:47 pm IST

शिवार्चन में भक्त भगवान शिव के 1000 दिव्य नामों का जाप करते हुए शिवलिंग पर 1000 बेलपत्र और 1000 किशमिश अर्पित करते हैं। मान्यता है कि सावन में इस विशेष पूजा को करने से महादेव अपने भक्तों की मनोकामना शीघ्र ही पूरी कर देते हैं।

Sawan Mein Shivarchan- India TV Hindi
'शिवार्चन' से शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं भगवान शिव Image Source : INDIA TV

गोरखपुर के प्रसिद्ध पंडित और ज्योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज कहते हैं, कि सावन में शिवार्चन पूजा का विशेष महत्व होता है। ये पूजा शिव भक्त खुद ही बड़ी आसानी से घर पर कर सकते हैं। इस पूजा के लिए शिवलिंग की जरूरत होती है। अगर घर में शिवलिंग नहीं है तो आप साफ मिट्टी से शिवलिंग निर्मित करते उसकी पूजा भी कर सकते हैं। पंडित जी कहते हैं कि 'शिवार्चन' एक ऐसा उपाय है जिससे महादेव शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की समस्त मनोकामना पूरी कर देते हैं। चलिए जानते हैं पंडित जी अनुसार शिवार्चन की सरल विधि।

शिवार्चन की सामग्री

  • शिवलिंग
  • 1000 बेलपत्र
  • 1000 किशमिश 
  • साफ जल
  • सुगंधित फूल (विशेष रूप से अपराजिता फूल)
  • अक्षत
  • इत्र
  • प्रसाद (फल, मिठाई या खीर)

'शिवार्चन' की विधि

  • सबसे पहले गणेश जी, कार्तिकेय भगवान, माता पार्वती और नंदी महाराज का ध्यान करें।
  • फिर संकल्प लें। इसके लिए आपको हाथ में थोड़े अक्षत और फूल लेकर भगवान का ध्यान करते हुए अपनी मनोकामना मन में कहनी है। 
  • मनोकामना कहने के बाद हाथ में लिए गए अक्षत और फूल भगवान शिव के चरणों में या शिवलिंग पर अर्पित कर दें।
  • फिर शिवलिंग का जल से अभिषेक करें।
  • फिर हाथ में कुछ सुगंधित फूल, थोड़े अक्षत और थोड़ा इत्र लें। फिर इन सभी चीजों को हाथ में तब तक रगड़ना है जब तक फूलों में से तेज खुशबू न आने लगे। इसके बाद इन फूलों को शिवलिंग पर अर्पित कर देना है।
  • इसके बाद भगवान शिव के हर एक नाम के जाप के साथ दाहिने हाथ से 1 बेलपत्र और 1 किशमिश शिवलिंग पर अर्पित करते जाएं। जैसे शिव जी का पहला नाम 'ॐ स्थिराय नमः।' बोलते हुए एक बेलपत्र और एक किशमिश चढ़ाएंगे और ऐसा तब तक करते जाएंगे जब तक भगवान के 1000 नामों का जप पूरा न हो जाए। 
  • जब 1000 नाम पूरे हो जाएं तो शिव जी की आरती करेंगे।
  • फिर पूजा में प्रयोग की गई सभी किशमिश किसी पंडित जी को दान कर देंगे। ध्यान रहे कि इन किशमिश का सेवन आपको नहीं करना है।
  • आप अलग से भगवान को खीर, फल या मिठाई का जो भोग लगाएंगे बस उसी का सेवन किया जा सकता है।

शिव जी के 1000 नाम यहां देखें

अगर 1000 बेलपत्र न मिलें तो क्या करें?

अगर 1000 बेलपत्र न मिल पाएं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस स्थिति में आप जितना हो सके उतने बेलपत्र ले लें। बाकी किशमिश की संख्या पूरी 1000 रखें। शिवार्चन के दौरान जब बेलपत्र समाप्त हो जाए तो किशमिश ही भगवान शिव को अर्पित करते रहें। इससे भी आपकी पूजा पूरी मानी जाएगी।

1000 बेलपत्र और किशमिश से शिवार्चन करने के लाभ

  • धर्म-शास्त्रों अनुसार मान्यता है कि इस विशेष पूजन से महादेव भक्त की बड़ी से बड़ी इच्छा भी पूरी कर देते हैं।
  • यदि व्यापार में घाटा हो रहा हो या आर्थिक तंगी से जूझ रहें हों, तो यह शिवार्चन धन आगमन के द्वार खोलता है।
  • इस पूजा से ग्रह दोष शांत हो जाते हैं।
  • इस पूजा से गंभीर बीमारियों से राहत मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

यह भी पढ़ें:

सावन में रुद्राभिषेक के लिए कौन सा दिन सबसे शुभ होता है? नोट कर लें डेट और मुहूर्त

रुद्राभिषेक के बाद हवन अनिवार्य है या नहीं? जानिए क्या कहते हैं शास्त्र और विद्वान

सावन में रुद्राभिषेक कराना है? तो जान लें इस पूजा में क्या-क्या सामग्री लगेगी

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।