आज देर रात 1 बजकर 25 मिनट पर शनि मीन राशि में वक्री हो जाएंगे यानि उल्टे गति से गोचर करने लगेंगे। इसके बाद 11 दिसंबर की सुबह 5 बजकर 3 मिनट पर मीन राशि में ही मार्गी हो जायेंगे यानि सीधी गति से गोचर करने लगेंगे। यहां बता दें कि सूर्य और चंद्रमा हमेशा मार्गी रहते है और राहु और केतु हमेशा वक्री रहते हैं और बाकि पांच ग्रह पृथ्वी के सापेक्ष अपनी गति के कारण कभी मार्गी तो कभी वक्री होते रहते हैं। भारतीय ज्योतिष के अनुसार शनि, मकर और कुंभ राशि के स्वामी है। इनकी दिशा पश्चिम है, तो वहीं इनका तत्व वायु है। शनि एक शक्तिशाली ग्रह है जिसमें बाधा, विनाश और अवसाद की शक्ति भी है।
शनि तपस्या, दीर्घायु, वृद्धावस्था, एकाग्रता,अनुशासन, प्रतिबंध सद्गति–दुर्गति और न्याय का प्रतिनिधित्व करता है। जब शनि का गोचर चन्द्र राशि के आठवीं राशि में आता है, तो शनि की ढैय्या प्रारंभ होती है, ढैय्या का अर्थ- ढाई वर्ष होता है। इस दौरान जो व्यक्ति तीर्थ यात्रा, स्नान और धर्म संबंधी कार्य करते हैं, तो उन्हें शुभ फलो की प्राप्ति होती है। तो आइए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते हैं कि शनि वक्री से विभिन्न राशि वालों पर क्या प्रभाव होगा। साथ ही जानेंगे कि शनि उनके किस स्थान पर गोचर करेगा और उसके लिए क्या उपाय करने चाहिए।
मेष राशि
शनि आपके बारहवें स्थान में वक्री होंगे। जन्मपत्रिका के बारहवें स्थान का संबंध आपके व्यय और शय्या सुख से है। शनि के इस गोचर से आप शैय्या सुख का अनुभव करेंगे। अगर आप कई दिनों से किसी बात को लेकर परेशान चल रहे थे तो आप रिलैक्स महसूस करेंगे साथ ही आपको नींद अच्छे से आयेगी। कोई नई स्कीम या ऑफर लेने से पहले सोच-समझकर कदम बढ़ाएं। लिहाजा शनि के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए झूठ बोलने से बचने की कोशिश करें।
वृष राशि
शनि आपके ग्यारहवें स्थान पर वक्री होंगे। जन्मपत्रिका के ग्यारहवें स्थान का संबंध हमारे आय और इच्छाओं की पूर्ति से होता है। शनि के इस गोचर से आपकी अधिकतर इच्छाओं की पूर्ति होगी। साथ ही आपकी आय में भी बढ़ोतरी होगी। समाज में भी आपका मान बढ़ेगा। अगर आप कोई नया काम करने की सोच रहें है तो बेझिझक शुरु कर सकते हैं। आपको सफलता अवश्य प्राप्त होगी। लिहाजा शनि के शुभ फल सुनिश्चित करने के लिए-'ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम:' इस मंत्र का 11 बार जाप करें।
मिथुन राशि
शनि आपके दसवें स्थान पर वक्री होंगे। जन्मपत्रिका के दसवें स्थान का संबंध हमारे करियर, राज्य और पिता से होता है। शनि के इस गोचर से आपके पिता के स्वास्थ्य में थोड़ी दिक्कत आ सकती है। उन्हें पेट संबंधी तकलीफ हो सकती है। इसके अलावा आपके जॉब या कार्यस्थल में व्यस्तता बढ़ने की संभावना है। लिहाजा शनि के अशुभ स्थिति से बचने के लिए जरूरतमंद लोगों को आदरपूर्वक खाना खिलाएं।
कर्क राशि
शनि आपके नवें स्थान पर वक्री होंगे। जन्मपत्रिका के नौवें स्थान का संबंध हमारे भाग्य से होता है। चूंकि शनि ही आपका भाग्येश है और वह अपनी ही राशि में गोचर करेगा। तो शनि के इस गोचर से आपके होने वाले कामों में गति आ जायेगी। अगर आप किसी नये बिजनेस की शुरूआत करने की सोच रहे हैं तो बड़ों की राय जरूर लें भाग्य का साथ जरूर मिलेगा। आर्थिक पक्ष से जुड़ी समस्या हल होंगी। लिहाजा शुभ स्थिति सुनिश्चित करने के लिए घर की छत पर कोई भी लकड़ी का समान व्यर्थ में इकट्ठा न होने दें।
सिंह राशि
शनि आपके आठवें स्थान पर वक्री होंगे। जन्मपत्रिका के आठवें स्थान का संबंध हमरे आयु से है। शनि के इस गोचर से आपके स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। इसके अलावा आपको पिछले किसी बात का डर परेशान कर सकता है। लिहाजा शनि के अशुभ स्थिति से बचने के लिए काली उर्द की दाल का दान करें।
