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कैंसर से बचने के लिए जापानी लोग अपनाते हैं 'फॉरेस्ट बेदिंग' तरीका, जानिए कैसे ये शरीर में बीमारियों को घुसने से रोकता है

 Written By: Bharti Singh Edited By: Pankaj Kumar
 Published : Feb 02, 2026 11:04 am IST,  Updated : Feb 02, 2026 11:04 am IST

Japanese Forest Bathing Practice To Prevent Cancer: कैंसर से बचना है तो उसके लिए बीमारियों को शरीर से दूर रखें। जापानी लोग कैंसर से बचने के लिए 'शिनरिन-यो' तरीका जिसे 'फॉरेस्ट बेदिंग' कहते हैं उसे अपनाते हैं। जानिए इसमें क्या खास होता है?

कैंसर से बचने का तरीका- India TV Hindi
कैंसर से बचने का तरीका Image Source : FREEPIK

आज की दुनिया तेज रफ़्तार है, हर कोई भाग रहा है वक्त के पीछे, काम के पीछे, जिंदगी के पीछे, लेकिन एक चीज की स्पीड उससे भी ज्यादा है। वो है 'बीमारी' हम मेडिकल इंश्योरेंस करवाते हैं। अस्पताल ढूंढ़ते हैं और दवाइयों की कीमत गिनते हैं। टेस्ट रिपोर्ट्स में मार्कर चेक करते हैं और सब एहतियात लेते हैं कि बीमारी को हरा सकें। लेकिन कुदरत की जो नेमतें मुफ्त में मिली हैं उन्हें नज़रंदाज़ करते हैं। जी हां, सेहत किसी मशीन में नहीं है सेहत इसी हवा में है, धूप में है, इसी गहरी सांस में है। सवाल ये नहीं कि इस बजट में दवा कितनी सस्ती हुई, सवाल ये है क्या हम बीमारी को शरीर में दाखिल होने से रोक पा रहे हैं? क्योंकि जब इलाज शुरू होता है, तब तक नुकसान हो चुका होता है। लेकिन जब जीवनशैली सुधरती है, तो बीमारी आने की जुर्रत ही नहीं करती। और यही वजह है कि आज हम बात कर रहे हैं उस सेहत की जो अस्पतालों में नहीं, पार्क की वॉक में छुपी है, सांस लेने के सही तरीके में छुपी है और हेल्दी लाइफ जीने के सलीके में छुपी है।

कैंसर को रोकने की जापानी तकनीक 'फॉरेस्ट बेदिंग'

जी हां हरियाली, बाग बगीचे और पेड़ पौधे, ये इलाज है, ये दवा है और ये तरीका है लंबी उम्र जीने का। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को रोकने का। इसे 'फॉरेस्ट बेदिंग' कहते हैं। जापान में इसे 'शिनरिन-यो' कहते हैं। ये अपनी पांचों इंद्रियों-सेंसरी सेंस के जरिए जंगल को महसूस करने की प्रक्रिया है। इसमें सबसे पहले है सूरज की रोशनी और हरी पत्तियां को देखना। दूसरा पेड़ों से निकलने वाले कार्बन कम्पाउंड्स को सूंघना। तीसरा पक्षियों की आवाज, हवा की सरसराहट को सुनना। चौथा पेड़ और मिट्टी को छूना और आखिर में ताजी साफ हवा को महसूस करना। इन्हीं कुदरती चीज़ों में छुपी है 'नेचुरल किलर सेल्स' जो शरीर में बनने वाली कैंसर कोशिकाओं और वायरस को शुरुआत में ही खत्म कर देती हैं। बड़ी बात ये कि सिर्फ एक दिन, हरे भरे जंगल में बिताने से इम्यून सिस्टम कई हफ्तों तक मजबूत रहता है। यही वजह है जापान में जहां ग्रीनरी में घूमने की आदत ज्यादा हैं वहां फेफड़े, ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर से मौत की रेशियो भी कम है। 

क्यों तेजी से बढ़ रहा है कैंसर का खतरा

दरअसल आज सबसे बड़ा जहर 'टेक्नो स्ट्रेस' है। मोबाइल, स्क्रीन, शोर इन सबने इंसान की इम्यूनिटी को कमजोर कर दिया है और ऐसे में जंगल की शांति, इस शोर से बाहर निकलने का सबसे आसान-सस्ता तरीका है। मतलब दवा तो तभी चाहिए जब बीमारी आए, लेकिन अगर हर रोज थोड़ी हरियाली, थोड़ी हवा, थोडा सुकून जिंदगी में शामिल हो जाए, तो शायद दवा की जरूरत पड़े ही ना। आइये स्वामी रामदेव से जानते हैं बीमारियों को शरीर में दाखिल होने से कैसे रोकें।

जानलेवा है कैंसर

कैंसर की पहचान अगर सही वक्त पर कर ली जाए तो इससे मरीज की जान बचाना आसान हो जाता है। शुरुआती स्टेज में ठीक होने के चांस भी ज्यादा रहते हैं। 70% लोगों का कैंसर लास्ट स्टेज में डिटेक्ट होता है। हर 9 में से एक पर कैंसर का खतरा मंडरा रहा है। ऑक्सफॉर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में करीब 40% महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की गिरफ्त में हैं। 10 साल में डेथ रेट में कमी तो आई है लेकिन कैंसर तेजी से पैर पसार रहा है। सर्वाइवल रेट 70% तक पहुंचा है।

कैंसर के रिस्क फैक्टर 

  • मोटापा
  • स्मोकिंग
  • एल्कोहल
  • प्रदूषण
  • पेस्टिसाइड
  • सनबर्न

कैंसर का बचाव ही इलाज, क्या ना खाएं?

  • प्रोसेस्ड फूड
  • तली-भुनी चीज़ें
  • रेड मीट
  • कार्बोनेटेड ड्रिंक्स     

कैंसर से बचाव

  • व्हीटग्रास
  • गिलोय
  • एलोवेरा
  • नीम
  • तुलसी
  • हल्दी

 

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