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₹49000 की रिश्वत लेते अरेस्ट हुआ था मेडिकल ऑफिसर, जमानत पर रिहा हुआ तो भव्य स्वागत, उठे सवाल

जमानत पर रिहाई के बाद जिस तरह से आरोपी डॉक्टर का सार्वजनिक अभिनंदन किया गया, वह कानून और व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े करता है। जमानत का मतलब यह नहीं होता कि आरोप खत्म हो गए हैं या आरोपी निर्दोष सिद्ध हो चुका है।

Edited By: Khushbu Rawal @khushburawal2
Published : Feb 02, 2026 07:28 pm IST, Updated : Feb 02, 2026 07:28 pm IST
medical officer bribe case- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुमंत कुमार पटेल

ओडिशा राज्य के अंगुल जिला अंतर्गत कणिहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा एक मामला चर्चा में है। कणिहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुमंत कुमार पटेल को विजिलेंस ने रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। विजिलेंस विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 16 जनवरी को डॉ. सुमंत कुमार पटेल को कणिहां CHC परिसर के अंदर ही ट्रैप के दौरान पकड़ा गया।

इंसेंटिव स्वीकृत करने के बदले मांगी थी रिश्वत

आरोप है कि उन्होंने कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स के पक्ष में इंसेंटिव स्वीकृत करने के बदले 49,000 रुपये की रिश्वत की मांग की और उसे स्वीकार भी किया था। विजिलेंस टीम ने पूरी रिश्वत राशि आरोपी के कब्जे से बरामद कर जब्त कर ली थी। इस कार्रवाई के बाद विजिलेंस ने आय से अधिक संपत्ति की जांच के तहत डॉ. पटेल से जुड़े तीन अलग-अलग स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान भी शुरू किया था। मामले में कटक विजिलेंस थाना में केस संख्या 02, दिनांक 15.01.2026 के तहत भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।

आरोपी डॉक्टर को माला पहनाई, नारे लगाए

विजिलेंस कार्रवाई के बाद डॉ. सुमंत कुमार पटेल को आज जमानत मिली है। जमानत पर रिहा होने के बाद कणिहां इलाके में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। इस दौरान समर्थकों द्वारा उनके गले में माला पहनाई गई और नारे लगाए गए। मौके पर भावनात्मक दृश्य भी देखने को मिला। जमानत पर रिहाई के बाद जिस तरह से आरोपी डॉक्टर का सार्वजनिक अभिनंदन किया गया, माला पहनाई गई और नारे लगाए गए, वह कानून और व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े करता है। जमानत का मतलब यह नहीं होता कि आरोप खत्म हो गए हैं या आरोपी निर्दोष सिद्ध हो चुका है। 

क्या लोकप्रियता, कानून से ऊपर है?

यह मामला यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या लोकप्रियता, भावनात्मक जुड़ाव और भीड़ का समर्थन कानून से ऊपर हो सकता है? जिन पर रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने का आरोप है, अगर उन्हीं को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा, तो यह व्यवस्था और प्रशासन के लिए एक खतरनाक संकेत है। फिलहाल पूरे मामले की जांच विजिलेंस विभाग द्वारा जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया संबंधित न्यायालय में विचाराधीन है।

(ओडिशा से शुभम कुमार की रिपोर्ट)

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