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महादेव की पूजा में शंख क्यों है वर्जित? जानिए क्या है इसके पीछे का धार्मिक-आध्यात्मिक आधार

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jun 02, 2026 03:26 pm IST,  Updated : Jun 02, 2026 03:26 pm IST

Shiv Puja Niyam: शंख को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है और ज्यादातर देवी-देवताओं की पूजा में इसका उपयोग किया जाता है। लेकिन शिव पूजा में शंख से जल अर्पित करना या शंख बजाना उचित नहीं माना जाता। इसके पीछे कई धार्मिक मान्यताएं बताई गई हैं। चलिए जानते हैं क्यों शिव पूजा में शंख नहीं बजाते।

शिव पूजा में शंख क्यों...- India TV Hindi
शिव पूजा में शंख क्यों नहीं बजाते Image Source : INDIA TV

Why is Conch Forbidden in Shiva Puja: भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। शिव पूजा में कुछ पूजन सामग्रियों जैसे बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि का विशेष महत्व होता है। लेकिन एक ऐसी वस्तु भी है जिसका प्रयोग शिव पूजा में नहीं किया जाता और वह है शंख। बहुत कम ही लोग यह जानते होंगे कि भोलेनाथ की पूजा में शंख नहीं बजाया जाता है। 

चूंकि धार्मिक अनुष्ठानों और मांगलिक कार्य में शंख बजाकर ही ईश्वर का आह्वान करने की परंपरा है। लेकिन शिव जी से जुड़ी पूजा में इस शुभ वस्तु का उपयोग करने की मनाही बताई जाती है। आखिर महादेव की आराधना में शंख को वर्जित क्यों माना है, इसके पीछे धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों कारण बताए जाते हैं। जिनके बारे में हम आपको यहां बताने जा रहे हैं।  

शिव पूजा में क्यों नहीं होता शंख का प्रयोग?

मान्यताओं के अनुसार, शंख का संबंध शंखचूड़ नामक असुर से जोड़ा जाता है, जिसका वध शिव जी ने किया था। शंख उसी असुर के अवशेषों से उत्पन्न हुआ था। इसीलिए इसे शिवलिंग पर अर्पित करने योग्य नहीं माना गया। यही वजह है कि शिव पूजा में शंख से जल चढ़ाने की मनाही है।

Shiv puja rules
Image Source : INDIA TVशिव पूजा में शंख क्यों नहीं बजाते

भगवान विष्णु से जुड़ा है शंख का विशेष संबंध

शंख भगवान विष्णु के प्रमुख प्रतीकों में से एक है। वैष्णव परंपरा में इसका विशेष महत्व है और उनकी पूजा में शंखनाद को शुभ माना जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, असुर शंखचूड़ पिछले जन्म में विष्णु जी का परम भक्त था। यही कारण है कि उसकी हड्डियों और राख से निर्मित शंख को विष्णु जी ने अपनी पूजा में स्थान दिया। 

दूसरी ओर भगवान शिव की आराधना का स्वरूप ध्यान, तपस्या और साधना से जुड़ा हुआ माना जाता है। इसलिए शिव पूजा में शांति और सादगी को अधिक महत्व दिया जाता है।

Shiv puja rules
Image Source : INDIA TVशिव पूजा में शंख क्यों नहीं बजाते

वैराग्य और मौन के देवता हैं महादेव

भगवान शिव योग, समाधि और वैराग्य का, जबकि शंख को विजय और उत्सव का प्रतीक बताया गया है। शिव पूजा में बाहरी शोर की अपेक्षा आंतरिक श्रद्धा और एकाग्रता को अधिक महत्व दिया जाता है। यही कारण है कि शिव भक्त अक्सर शांत वातावरण में पूजा और ध्यान करते हैं।

मौन साधना अधिक फलदायी

शिवलिंग पर जल, दूध या पंचामृत अर्पित कर शांत मन से मंत्र जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। महादेव की उपासना में ध्यान और मौन साधना का विशेष महत्व है। इसलिए शिव पूजा में शोर-शराबे की बजाय सरलता, भक्ति और एकाग्रता को प्राथमिकता दी जाती है, जो आध्यात्मिक रूप से अधिक लाभ पहुंचाती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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