वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने ऐसे समय में बजट पेश किया, जब पूरी दुनिया में आर्थिक उथल-पुथल है, हर देश की अर्थव्यवस्था दबाव में है लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर है, दुनिय़ा की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत की आर्थिक विकास दर दुनिया में सबसे ज्यादा है। वित्त मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती है, भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए रिफॉर्म एक्सप्रेस को रफ्तार देने की।
बहुत से लोगों को बजट समझ ही नहीं आया। अखिलेश यादव ने तो वित्त मंत्री के भाषण के बाद कहा कि ये बजट सिर्फ देश के पांच प्रतिशत लोगों के लिए हैं, मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस बजट में SC-ST और OBC के लिए कुछ नहीं है, अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वित्त मंत्री के भाषण में बंगाल का नाम नहीं आया, ममता बनर्जी ने कहा, बजट बेकार है।
ये बजट की आलोचना करने का परंपरागत तरीका है। सरकार का दावा है कि ये बजट पारम्परिक नहीं है। पहले जब बजट आता था तो इनकम टैक्स स्लैब्स की बात होती थी, क्या सस्ता होगा, क्या मंहगा होगा, किस राज्य को क्या मिलेगा, कौन सी नई रेलगाड़ियां चलेंगी, किस मंत्रालय को कितना पैसा मिलेगा, इन्हीं पर बात होती थी।
लेकिन नरेन्द्र मोदी ने इस सोच को बदला। रविवार का बजट सरकार की नीतियों और सरकार के नजरिए का ब्लू प्रिंट है। सरकार जरूरी चीजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना चाहती है, हथियार और फाइटर जैट्स अपने ही देश में बनाना चाहती है, सेमी-कंडक्टर्स और माइक्रोचिप्स का निर्माण खुद करना चाहती है, रेयर अर्थ मेटल के उत्पादन और परिवहन की व्यवस्था तैयार करना चाहती है, AI डेटा सेंटर में भारत का वर्चस्व चाहती है।
ट्रंप के टैरिफ के बाद विश्व व्यवस्था बदली है, अब भारत के प्रोडक्टस की मांग बढ़े, मैन्युफैक्चरिंग बढ़े, सप्लाई चेन दुरूस्त हो, इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाना जरूरी है। इसीलिए निर्मला सीतारामन ने जो बजट पेश किया, उसमें रक्षा के अलावा रेल, सड़क और जलमार्ग सारे नेटवर्क को मजबूत करने, सेमीकंडक्टर हब, रेयर अर्थ मैटरेरियल हब, टैक्सटाइल हब और हर शहर में इंडस्ट्रियल कॉरीडोर बनाने का ऐलान किया गया।
सरकार का दावा है कि बजट आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत बनाने के संकल्प का सबूत है। इसमें गांवों में रहने वाले गरीबों, महिलाओं, युवाओं, व्यापारियों और किसानों का पूरा ख्याल रखा गया है। इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे और भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
पूरे बजट को गौर से देखें। सरकार का फोकस इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर है। सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई है, इनमें 5 कॉरिडोर महाराष्ट्र से लेकर दक्षिण भारत के बीच होंगे, जबकि दो उत्तर भारत में। इसके अलावा बीस नए जलमार्ग बनेंगे, जहाजों की मरम्मत के लिए वाराणसी, पटना और गुवाहाटी में हब बनेंगे।
रेयर अर्थ मैटल्स के उत्पादन और परिवहन के लिए चार राज्यों में स्पेशल हब बनेंगे। इससे चीन और अमेरिका पर रेयर अर्थ मैटल्स की निर्भरता कम होगी। आपको याद होगा कुछ वक्त पहले चीन ने रेयर अर्थ मेटल्स की सप्लाई रोक दी थी जिससे हमारी सेमीकंडक्टर बनाने की योजनाएं रूक गईं थीं। इसीलिए अब सरकार इस पर ध्यान दे रही है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए छोटे-छोटे शहरों में औद्योगिक हब बनाए जाएंगे। पांच लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों के विकास के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
ऑरेन्ज इकॉनोमी को बढ़ावा देने के लिए 15 हजार सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स बनाई जाएंगी। ऑरेन्ज इकॉनोमी में ग्राफिक्स, एनिमेशन, गेमिंग जैसी सर्विसेज आती हैं।
रक्षा बजट में 15 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोत्तरी की गई है। रक्षा बजट को करीब एक लाख करोड़ रुपये बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसमें सबसे ज्यादा पैसा तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण और नए हथियारों के विकास पर खर्च होगा।
इस समय हमारे सामने एक बड़ी चुनौती ये है कि शहरों पर बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदूषण, परिवहन, आवास, इन सबका दबाव है। शहरों में रहना मुश्किल होता जा रहा है। इसीलिए हाई स्पीड कॉरिडोर, परम्परागत दवाओं और चिकित्सा पर जोर, आयुर्वेद के अस्पताल, छोटे शहरों को ताक़त देने पर खर्च होंगे ताकि शहरों में जीवन बेहतर और आसान हो सके।
नरेंद्र मोदी की खासिय़त ये है कि वह संकट से सीखते हैं, आपदा को अवसर में बदलते हैं। इस बजट में उसी की झलक देखने को मिली है। कोविड महामारी के समय मोदी को एहसास हुआ था कि कितनी सारी चीजों के लिए हमारी निर्भरता दुनिया के बड़े मुल्कों पर है, PPE किट से लेकर वैक्सीन तक। हम अमेरिका की तरफ देख रहे थे।
मोदी ने इस सोच को बदला। अभी कुछ महीनों पहले ट्रंप के टैरिफ ने, चीन के व्यापार ने और ऑपरेशन सिंदूर ने, फिर से इस सोच को और पक्का कर दिया कि भारत को आत्मनिर्भर बनने की बहुत जरूरत है। भारत में कब तक कंटेनर्स चीन से आते रहेंगे? रेयर अर्थ मेटल्स अगर चीन की ताकत बन सकता है, तो हमारी क्यों नहीं? कब तक हम अपने समुद्री खाद्य, कपड़े, दवा और कारों के निर्यात के लिए अमेरिका के सामने हाथ फैलाते रहेंगे? कब तक हम AI और सेमिकंडक्टर के लिए दूसरों पर निर्भर रहेंगे?
ऑपरेशन सिंदूर से जो सीखा, उससे रक्षा की नीति बदली। अब भारत ड्रोन्स में आत्मनिर्भर होगा, वायु सेना को और मजबूत किया जाएगा। कुल मिलाकर भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का रास्ता यहीं से निकलेगा। (रजत शर्मा)
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