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जगनमोहन और शर्मिला के बीच विवाद फिर गहराया, अब कंपनी के शेयरों को लेकर छिड़ी जंग

 Published : Oct 23, 2024 08:59 pm IST,  Updated : Oct 23, 2024 08:59 pm IST

YSR कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाई. एस. जगनमोहन रेड्डी और उनकी बहन वाई. एस. शर्मिला के बीच एक कंपनी के शेयरों के ट्रांसफर को लेकर फिर से जंग छिड़ गई है।

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वाईएस जगनमोहन रेड्डी और वाईएस शर्मिला। Image Source : PTI FILE

हैदराबाद: YSR कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाई. एस. जगनमोहन रेड्डी और उनकी बहन एवं कांग्रेस की आंध्र प्रदेश यूनिट की अध्यक्ष वाई. एस. शर्मिला में एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। जगनमोहन ने शर्मिला पर ‘सरस्वती पावर एंड इंडस्ट्रीज’ के शेयर अपने तथा उनकी मां विजयम्मा के नाम पर अवैध रूप से ट्रांसफर कराने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) का रुख किया है। जगनमोहन ने दावा किया है कि सरस्वती पावर एंड इंडस्ट्रीज का स्वामित्व उनके तथा उनकी पत्नी भारती के पास है।

भाई-बहन के झगड़े ने लिया कानूनी रूप

जगनमोहन और शर्मिला के बीच झगड़े ने इसी के साथ कानूनी लड़ाई का रूप ले लिया है। पिछले महीने दायर याचिका पर NCLT की हैदराबाद बेंच ने सुनवाई की थी और मामले पर अगली सुनवाई के लिए नवंबर की तारीख तय कर दी थी। याचिका में YSRCP अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने शर्मिला के साथ एक समझौता ज्ञापन पर साइन किया था जिसमें उन्होंने कहा था, ‘प्यार और स्नेह के कारण’ वह अपने और अपनी पत्नी के शेयरों को ‘गिफ्ट डीड’ के माध्यम से अपनी अलग हो चुकी बहन को ट्रांसफर कर देंगे, जो ED द्वारा कुर्की समेत कुछ संपत्तियों के संबंध में लंबित मामलों के अधीन होगा।

‘मूल इच्छा पर अमल करने का इरादा नहीं रखता’

जगनमोहन ने अपनी बहन को लिखी चिट्ठी में कहा कि कानूनी दायित्वों को पूरा किए बिना और कोर्ट से मंजूरी के बिना शेयर ट्रांसफर के प्रतिकूल प्रभाव होंगे। हालांकि, उन्होंने समझौता ज्ञापन को रद्द करने की अपनी इच्छा जताते हुए कहा, ‘यह कोई रहस्य नहीं है कि अब हमारे बीच अच्छे संबंध नहीं हैं, और इस बदले हालात को देखते हुए मैं आपको औपचारिक रूप से सूचित करना चाहता हूं कि मैं समझौता ज्ञापन में जताई अपनी मूल इच्छा पर अमल करने का इरादा नहीं रखता हूं।’

जगनमोहन ने कहा- कई कामों से कष्ट पहुंचा

जगनमोहन ने कहा कि उनके पिता, पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी द्वारा अर्जित संपत्ति और पैतृक संपत्तियों को परिवार के सदस्यों के बीच बांटा गया था। उन्होंने कहा कि शर्मिला ने अपने भाई की भलाई की परवाह किए बिना कई ऐसे काम किए, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा और उन्होंने सार्वजनिक रूप से कई झूठे बयान भी दिए। अपने भाई के साथ मतभेदों के बाद शर्मिला इस साल की शुरुआत में कांग्रेस में शामिल हो गई थीं और उन्हें पार्टी की आंध्र प्रदेश यूनिट का अध्यक्ष बनाया गया था। शर्मिला ने मई में हुए लोकसभा चुनाव में कडपा सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन हार गई थीं। (भाषा)

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