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भारत की कोचिंग इस पर निर्भर करेगी कि क्या मैं सक्षम हूं : द्रविड़

 Written By: Bhasha
 Published : Apr 06, 2016 04:34 pm IST,  Updated : Apr 06, 2016 04:34 pm IST

नयी दिल्ली: पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ने आज साफ तौर पर कि भारतीय सीनियर क्रिकेट टीम के कोच का पद संभालने पर फैसला इस बात पर निर्भर होगा कि क्या इस हाई प्रोफाइल काम के

rahul dravid and virat kohli- India TV Hindi
rahul dravid and virat kohli

नयी दिल्ली: पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ने आज साफ तौर पर कि भारतीय सीनियर क्रिकेट टीम के कोच का पद संभालने पर फैसला इस बात पर निर्भर होगा कि क्या इस हाई प्रोफाइल काम के लिये उनके पास समय और क्षमता है ।

टीम निदेशक रवि शास्त्री का करार आईसीसी टी20 विश्व कप के बाद खत्म हो गया जिसके बाद से द्रविड़ के कोच बनने की अटकलें लगाई जा रही है लेकिन उन्होंने कोई ठोस जवाब नहीं दिया । द्रविड़ ने कहा , अपनी जिंदगी के इस मुकाम पर मैं कोई भी फैसला इस आधार पर लूंगा कि क्या मुझमें यह सब करने की क्षमता है । 43 बरस के द्रविड़ फिलहाल भारत ए और अंडर 19 टीम के कोच और दिल्ली डेयरडेविल्स के मेंटर हैं । उन्होंने कहा , इसमें समय लगता है । आप कह नहीं सकते कि अब आप तैयार हैं और अब नहीं । यह एक अनुभव है, सीख है । इसको जानने के लिये आपको यह करना होगा । रोज आप इससे कुछ सीखते हैं । उन्होंने कहा कि वह काफी सोच समझकर ही फैसला लेंगे । उन्होने कहा , कोई भी फैसला काफी सोच समझकर लेना चाहिये । सिर्फ इस आधार पर नहीं लेना चाहिये कि आप ऐसा करना चाहते हैं बल्कि यह भी देखना चाहिये कि इसमें कितना समय लगता है और इसकी क्या जरूरतें हैं । क्या आप इतना समय और उर्जा दे सकते हैं । आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपका 100 फीसदी फोकस इस पर है।

द्रविड ने कहा , यह अहम नहीं है कि नतीजे मिलते हैं या नहीं लेकिन क्या आप भारत की कोचिंग जैसे काम के लिये उतना समय और उस स्तर की प्रतिबद्धता दे सकते हैं । क्रिकेट में मुझे पता है कि एक अच्छा बल्लेबाज बनने के लिये कितनी कुर्बानियां मैने दी हैं और कितना समय और प्रतिबद्धता की जरूरत होती है । उनके लिये कोचिंग एक प्रक्रिया है जिसमें रोज कुछ नया सीखने को मिलता है । उन्होंने कहा , मैं इस मामले में बिल्कुल युवा हूं । कई चीजें बतौर खिलाड़ी मैं नहीं सोचता था । कप्तान के तौर पर मैं रणनीति के बारे में सोचता था लेकिन उस गहराई तक नहीं जितना कोच को सोचना होता है । आपका दिमाग और उर्जा दूसरी बातों पर लगा रहता है और आप उन चीजों के बारे में उतना सोचते हैं जितना बतौर खिलाड़ी नहीं सोचते थे । आप गलतियां करते हैं और फिर पता चलता है कि इसे अलग ढंग से किया जा सकता था । उन्होंने जूनियर विश्व कप फाइनल में वेस्टइंडीज के हाथों टीम की हार का जिक्र करते हुए कहा , नतीजों के बारे में भूल जाइये लेकिन मैं सोच रहा था कि हम किस तरह अलग कर सकते थे । हम ऐसी टीम से हारे जिसने 46 ओवर तेज गेंदबाजी की । चूंकि यह उपमहाद्वीप में था तो हमें लगा कि स्पिन गेंदबाजी ज्यादा होगी और हम उसी की तैयारी करते रहे । 

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