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सहारनपुर से लखनऊ तक नकली दवा सप्लाई कारोबार पर शिकंजा, तहखाने से बरामद हुई पैकिंग मशीनरी

 Written By: India TV UP Bureau Desk
 Published : Sep 02, 2026 09:49 pm IST,  Updated : Sep 02, 2026 09:49 pm IST

लखनऊ में नकली दवाओं की सप्लाई की जांच के दौरान मिले सुराग के बाद एफएसडीए ने सहारनपुर में बड़ी छापेमारी की।

Saharanpur- India TV Hindi
नकली दवाओं को लेकर लखनऊ से मिले सुराग पर सहारनपुर में छापा Image Source : PEXELS (प्रतीकात्मक फोटो)

नकली दवाओं के खिलाफ उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन यानी एफएसडीए की कार्रवाई में सहारनपुर से लखनऊ तक फैले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। लखनऊ में पकड़े गए एक आरोपी से पूछताछ के बाद एफएसडीए की टीम ने सहारनपुर में छापा मारकर एक ऐसे ठिकाने का पता लगाया, जहां तहखाने में कथित तौर पर दवाओं की पैकिंग की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में दवा स्ट्रिप्स, प्रिंटेड कार्टन, एल्युमिनियम फॉयल और पैकिंग मशीनरी बरामद की गई है।

जांच की शुरुआत लखनऊ में नकली और सस्ती दवाओं की सप्लाई के मामले से हुई। इस मामले में सहारनपुर निवासी एजाज का नाम सामने आने के बाद पुलिस और एसओजी ने उसे गिरफ्तार किया था। पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर एफएसडीए ने सहारनपुर के नागल क्षेत्र में जांच का दायरा बढ़ाया।

ग्राम कोटा में एक मकान पर की गई कार्रवाई के दौरान टीम को दवाओं की पैकिंग से जुड़ा बड़ा सेटअप मिला। कमरे में विभिन्न कंपनियों के कॉरुगेटेड बॉक्स रखे थे, जबकि नीचे बने तहखाने से स्ट्रिपिंग मशीन, बैच स्टीरियो, डाई-पंच और प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल बरामद हुई। पूछताछ में सामने आया कि इस स्थान का इस्तेमाल कथित तौर पर दवाओं की पैकिंग के लिए किया जा रहा था।

32 किलो दवा बरामद

एफएसडीए के अनुसार, मौके से करीब 32.555 किलो दवा स्ट्रिप्स, 973 प्रिंटेड कार्टन और रोसुवास एफ-10 के 472 प्रिंटेड कार्टन मिले। इसके अलावा पीली और सफेद रंग की बड़ी मात्रा में गोलियां, प्रिंटेड और सादा एल्युमिनियम फॉयल भी बरामद की गई। मशीनरी और अन्य सामग्री को सील कर दिया गया है, जबकि चार दवाओं के नमूने जांच और विश्लेषण के लिए भेजे गए हैं।

मामले में दर्ज एफआईआर में कई लोगों के नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह काम संगठित तरीके से चलाया जा रहा था, जिसमें दवाओं, फॉयल, कार्टन और अन्य पैकिंग सामग्री की सप्लाई अलग-अलग स्थानों से की जाती थी। रुड़की और हरिद्वार क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों और फर्मों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।

दोनों मामलों में FIR दर्ज 

उधर, लखनऊ के अमीनाबाद इलाके में दवाओं की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों, इनवॉइस और स्टॉक रिकॉर्ड की भी जांच की गई। लेवेरा-500 के दो बैचों के नमूनों को राजकीय प्रयोगशाला ने जांच में असली नहीं बताया। रिकॉर्ड के मिलान में खरीद और बिक्री-स्टॉक के आंकड़ों में भी अंतर मिला है। एफएसडीए ने लखनऊ और सहारनपुर, दोनों मामलों में FIR दर्ज कर जांच तेज कर दी है। अब एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कथित नेटवर्क से नकली दवाएं किन-किन जिलों तक पहुंचाई गईं और इसमें कितने लोग शामिल हैं।

(रिपोर्ट: विशाल सिंह)

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