केंद्रीय बजट 2026 में भारत के हेल्थकेयर इकोसिस्टम को लेकर वित्त मंत्री निर्मला रमन ने कई बड़े ऐलान की हैं। इन घोषणाओं से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है। डायबिटीज सहित कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियों की दवाएं सस्ती की जाएंगी। साथ ही 10 हजार करोड़ के बायोफार्मा शक्ति मिशन के ज़रिए बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाया जाएगा। ऐसे में चलिए डॉक्टर्स से जानते हैं इस बजट को लेकर उनकी क्या प्रतिक्रिया है?
बजट को लेकर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
- सरकार का एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स पर फोकस हमारे हेल्थकेयर वर्कफोर्स को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 1 लाख AHPs और 1.5 लाख केयरगिवर्स को ट्रेनिंग देने से एलाइड और जेरियाट्रिक केयर (बुजुर्गों की देखभाल) में मौजूद अहम कमी को पूरा किया जा सकेगा। मेडिकल टूरिज्म और आयुर्वेद से जुड़ी पहलों के साथ मिलकर यह भारत को व्यापक स्वास्थ्य सेवाओं का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार करता है।
डॉ. आशीष चौधरी, मैनेजिंग डायरेक्टर, आकाश हेल्थकेयर
- स्वास्थ्य के लिए बायोफार्मा पर जोर देना, खासकर लाइफस्टाइल बीमारियों को ध्यान में रखते हुए, बायोफार्मा शक्ति जैसी पहल, रिसर्च के लिए राष्ट्रीय संस्थान, क्लिनिकल ट्रायल्स को समर्थन और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) को मजबूत करनाये सभी कदम देश की क्षमताओं को बढ़ाएंगे और भारत को ग्लोबल बायोफार्मा हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगे।
डॉ. एन.के. पांडे, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, एशियन हॉस्पिटल
- हेल्थ एजुकेशन और केयरगिविंग को बढ़ावा देने की सरकार की योजना मातृत्व देखभाल और जेरियाट्रिक केयर पर सीधे असर डालेगी। मेडिकल टूरिज्म से जुड़ी पहलों के साथ मिलकर यह विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं देने के नए अवसर पैदा करती है। आयुर्वेद और योग को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने से भारत की समग्र स्वास्थ्य प्रणाली और मजबूत होगी।
डॉ. हृषिकेश पाई, कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट एवं IVF स्पेशलिस्ट, लीलावती हॉस्पिटल मुंबई एवं फोर्टिस हॉस्पिटल्स दिल्ली व चंडीगढ़
- बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब को बढ़ाने पर फोकस से भारत की ग्लोबल लाइफ-साइंसेज हब के रूप में स्थिति मजबूत होगी। 1 लाख एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स और 1.5 लाख केयरगिवर्स की ट्रेनिंग हेल्थकेयर सेक्टर की मानव संसाधन जरूरत को सीधे पूरा करती है। दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरणों और AI आधारित कृत्रिम अंगों के विकास को समर्थन भी स्वागत योग्य कदम है। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद का विस्तार, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म के लिए पांच हब बनाना और आयुर्वेद एक्सपोर्ट पर नया फोकस यह संकेत देता है कि भारत पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक हेल्थकेयर उत्कृष्टता के साथ जोड़ना चाहता है।
राजनीश भंडारी, फाउंडर, NeuroEquilibrium
- एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स और केयरगिवर्स में निवेश मरीजों की पहुंच और इलाज की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक बेहद जरूरी कदम है। क्षेत्रीय मेडिकल हब और निजी क्षेत्र की साझेदारी पर फोकस से हेल्थकेयर की पहुंच बढ़ेगी। आयुर्वेद और योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना पारंपरिक और रोकथाम आधारित चिकित्सा में भारत की नेतृत्व क्षमता को मजबूत करता है।
डॉ. विनीत मल्होत्रा, डायरेक्टर, VNA हॉस्पिटल
- ऑप्टोमेट्री और रेडियोलॉजी जैसे क्षेत्रों में एलाइड हेल्थ संस्थानों को बढ़ावा देने से डायग्नोस्टिक्स और मरीजों की देखभाल मजबूत होगी। केयरगिवर्स और एलाइड स्टाफ के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम से समग्र रूप से सेवा की गुणवत्ता बेहतर होगी।
डॉ. रवि कपूर, फाउंडर एवं डायरेक्टर, सिटी एक्स-रे एंड स्कैन क्लिनिक
- भारत की बढ़ती बुजुर्ग आबादी को देखते हुए एलाइड और जेरियाट्रिक केयर वर्कफोर्स का विकास बेहद जरूरी है। 1.5 लाख प्रशिक्षित केयरगिवर्स पर जोर देना लंबे समय के लिए गुणवत्तापूर्ण देखभाल की प्रतिबद्धता को दिखाता है। मेडिकल टूरिज्म हब और आयुर्वेद संस्थानों के साथ भारत उन्नत और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बन सकता है।
डॉ. प्रवीण गुप्ता, चेयरमैन - मैरिंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन (MAIINS)