उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बैरिया थाना क्षेत्र के नौरंगा गांव में रहने वाले लोगों ने एक ऐसा कदम उठाया है जिससे जिला प्रशासन और बाढ़ सुरक्षा तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नौरंगा गांव में गंगा की कटान से परेशान ग्रामीण अब अपने गांव को बचाने के लिए खुद ही मैदान में उतर आए हैं। इसके लिए उन्होंने गंगा की धारा को गांव की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बांस-बल्ली और रेत से भरी बोरियों के सहारे अस्थाई बांध तैयार करने की जिम्मेदारी को संभाला है।
चंदा इकट्ठा कर ग्रामीण लोग बना रहे हैं बांध
अपने गांव को गंगा की कटान से बचाने के लिए बुजुर्ग, युवा और बच्चे एकजुट होकर कटान रोकने की जद्दोजहद में जुटे हैं। गांव के लोग चंदा इकट्ठा कर बांस-बल्ली और रेत से भरी बोरियों के सहारे अस्थाई बांध तैयार कर रहे हैं जिसमें कोई सिर पर बालू भरी बोरियां ढो रहा है, तो कोई उन्हें गंगा किनारे व्यवस्थित ढंग से रखकर अस्थाई तटबंध तैयार कर रहा है। ग्रामीणों ने इस कार्य को शुरू करने से पहले विधि-विधान से मां गंगा की पूजा-अर्चना की और गांव की रक्षा की प्रार्थना की। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष गंगा की कटान ने नौरंगा गांव में भारी तबाही मचाई थी, जिसकी याद आज भी लोगों को भयभीत कर देती है।
कोई नेता-जनप्रतिनिधि और कोई अधिकारी हमारी सुध लेने नहीं आया
नौरंगा गांव राम अवतार ठाकुर ने अस्थाई बांध बनाने को लेकर कहा कि विभाग द्वारा जो निर्माण कराया जा रहा है, उस पर हमें भरोसा नहीं है। काम सही तरीके से नहीं हो रहा है। हमने गांव में बैठक कर चंदा इकट्ठा किया और खुद ही गांव बचाने का काम शुरू किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वे लंबे समय से शासन-प्रशासन से गांव को कटान से बचाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ना कोई नेता, ना जनप्रतिनिधि और ना ही कोई अधिकारी हमारी सुध लेने आया है। जब इस मामले में बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है।
(रिपोर्टर - अमित कुमार)
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