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फर्जी जनसेवा केंद्र का भंडाफोड़, लोगों की आईडी हासिल कर यूं क्रेडिट कार्ड से लेते थे लोन

 Reported By: Hima Agarwal Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Jun 14, 2026 06:46 pm IST,  Updated : Jun 14, 2026 06:48 pm IST

मेरठ में पुलिस ने ऐसे दो लोगों को पकड़ा था जो गरीब तबके के लोगों को टारगेट करते थे। उनका आईडी कार्ड हासिल कर फर्जी बैंक खाते खुलवाते थे और फिर उसका क्रेडिट कार्ड बनाकर पैसे निकाल लेते थे।

Meerut cyber fraud- India TV Hindi
मेरठ में फर्जी जनसेवा केंद्र का पर्दाफाश हुआ है। Image Source : REPORTERS INPUT

मेरठ: यूपी में मेरठ साइबर सेल और थाना लिसाड़ी गेट पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में फर्जी जनसेवा केंद्र का भंडाफोड़ किया है। लिसाड़ी गेट पुलिस की तरफ से पतारसी, सुरागरसी और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के आधार पर 2 आरोपी अरकम पुत्र निजामुद्दीन और निजामुद्दीन पुत्र यासीन को मेरठ की अंसार कॉलोनी, थाना कोतवाली को गिरफ्तार किया है।

गरीब तबके के लोगों को करते थे टारगेट

पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उनका सॉफ्ट टारगेट गरीब तबके के लोग हुआ करते थे। यह लोग उन्हें अपनी मीठी बातों में फंसाकर उनकी आईडी हासिल कर फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार करते थे। ये लोग फर्जी रबर स्टैम्प/शील मोहर का प्रयोग कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाकर उनके नाम पर डेबिट/क्रेडिट कार्ड भी बनवाते थे।

दूसरे के नाम से क्रेडिट कार्ड बनाकर निकालते थे पैसे

पुलिस की गिरफ्त में आए इन आरोपियों ने अपने मोबाइल फोनों से इन खातों में instantmudra.in, swifemoney.in वेबसाइट व अन्य ऑनलाइन पेमेंट ऐप्स के माध्यम से पैसों का अन्य खातों में लेन-देन कर अवैध रूप से लाभ हासिल किया। पुलिस ने अकरम और निजामुद्दीन के पास से मोबाइल फोन, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, बैंक पासबुक, चेक बुक, वोटर आईडी कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ब्लैंक हेल्थ कार्ड व रबर स्टैम्प/शील मोहर बरामद की है।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

गौरतलब है कि थाना लिसाड़ी गेट में BNS की धारा 319/318(4)/336(3)/338/340(2)/3(5), 66 डी आईटी एक्ट और 36/37 आधार कार्ड एक्ट दर्ज किया गया है। शुरुआती जांच में यह भी पता लगा कि आरोपी लंबे वक्त से इस फर्जीवाड़े के नेटवर्क को चला रहे थे। वह तमाम सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सेवाओं का फायदा दिलाने का झांसा देकर लोगों के दस्तावेज जमा कर लेते थे।

फर्जीवाड़े पर हुआ बड़ा खुलासा

पुलिस अब यह मालूम करने में जुटी है कि इस गैंग से और कितने लोग जुड़े हैं। इस वारदात में दूसरों के दस्तावेज लेकर उनसे कितने बैंक अकाउंट खोले गए। इसके अलावा, बरामद मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की फॉरेंसिक जांच कर फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन और संभावित पीड़ितों के बारे में पता लगाया जा रहा है। पुलिस ने कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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