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Budget 2026 में बांग्लादेश के विकास पर चला भारत का बुलडोजर, यूनुस सरकार हो जाएगी अपाहिज

भारत ने केंद्रीय बजट 2026 में पड़ोसी देशों को दी जाने वाली सहायता में बड़ा संशोधन करते हुए बांग्लादेश को तगड़ा झटका दिया है। भारत ने बांग्लादेश को दी जाने वाली सहायता को आधी कर दिया है। इससे यूनुस सरकार की अर्थव्यवस्था अपाहिज हो सकती है।

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Feb 01, 2026 04:11 pm IST, Updated : Feb 01, 2026 04:11 pm IST
संसद में बजट-2026 पेश करतीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।- India TV Hindi
Image Source : PTI संसद में बजट-2026 पेश करतीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।

नई दिल्लीः केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट-2026 में भारत ने बांग्लादेश के विकास पर बड़ा बुलडोजर चलाया है। हर साल पड़ोसी देशों को जारी होने वाले इस बजट में संशोधन से बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था बिलकुल अपाहिज हो जाएगी। भारत का एक एक्शन यूनुस सरकार को कई विकास योजनाओं में लगभग अपंग बना देगा। इसकी प्रमुख वजह है कि बांग्लादेश में भारत द्वारा जारी बजट से अब तक सैकड़ों प्रमुख विकास योजनाएं संचालित हो रही थीं, मगर यूनुस सरकार के रवैये के चलते इस बार के बजट में भारत ने बांग्लादेश की मदद से हाथ खींचते हुए उसके बजट को आधा कर दिया है। 

यूनुस सरकार को भारत ने बजट से दिया बड़ा सदमा

भारत ने इस बार के अपने केंद्रीय बजट से बांग्लादेश की यूनुस सरकार को बहुत बड़ा झटका दिया है। बांग्लादेश को इस बार भारत की विदेशी सहायता में सबसे तेज कटौती का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि बांग्लादेश के लिए जारी होने वाले बजट का आवंटन मोदी सरकार ने इस बार 120 करोड़ रुपये से घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया है। वहीं अधिकांश अन्य पड़ोसी देशों को दी जाने वाली सहायता को बनाए रखा गया है या उसे बढ़ाया गया है। भारत ने यह कदम बांग्लादेश के साथ चल रहे तनावपूर्ण संबंधों और हिंदुओं व अल्पसंख्यकों पर जारी हमलों का सबक सिखाने के लिए उठाया है। यह बांग्लादेश की कार्यवाहक यूनुस सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका है। 

अच्छे संबंधों वाले अन्य पड़ोसी देशों की सहायता बरकरार

भारत ने अपने केंद्रीय बजट 2026-27 में अपनी विदेशी विकास सहायता को काफी हद तक संशोधित किया है, जिसमें बांग्लादेश को दी जाने वाली सहायता को आधा कर दिया है। यह कदम द्विपक्षीय संबंधों में बढ़ते तनाव को दर्शाता है। भारत ने यह कदम बांग्लादेश में लगातार बढ़ती हिंदू-विरोधी घटनाओं और हत्याओं की घटनाएं सामने आने के बाद उठाया है। लिहाजा बांग्लादेश को भारत की ओर से दी जाने वाली विदेशी सहायता में सबसे तेज कटौती कतरे हुए इसका आवंटन पहले से आदा कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर भारत के साथ अच्छे संबंध रखने वाले अन्य पड़ोसी देशों को दी जाने वाली मदद को बरकरार रखा गया है। 

1 साल पहले बांग्लादेश को हुआ था 120 करोड़ का आवंटन

दस्तावेज़ों में यह भी खुलासा हुआ कि भारत ने बांग्लादेश के लिए गत वित्तीय वर्ष में 120 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन तनावपूर्ण संबंधों के कारण इसमें से केवल 34.48 करोड़ रुपये की धनराशि ही खर्च की गई है। जबकि भूटान उन देशों की सूची में सबसे ऊपर बना हुआ है जो भारत से सहायता प्राप्त करने में आगे है। इसके बाद नेपाल, मालदीव और श्रीलंका हैं। इन “देशों को सहायता” के तहत आवंटन को बढ़ाकर 5,686 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले साल के बजट अनुमानों के 5,483 करोड़ रुपये से लगभग 4% अधिक है। 

ईरान के चाबहार पोर्ट के लिए बड़ा अपडेट

भारत के इस बजट में एक बड़ा बदलाव चाबहार पोर्ट परियोजना के लिए फंडिंग की पूरी अनुपस्थिति के तौर पर देखने को मिली है। भारत ने 2024-25 में इस परियोजना पर 400 करोड़ रुपये खर्च किए थे और शुरू में 2025-26 के बजट अनुमानों में 100 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, जिसे बाद में संशोधित अनुमानों में 400 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया गया था। वहीं अब अमेरिकी प्रतिबंधों को देखते हुए 2026-27 के लिए आवंटन शून्य कर दिया गया है। यह तब हो रहा है जब भारत ने 2024 में चाबहार में शहीद बेहेश्ती टर्मिनल को संचालित करने के लिए 10 साल का समझौता किया था, जो पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक भारत की पहुंच के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। 

ईरान पर ट्रंप की ओर से लगाए प्रतिबंधों के बाद फैसला

चाबहार के लिए फंडिंग में इस ठहराव का समय भारत के ईरान के साथ जुड़ाव पर बढ़ते बाहरी दबाव के साथ मेल खाता है। यह फैसला तब लिया गया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ की घोषणा की है। वहीं अमेरिका ने पहले की प्रतिबंध छूट को प्रभावी रूप से सीमित कर दिया है। यह विकास चाबहार परियोजना में भारत की भूमिका और इसके व्यापक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजनाओं में अनिश्चितता जोड़ता है। इस बीच, भूटान भारत की सहायता प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा देश बना हुआ है, जहां इसका आवंटन लगभग 6% बढ़कर 2,289 करोड़ रुपये हो गया है, जो जलविद्युत और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए निरंतर समर्थन को दर्शाता है।

भूटान के साथ नेपाल व श्रीलंका की सहायता में भी बढ़ोतरी

भूटान के साथ ही साथ नेपाल को दी जाने वाली सहायता में भी 14% की वृद्धि की गई है। इसके साथ नेपाल को 800 करोड़ रुपये की मदद मिली है। जबकि श्रीलंका की सहायता लगभग एक-तिहाई बढ़कर 400 करोड़ रुपये हो गई है, जो संकट के बाद द्वीप राष्ट्र की रिकवरी में भारत की भूमिका को उजागर करता है। हिंद महासागर क्षेत्र में आवंटन मिश्रित हैं। मालदीव को लगभग 8% की कटौती के साथ 550 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि मॉरीशस को समान राशि के लिए 10% की वृद्धि मिली है।

इन देशों की सहायता स्थिर या घटी

भारत ने केंद्रीय बजट 2026 में अफगानिस्तान को मानवीय सहायता के लिए मुख्य रूप से 150 करोड़ रुपये को अपरिवर्तित रखा है। जबकि म्यांमार का आवंटन राजनीतिक अस्थिरता और कार्यान्वयन चुनौतियों के बीच लगभग 14% घटाकर 300 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं अफ्रीकी देशों की सहायता 225 करोड़ रुपये पर स्थिर बनी हुई है, लैटिन अमेरिका के लिए फंडिंग कम आधार से दोगुनी होकर 120 करोड़ रुपये हो गई है, और यूरेशियाई देशों के लिए समर्थन थोड़ा घटकर 38 करोड़ रुपये रह गया है।

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