मुंबई के जुहू इलाके में रविवार तड़के उस वक्त सनसनी फैल गई, जब मशहूर फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के घर के बाहर अचानक फायरिंग की घटना सामने आई। 1 फरवरी 2026 की रात करीब 12:45 बजे हुई इस वारदात ने न सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री बल्कि पूरे शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए। राहत की बात यह रही कि घटना के समय रोहित शेट्टी घर पर मौजूद होने के बावजूद पूरी तरह सुरक्षित रहे। घटना के वक्त शेट्टी टावर्स की लॉबी में ड्यूटी पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड CCTV मॉनिटरिंग स्क्रीन के पास बैठा हुआ था। उसके साथ एक और बॉडीगार्ड, वहीद मलिक, मौजूद था। इसी दौरान उसने अचानक पटाखों जैसी तेज आवाजें सुनीं। शुरुआत में कुछ समझ नहीं आया, लेकिन जब उसने तुरंत CCTV स्क्रीन पर नजर डाली तो एक चौंकाने वाला मंजर सामने था।
CCTV में कैद हुआ हमलावर
CCTV फुटेज में साफ दिखाई दिया कि एक अनजान व्यक्ति, जिसने काली जैकेट और सफेद पैंट पहन रखी थी, रोड नंबर 10 के पास शेट्टी टावर्स की कंपाउंड वॉल के नज़दीक खड़ा था। उसके हाथ में पिस्तौल जैसी दिखने वाली बंदूक थी, जिससे वह सीधे बिल्डिंग की ओर फायरिंग कर रहा था। फुटेज के अनुसार, हमलावर ने कुल पांच राउंड फायर किए। जिस समय गोलियां चलाई गईं, रोहित शेट्टी उसी इमारत की सातवीं मंज़िल पर अपने फ्लैट में आराम कर रहे थे। एक पुलिस बॉडीगार्ड, आशीष राणे, छठी मंजिल पर खाना खा रहा था। फायरिंग की आवाज़ सुनते ही लॉबी में मौजूद सिक्योरिटी अलर्ट हो गई और हालात को समझने में देर नहीं लगी।
हत्या की नीयत का आरोप
फायरिंग के तुरंत बाद, वहीद मलिक और गेट पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड सत्यम पाठक बाहर की ओर दौड़े। उन्होंने हमलावर को पुष्पा पार्क की दिशा में तेज़ी से भागते हुए देखा, लेकिन अंधेरे और अचानक हुई घटना के कारण उसे पकड़ना संभव नहीं हो सका। शिकायतकर्ता ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि यह हमला रोहित शेट्टी को जान से मारने की नीयत से किया गया था। उसके अनुसार, जिस तरह से बिल्डिंग की ओर निशाना साधकर गोलियां चलाई गईं, उससे यह महज डराने की कोशिश नहीं बल्कि एक सुनियोजित हत्या का प्रयास लगती है। यह बयान मराठी भाषा में दर्ज किया गया, जिसे पढ़कर सुनाया गया और शिकायतकर्ता ने उसे सही और सटीक बताया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही जुहू पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची। फोरेंसिक जांच शुरू की गई और आसपास के इलाके की घेराबंदी कर दी गई। कुछ ही घंटों में पुलिस ने मामले से जुड़ी अहम कड़ियां जोड़नी शुरू कर दीं। पुलिस जांच में सामने आया कि हमलावर एक होंडा डियो स्कूटर पर वहां पहुंचा था। यह स्कूटर पुणे के एक निवासी के नाम पर रजिस्टर था, जिसने कुछ दिन पहले ही इसे 30,000 रुपये में आदित्य गायकी नाम के युवक को बेचा था। हैरानी की बात यह है कि यह सौदा सादे कागज पर हस्ताक्षर लेकर किया गया था, ताकि पहचान छुपाई जा सके।
गैंगस्टर शुभम लोनकर का कनेक्शन
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, स्कूटर खरीदने से लेकर उसे मुंबई में छोड़ने तक के निर्देश कथित तौर पर गैंगस्टर शुभम लोनकर दे रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि आदित्य गायकी और समर्थ पोमाजी ने स्कूटर को जुहू इलाके में एक तय जगह पर छोड़ दिया था। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी साजिश में शामिल कई लोगों को यह तक नहीं पता था कि असली शूटर कौन है। पुलिस का मानना है कि यह तरीका पहले भी कई अपराधों में इस्तेमाल किया जा चुका है, जहां एक ही वारदात के लिए अलग-अलग छोटे ग्रुप बनाए जाते हैं। हर ग्रुप को सीमित जानकारी दी जाती है, ताकि पकड़े जाने पर पूरी साजिश का खुलासा न हो सके। हाल, मुंबई पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और रोहित शेट्टी की सुरक्षा और बढ़ा दी गई है।
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