नई दिल्ली: संसद में आज राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा हो रही थी लेकिन नेता विपक्ष राहुल गांधी ने वहां पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब के कुछ हिस्सों का उल्लेख कर पूरी बहस को भारत-चीन सीमा विवाद पर केंद्रित कर दिया। राहुल के मुताबिक नरवणे की अप्रकाशित किताब के कुछ हिस्से एक मैगजीन में छपी है उसी का उल्लेख कर वह सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी का कहना है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
2020 में एलएसी पर क्या हुआ?
राहुल गांधी वर्ष 2020 में भारत-चीन एलएसी पर हुए विवाद का उल्लेख कर रहे थे। उनका कहना था कि चीन की पीएलए के 4 टैंक कैलाश रिज की ओर से भारतीय सीमा में घुसे थे। उनके इसी बयान पर संसद में हंगामा हो गया था। दरअसल, चीन से लगती इस सीमा पर उस वक्त क्या हुआ था इसकी पूरी जानकारी इंडिया टीवी ने उस वक्त भी शेयर की थी। आइए जानते हैं कि एक्चुअल में वहां हुआ क्या था?

चीन के नापाक इरादों को सेना ने नाकाम किया
दरअसल, यह पूरा मामला अप्रैल 2020 में शुरू हुआ। पहला फेस ऑफ पैंगोंग त्सो इलाके में हुआ जब चीन की सेना की गतिविधियों को भांपते हुए भारतीय सेना ने अपना विरोध दर्ज कराया और अंदर दाखिल होने से रोक दिया। इसके बाद दूसरी झड़प जून 2020 में गलवान इलाके में हुई थी जिसमें कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू समेत 20 जवान शहीद हुए थे। चीन को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा था। उसके भी कई सैनिक इस झड़प में मारे गए थे। लेकिन चीन की सेना भारतीय सीमा में दाखिल नहीं हो पाई थी। हां, एलएसी पर तनाव काफी बढ़ गया था और दोनों सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं।

ऊंची चोटियों पर भारतीय सेना की मौजूदगी ने चीन को चौंकाया
इस दौरान अगस्त महीने में सांगुर गैप से पीएलए के टैंक भारत की ओर आगे बढ़ रहे थे। लेकिन चीन की हरकत से पहले ही उस इलाके की चोटियों को कैप्चर कर भारतीय सेना पहले से पूरी तरह से मुस्तैद थी। 24 घंटे चीन की हरकतों की निगरानी की जा रही थी। लेकिन भारतीय सेना ने चीनी टैंकों को रोकते हुए उन्हें वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया। इलाके की चोटियों पर भारतीय जवानों की तैनाती से चीन भी घबरा गया और कोर कमांडर लेवल पर बातचीत के बाद डिस्इंगेजमेंट किया गया। हम आपको साफ-साफ बता दें कि भारतीय सेना ने चीन को भारतीय सीमा में दाखिल नहीं होने दिया। चीनी टैंकों की वापसी की तस्वीरें भी इंडिया टीवी के पास है। इन तस्वीरों में चीनी टैंकों को वापस जाते हुए देखा जा सकता है। साथ ही इन ऊंची चोटियों पर तैनात भारतीय सेना की तस्वीरें इंडिया टीवी के पास है।