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Parveen Shakir Shayari: इतने घने बादल के पीछे, कितना तन्हा होगा चांद, यहां पढ़ें परवीन शाकिर की मशहूर शायरी

 Written By: Ritu Raj
 Published : Jun 03, 2026 07:01 pm IST,  Updated : Jun 03, 2026 07:01 pm IST

Parveen Shakir Shayari: परवीन शाकिर एक बेहतरीन शायरा थीं। उनकी लिखी शायरी आज भी लोगों के दिलों में बसती है। अगर आप भी शेरों, शायरी का शौक रखते हैं तो यहां पढ़ें परवीन शाकिर की 120 मशहूर शायरी।

Parveen Shakir Shayari- India TV Hindi
Parveen Shakir Shayari Image Source : INDIA TV

परवीन शाकिर उर्दू साहित्य की एक बेहद खूबसूरत, संवेदनशील और बेहद लोकप्रिय शायरा थीं। उन्होंने अपनी शायरी के ज़रिए उर्दू अदब में महिला दृष्टिकोण और उनकी भावनाओं को एक नया और बेहद मज़बूत मुकाम दिया। उन्हें "खुशबू की शायरा" कहा जाता था। उन्होंने एक लड़की और औरत के सच्चे जज्बातों, उसके प्यार, उसकी कशमकश, मान-सम्मान और समाज के दोहरे रवैये को बेहद सादगी और गहराई से लिखा। उनकी शायरी आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। यहां हम परवीन शाकिर की मशहूर शायरी लेकर आए हैं।

1.बारहा तेरा इंतिज़ार किया

अपने ख़्वाबों में इक दुल्हन की तरह

2.राय पहले से बना ली तू ने
दिल में अब हम तिरे घर क्या करते

3.अब्र बरसे तो इनायत उस की
शाख़ तो सिर्फ़ दुआ करती है

4.शब वही लेकिन सितारा और है
अब सफ़र का इस्तिआरा और है

5.क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वाला
ज़ख़्म ही ये मुझे लगता नहीं भरने वाला

6.घर आप ही जगमगा उठेगा
दहलीज़ पे इक क़दम बहुत है

7.ज़िंदगी मेरी थी लेकिन अब तो
तेरे कहने में रहा करती है

8.जंग का हथियार तय कुछ और था
तीर सीने में उतारा और है

9.रात के शायद एक बजे हैं
सोता होगा मेरा चांद

10. बहुत से लोग थे मेहमान मेरे घर लेकिन
वो जानता था कि है एहतिमाम किस के लिए

11.इसी तरह से अगर चाहता रहा पैहम
सुख़न-वरी में मुझे इंतिख़ाब कर देगा

12.पास जब तक वो रहे दर्द थमा रहता है
फैलता जाता है फिर आँख के काजल की तरह

13.मसअला जब भी चराग़ों का उठा
फ़ैसला सिर्फ़ हवा करती है

14.गवाही कैसे टूटती मुआमला ख़ुदा का था
मिरा और उस का राब्ता तो हाथ और दुआ का था

15.रफ़ाक़तों का मिरी उस को ध्यान कितना था
ज़मीन ले ली मगर आसमान छोड़ गया

16.क़दमों में भी तकान थी घर भी क़रीब था
पर क्या करें कि अब के सफ़र ही अजीब था

17. हारने में इक अना की बात थी
जीत जाने में ख़सारा और है

18. मैं उस की दस्तरस में हूं मगर वो
मुझे मेरी रज़ा से मांगता है

19. हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानां
दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं

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