मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में गुरुवार को हंगामा हो गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी और मंदिर के सेवायतों के बीच मंदिर में विवाद खड़ा हो गया। कमेटी ने ठाकुर जी को गर्भगृह से निकालकर मंदिर के चबूतरे पर विराजमान करने का फैसला किया था, ताकि श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन आसानी से हो सकें। लेकिन परंपरा के अनुसार, ठाकुर जी सिर्फ तीज और त्योहारों पर ही गर्भगृह से बाहर दर्शन देते हैं, ऐसे में इस फैसले का सेवायतों ने जोरदार विरोध किया।
बुधवार को राजभोग सेवा के बाद ठाकुर जी को जगमोहन में विराजमान किया गया था। दोपहर को दर्शन के बाद जब सेवायत शयनभोग के लिए गर्भगृह पहुंचे, तो वहां ताला लगा हुआ मिला। इससे सेवायत नाराज हो गए और उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने प्रशासन पर मंदिर की परंपराओं को तोड़ने का आरोप लगाया। हिमांशु गोस्वामी ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'व्यवधान खड़ा हो गया है मेरे आगे, ये सब बांध दिया गया है। ये सब क्या है? ठाकुर जी अंदर विराजमान होते हैं, सिर्फ तीज-त्योहार पर ही बाहर निकलते हैं? ये परंपराओं को क्यों बिगाड़ा जा रहा है? मैं इसके समर्थन में नहीं हूं।'
गर्भगृह में ताला लगे होने की वजह से सुबह-सुबह मंदिर में भक्तों की भीड़ लग गई। लोगों को ठाकुर जी के दर्शन नहीं हुए, तो श्रद्धालु भड़क गए। मंदिर परिसर में ही जमकर नारेबाजी होने लगी। भक्तों के गुस्से और गोस्वामी समाज के विरोध के बाद हाई पावर कमेटी को अपना फैसला बदलना पड़ा। गर्भगृह का ताला खुलवाया गया। कमेटी की तरफ से कहा गया है कि दोपहर को राजभोग सेवा के बाद बांके बिहारी जी के दर्शन गर्भगृह के बाहर ही कराए गए, लेकिन शाम को शयन भोग के बाद सेवायतों ने गर्भगृह से ही दर्शन कराए, जो आदेश के खिलाफ था।
हंगामे के बाद हाई पावर कमेटी की गुरुवार को इमरजेंसी मीटिंग हुई। इस मीटिंग के बाद गोस्वामी सेवायतों से अपील की गई कि वे जगमोहन से ही भगवान के दर्शन कराएं। कमेटी की तरफ से कहा गया कि जो परंपरा है, वो दशकों पुरानी है, तब भक्तों की संख्या इतनी ज्यादा नहीं थी। लेकिन अब भक्तों को सही तरीके से दर्शन हो पाएं, इसलिए इस परंपरा को बदलना होगा। कमेटी ने मंदिर में हंगामे और नारेबाजी पर गोस्वामी समाज को चेतावनी भी जारी की है।
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