कन्या राशि
शनि आपके सातवें स्थान पर वक्री होंगे। जन्मपत्रिका के सातवें स्थान का संबंध हमारे जीवनसाथी से है। शनि के इस गोचर से आपके दांपत्य संबंध में थोड़ी नोक-झोंक हो सकती है। शांत रहकर ठंडे दिमाग से काम लें वरना बात का बतंगड़ बन सकता है। बेहतर होगा कि बिजनेस के कारोबार में सोच-समझकर फैसला लें। लिहाजा शनि के अशुभ स्थिति से बचने के लिए भवन की दहलीज़ साफ रखें और उसकी पूजा करें।
तुला राशि
शनि आपके छठवें स्थान पर वक्री होंगे। जन्मपत्रिका के छठे स्थान का संबंध हमारे मित्र, शत्रु और स्वास्थ्य से है। शनि के इस गोचर से आपके मित्र से किसी बात को लेकर अनबन हो सकती है। शत्रुपक्ष आपको परेशान करने की कोशिश कर सकता है। पार्टनरशिप में कोई काम कर रहे हैं तो आपको उसमें मित्र का सहयोग प्राप्त होगा। लिहाजा शनि के अशुभ स्थिति से बचने और शुभ स्थिति सुनिश्चित करने के लिए नारियल या बादाम बहते पानी में प्रवाहित करें।
वृश्चिक राशि
शनि आपके पांचवें स्थान में वक्री होंगे। जन्मपत्रिका के पांचवें स्थान का संबंध हमारे संतान, बुद्धि, विवेक और रोमांस से है। छात्रों का पढ़ाई में मन लगेगा। शहर या देश से बाहर किसी अच्छे कॉलेज में एडमिशन मिल सकता है। संतानपक्ष की ओर से कोई अच्छी खबर आपको मिलेगी। लवमेट्स के साथ अपना व्यवहार अच्छा रखें। लिहाजा शनि के शुभ स्थिति सुनिश्चित करने के लिए पैतृक घर की कोठरी में तांबे का घोड़ा या बंदर स्थापित करें।
धनु राशि
शनि आपके चौथे स्थान में वक्री होंगे। जन्मपत्रिका के चौथे स्थान का संबंध हमारे भवन, भूमि, वाहन और माता से है। शनि के इस गोचर से माता के स्वास्थ्य में थोड़ी गिरावट आ सकती है। अगर आप कोई नई जमीन लेने की सोच रहे हैं तो कुछ दिन रुक कर लें वरना परिणाम आपके इच्छा अनुसार नहीं होगा। लिहाजा शनि के अशुभ स्थिति से बचने के लिए शनि की वस्तु जैसे काले कपड़े लोहे के बर्तन आदि का इस्तेमाल करें।
मकर राशि
शनि आपके तीसरे स्थान में वक्री होंगे। जन्मपत्रिका के तीसरे स्थान का संबंध हमारे पराक्रम, भाई-बहन और यश से है। शनि के इस गोचर से आप खुद को ताकतवर महसूस करेंगे। Expresion में बदलाव आयेगा जिससे आप अपनी बात को अच्छे रख पायेंगे। भाई-बहन के रिश्ते मजबूत होंगे, लेकिन जितना हो सके उनसे नोक-झोक अनदेखा करें। लिहाजा शनि के शुभ स्थिति सुनिश्चित करने के लिए घर की दहलीज़ पर कील लगाएं।
कुंभ राशि
शनि आपके दूसरे स्थान में वक्री होंगे। जन्मपत्रिका के दूसरे स्थान का संबंध हमारे धन और स्वभाव से है। शनि के इस गोचर करने से आपकी इनकम बढ़ सकती है। जब आप किसी से बात करें तो आवश्यकता से अधिक न बोलें वरना आपके बातों का गलत मतलब निकाला जा सकता है। उम्मीद से अधिक आप सेविंग कर पायेंगे। वाणी पर संयम फायदेमंद रहेगा। लिहाजा शनि के शुभ स्थिति सुनिश्चित करने के लिए मंदिर में दर्शन के लिए घर से नंगे पैर जाएं।
मीन राशि
शनि आपके लग्न स्थान यानि पहले स्थान में वक्री होंगे। जन्मपत्रिका में लग्न यानि पहले स्थान का संबंध हमारे शरीर और मुख से है। शनि के इस गोचर करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्या बन सकती है। अगर आप पढ़ाई कर रहे हैं तो कई रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। घुटने या पैर में दर्द की समस्या बन सकती है। अतः शनि के शुभ स्थिति सुनिश्चित करने के लिए तवा, चिमटा या अंगीठी का दान करें।
(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)
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