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यूपी: मलिहाबाद के कसमंडी में नहीं होगी बकरीद की नमाज, विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन और मुस्लिम समाज ने लिया फैसला

 Reported By: Vishal Singh Edited By: Amar Deep
 Published : May 26, 2026 02:24 pm IST,  Updated : May 26, 2026 02:27 pm IST

मलिहाबाद के कसमंडी इलाके में विवादित स्थल पर बकरीद की नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। प्रशासन और स्थानीय लोगों ने आपसी सहमति से यह फैसला लिया है।

कसमंडी में नहीं होगी बकरीद की नमाज।- India TV Hindi
कसमंडी में नहीं होगी बकरीद की नमाज। Image Source : PTI/REPRESENTATIVE IMAGE

लखनऊ: राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद इलाके में एक हुए विवाद को लेकर बड़ी खबर सामने आ रहा है। दरअसल, यहां कसमंडी इलाके में एक प्राचीन शिव मंदिर और मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। हालांकि विवाद के बीच मुस्लिम समाज ने बड़ा फैसला लिया है। विवाद को बढ़ता देख मुस्लिम समाज ने यह फैसला किया है कि कसमंडी में बकरीद की नमाज नहीं होगी। यह फैसला प्रशासन के साथ मिलकर लिया गया है। बता दें कि कुछ दिन पहले ही पासी समाज ने मंदिर और किले के संरक्षण को लेकर सीएम योगी को एक पत्र भी लिखा था। 

गजेटियर में क्या बताया गया?

दरअसल, गजेटियर में उल्लेख मिलता है कि 11वीं शताब्दी के अंतिम दौर में काकोरी और आसपास का क्षेत्र राजा कंस के प्रभाव में था। गजेटियर के अनुसार, जब सालार मसूद गाजी दिल्ली की ओर से अवध क्षेत्र में बढ़ा, तब राजा कंस ने उसका सामना किया। कांसमंडी और काकोरी क्षेत्र को सालार मसूद और स्थानीय राजाओं के संघर्ष का प्रमुख केंद्र माना गया है।

विदेशी आक्रमण का प्रतिरोध

अंग्रेजी गजेटियर में यह भी जानकारी दर्ज है कि कांसमंडी के आसपास सालार मसूद के दो सेनापति सैय्यद हातिम और खातिम को राजपासी राजा कंस ने मौत के घाट उतार दिया। स्थानीय परंपराओं और क्षेत्रीय इतिहास में राजा कंस को अवध की धरती पर विदेशी आक्रमण का प्रतिरोध करने वाले योद्धा के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

अवैध कब्जे का विरोध

फिलहाल यह इलाका लखनऊ में पड़ता है। इस समय में कांसमंडी के किले और उसके अंदर बने शिव मंदिर पर मुस्लिम समुदाय ने कब्जा कर लिया है। वहीं अब किले के अंदर नई कब्र बना दी गई हैं और बाहर उर्दू में शिलापट लगा दिया गया है। हर शुक्रवार के दिन मुस्लिम समाज के लोग यहां के किले में नमाज पढ़ने आते हैं। पासी समाज के लोग अवैध कब्जे का विरोध कर रहे हैं।

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