मथुरा: होली का त्यौहार नजदीक है। ऐसे में अगर आप ब्रज की होली का लुफ्त उठाना चाहते हैं तो यहां होने वाले कार्यक्रमों की तारीख जरूर जान लें। इससे आप ब्रज की हर होली का लुफ्त उठा सकेंगे। हम आपको पूरी होली का कैलेंडर बताएंगे, जिसमें लड्डू होली, लठमार होली, रंग होली समेत तमाम कार्यक्रमों की जानकारी रहेगी। गौरतलब है कि ब्रज में एक दिन होली नहीं खेली जाती बल्कि कई दिनों तक होली के कार्यक्रम चलते हैं।
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ये रहा ब्रज का होली कैलेंडर
- 24 फरवरी: लड्डू होली (बरसाना)
- 25 फरवरी: लठमार होली (बरसाना)
- 26 फरवरी: लठमार होली (नंदगांव)
- 27 फरवरी: श्री कृष्ण जन्मस्थान होली
- 27 फरवरी: रंग होली (वृंदावन)
- 1 मार्च: छड़ीमार होली (गोकुल)
- 2 मार्च: देवकीनंदन की प्रीकंजू मन्दिर में होली
- 3 मार्च: द्वारिकाधीश मंदिर होली
- 3 मार्च: चतुर्वेदी समाज का डोला शहर भ्रमण
- 4 मार्च: सुबह 4 बजे जलती होली से निकलेगा फालेन का पांडा
- 4 मार्च: धूलेंदी
- 5 मार्च: हुरंगा बलदेव
मथुरा-वृंदावन की होली क्यों होती है खास?
मथुरा-वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की नगरी है। यहां प्रेम भक्ति सर्वोपरि है और हर कोई कान्हा के प्रेम में दीवाना रहता है। यही वजह है कि जब यहां होली खेली जाती है तो उसमें भी प्रेम भक्ति दिखाई पड़ती है। कान्हा की नगरी होने की वजह से भक्तों का उत्साह भी सातवें आसमान में होता है।
सबसे खास बात ये है कि यहां होली एक दिन की नहीं होती बल्कि कई दिनों तक चलती है। यहां मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने सबसे पहले राधा और गोपियों पर रंग डालकर होली खेली थी। यहां होली केवल रंगों का त्यौहार नहीं है बल्कि कृष्ण की बाल-लीलाओं को दोहराने का माध्यम है। यहां होली पर प्रेम, मस्ती और भक्ति सभी के नजारे एक साथ दिखाई देते हैं।
यहां होली के मौके पर हर दिन अलग-अलग जगह पर अलग-अलग अंदाज में होली खेली जाती है, जिसमें लठमार होली, फूलों वाली होली और लड्डू वाली होली शामिल है।
लठमार होली का यहां खूब आकर्षण है। इस दिन महिलाएं गोपियों की तरह पुरुषों को मजाकिया अंदाज में लाठियों से मारती हैं। इसे देखने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं। यहां की फूल होली भी काफी लोकप्रिय है। इस दिन रंग की जगह फूलों से होली खेली जाती है। कुल मिलाकर होली का असली आनंद ब्रज की होली खेलने में आता है। (इनपुट: मोहन श्याम शर्मा)