सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स, टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स यानी TCS जैसा ही है। इससे सरकार स्टॉक एक्सचेंज पर होने वाले ट्रांजैक्शन पर नजर रख पाएगी और टैक्स चोरी को रोक पाएगी।
1 फरवरी को शेयर बाजार बजट से नाराज दिखा था और यह भारी गिरावट के साथ बंद हुआ था। लेकिन 2 फरवरी को बाजार ने काफी अच्छी रिकवरी कर ली है। बजट के अगले दिन रुपया भी मजबूत हुआ है।
रविवार को बीएसई सेंसेक्स 1546.84 अंकों (1.88 प्रतिशत) की भारी गिरावट के साथ 80,722.94 अंकों पर बंद हुआ।
शेयर बाजार में एक्टिव ट्रेडिंग करने वालों के लिए बजट 2026 किसी झटके से कम नहीं रहा। डेरिवेटिव सेगमेंट, खासकर फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) में ट्रेड करने वाले निवेशकों पर सरकार ने टैक्स का बोझ और बढ़ा दिया है।
बजट 2026 के जिस दिन का निवेशकों को बेसब्री से इंतजार था, वही दिन दलाल स्ट्रीट के लिए किसी 'ब्लैक संडे' में तब्दील हो गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा फ्यूचर और ऑप्शन (F&O) ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ाने के ऐलान ने बाजार की कमर तोड़ दी है। देखते ही देखते सेंसेक्स 2300 अंक तक नीचे गिर गया।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आम बजट पेश कर दिया। हालांकि, शेयर बाजार को ये बजट बिल्कुल भी पसंद नहीं आया और मार्केट में हाहाकार मच गया।
देश का आम बजट हमेशा से ही अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला बड़ा इवेंट रहा है, लेकिन इस बार Budget 2026 सिर्फ घोषणाओं की वजह से नहीं, बल्कि अपने टाइमिंग फैक्टर को लेकर भी इतिहास रचने जा रहा है। 1 फरवरी को बजट रविवार के दिन पेश होगा और इसी के साथ भारतीय शेयर बाजार भी एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है।
सरकार की तरफ से हर साल 1 फरवरी को बजट पेश करना तय है, दिन चाहे कोई हो। इसी हिसाब से शेयर बाजार भी ट्रेडिंग को लेकर फैसला लेते हैं। हालांकि,ऐसा इतिहास में यह दूसरी बार होने जा रहा है जब बजट के दिन रविवार है।
सिर्फ जनवरी महीने में डिफेंस कंपनियों के शेयरों ने 23% तक की तेजी दर्ज की है। माना जा रहा है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में संभावित डिफेंस बजट बढ़ोतरी सेक्टर के लिए दीर्घकालिक रूप से सकारात्मक रहेगी।
सेबी ने कहा कि इस प्रक्रिया में आमतौर पर लगभग 150 दिन लगते हैं। ऐसे में निवेशकों की सुविधा बढ़ाने और समय तथा जोखिम को कम करने के लिए एलओसी जारी करने की जरूरत को खत्म करने का फैसला लिया गया है।
आज के कारोबार में मेटल इंडेक्स में सबसे ज्यादा 5% की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स भी 0.3% लुढ़क गया। बजट से पहले निवेशकों ने सतर्कता का रुख अपनाया।
सेक्टोरल लेवल की बात तो मेटल सेक्टर के अलावा अन्य सभी सेक्टर लाल निशान में व्यापार कर रहे हैं। ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरिएन्स और रियल्टी सेक्टर में 1% की गिरावट आई है।
विदेशी निवेशकों की लगातार जारी बिकवाली और वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है। आज भारतीय रुपया नया ऑल-टाइम लो छूने से निवेशकों की चिंता और बढ़ गई, जिसका असर शेयर बाजार पर साफ़ तौर पर देखने को मिला।
शुक्रवार को बाजार सावधानी के साथ बढ़त की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। हालांकि ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव दिख सकता है, लेकिन घरेलू खरीदारी इंडेक्स को मजबूती प्रदान करेगी।
घरेलू शेयर मार्केट पर पॉजिटिव ग्लोबल संकेतों का असर दिखा। सेक्टर के लिहाज से देखें तो रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर हरे निशान में बंद हुए।
गुरुवार को कारोबार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई। सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा की छलांग लगाते हुए 631.39 अंक की मजबूती के साथ 82,541.02 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 157.20 अंक की बढ़त के साथ 25,314.70 के ऊपर कारोबार करता नजर आया।
कल सेंसेक्स 1065.71 अंकों (1.28 प्रतिशत) की भारी गिरावट के साथ 82,180.47 अंकों पर और निफ्टी 353.00 अंकों (1.38 प्रतिशत) के बड़े नुकसान के साथ 25,232.50 अंकों पर बंद हुआ था।
कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार सोमवार को लाल रंग में खुला और गिरावट का सिलसिला लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। सेंसेक्स 150 अंक गिरकर 82,039 पर आ गया, जबकि निफ्टी 25 अंक की गिरावट के साथ 25,207 पर ट्रेड कर रहा है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस हफ्ते वैश्विक मोर्चे पर जीडीपी वृद्धि दर, बेरोजगारी के दावों और पीएमआई आंकड़ों सहित अमेरिकी व्यापक आर्थिक आंकड़े जोखिम की भावना और मुद्रा की चाल को प्रभावित करेंगे।
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा कि सरकार को इक्विटी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के लिए टैक्स-फ्री छूट सीमा को 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करना चाहिए।
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