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कानपुर में साइबर ठगों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, 13 गिरफ्तार, अश्लील वीडियो और फर्जी पुलिस बनकर करते थे ठगी

 Published : Jul 16, 2026 05:00 pm IST,  Updated : Jul 16, 2026 07:22 pm IST

साइबर ठग भय और दबाव का माहौल बनाकर आरोपी पीड़ितों से बैंक खातों और UPI के जरिए रकम वसूलते थे। जांच में अब तक करीब 2 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है।

13 साइबर ठग गिरफ्तार- India TV Hindi
13 साइबर ठग गिरफ्तार Image Source : REPORTER INPUT

कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। ये कार्रवाई कमिश्नर रघुबीर लाल के नेतृत्व में बनी टीम के सदस्य डीसीपी श्रवण कुमार, एडीसीपी अंजली विश्वकर्मा की देख रेख में हुई, जहां टीम ने आसमान से ड्रोन शॉट्स के मध्यम से पूरे इलाके को पहले तो घेर लिया फिर इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। यह गिरोह लोगों को अश्लील वीडियो मामले में फंसाने की धमकी देकर और खुद को पुलिस अधिकारी बताकर डराता था। भय और दबाव का माहौल बनाकर आरोपी पीड़ितों से बैंक खातों और UPI के जरिए बड़ी रकम वसूलते थे। पुलिस की शुरुआती जांच में अब तक करीब 2 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है।

29 मोबाइल फोन और 3 कारें बरामद

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 29 मोबाइल फोन, 3 कारें और कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। जांच के दौरान बरामद मोबाइलों से जुड़े 48 IMEI नंबर और 68 मोबाइल नंबर सक्रिय पाए गए, जिनके माध्यम से देशभर में साइबर अपराध को अंजाम दिया जा रहा था। पुलिस ने इन सभी डिजिटल साक्ष्यों को फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित कर लिया है।

पैसे ट्रांसफर कराने का बनाते थे दबाव

जांच में सामने आया कि गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। आरोपी पहले लोगों से संपर्क कर उन्हें अश्लील वीडियो या ऑनलाइन आपत्तिजनक गतिविधि में फंसाने की बात कहते थे। इसके बाद खुद को पुलिस, साइबर सेल या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर कार्रवाई की धमकी देते थे। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ितों से तुरंत पैसे ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया जाता था। अधिकांश रकम बैंक खातों और UPI प्लेटफॉर्म के माध्यम से वसूली जाती थी।

189 साइबर शिकायतें इस गिरोह से संबंधित

पुलिस की जांच में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 189 साइबर शिकायतों का इस गिरोह से संबंध सामने आया है। इनमें से 60 शिकायतकर्ताओं के मोबाइल नंबर सीधे आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे नंबरों से जुड़े मिले हैं। इससे स्पष्ट हुआ कि गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था।

कई राज्यों तक फैला था ये गिरोह

प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह का नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के लोग इस साइबर गिरोह का शिकार बने हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि ठगी की वास्तविक रकम और पीड़ितों की संख्या जांच आगे बढ़ने के साथ और बढ़ सकती है।

व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूत मिले

पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं। इनकी मदद से गिरोह के अन्य सदस्यों, बैंक खातों और संभावित सहयोगियों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है और जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

अनुराग श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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