Tuesday, February 03, 2026
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मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में सलीम अहमद को मिला ठेका, संतों के विरोध के बाद डीएम ने दी सफाई

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में स्टील रेलिंग लगाने के ठेके को लेकर विवाद हुआ। संतों ने सलीम अहमद को ठेका दिए जाने का विरोध किया। मथुरा डीएम ने स्पष्ट किया कि ठेका कनिका कंस्ट्रक्शन को मिला है और कार्य CSR फंड से हो रहा है।

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
Published : Feb 03, 2026 07:29 pm IST, Updated : Feb 03, 2026 07:29 pm IST
संतों के विरोध के बाद...- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT संतों के विरोध के बाद मथुरा के डीएम ने सफाई दी है। Banke Bihari Temple controversy, Salim Ahmed contract, Mathura DM clarification

वृंदावन: उत्तर प्रदेश में मथुरा जिले के वृंदावन में स्थित विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में स्टील रेलिंग लगाने के ठेके को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। संतों ने इस ठेके को सलीम अहमद नाम के शख्स को दिए जाने का कड़ा विरोध किया है। संतों के विरोध के बाद जिलाधिकारी सीपी सिंह का बयान आया है, जिसमें उन्होंने सफाई दी है। संतों का कहना है कि मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर ऐसे व्यक्ति को काम नहीं दिया जाना चाहिए जिसकी सनातन में आस्था न हो, जबकि डीएम ने कहा है कि ठेका मेरठ की कनिका कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया है और काम मंदिर के फंड से नहीं, बल्कि CSR फंड से हो रहा है।

दिनेश फलाहारी महाराज ने मुख्यमंत्री योगी को लिखा पत्र

विवाद की शुरुआत तब हुई जब बांके बिहारी मंदिर में रेलिंग लगाने का ठेका सलीम अहमद नाम के शख्स कोCS दिए जाने की खबर फैली। इस बारे में सूचना मिलते ही संतों ने इसका पुरजोर विरोध शुरू कर दिया। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जताई। पत्र में उन्होंने लिखा है कि जहां भगवान राधा-कृष्ण ने महारास और माखन चोरी की लीला की हो, जहां बांके बिहारी जी विराजमान हैं, उस स्थान पर गौ मांस खाने वाले और सनातन धर्म के विरोधी लोग आएंगे तो ब्रज वासियों को यह सहन नहीं होगा, और इससे हमारे कृष्ण कन्हैया भी नाराज हो जाएंगे।'

'सनातनी समाज में स्टील रेलिंग लगाने के लिए हजारों ठेकेदार'

अपने पत्र में फलाहारी महाराज ने आगे लिखा, 'ये लोग सनातन धर्म के विरोधी हैं और हिंदुओं को काफिर कहते हैं। ऐसे लोगों को मंदिर के प्रांगण से एक किलोमीटर तक भी घुसने नहीं दिया जाएगा। हमारे सनातनी समाज में स्टील रेलिंग लगाने के लिए हजारों ठेकेदार हैं, तो फिर हिंदुओं पर अत्याचार करने वाले और मथुरा, काशी, अयोध्या को तोड़कर वहां नमाज अदा करने वाले मुगलों के वंशजों को यह ठेका क्यों दिया गया?' फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में मांग की कि पूरे मामले की जांच कराई जाए और पहचान छिपाकर कनिका कंस्ट्रक्शन के मालिक सलीम अहमद का ठेका निरस्त किया जाए और यह ठेका किसी सनातनी भाई को दिया जाना चाहिए।

'कंपनी किसके द्वारा काम करा रही है, यह हमारा विषय नहीं'

ब्रजभूमि के साधु-संतों और ब्रजवासियों के विरोध को देखते हुए जिलाधिकारी और बांके बिहारी मंदिर न्यास के पदेन सचिव सीपी सिंह ने पूरे मामले पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में स्टील रेलिंग लगाने का ठेका मेरठ की कनिका कंस्ट्रक्शन को दिया गया है, और कंपनी किसके द्वारा काम करा रही है, यह हमारा विषय नहीं है। उन्होंने कहा, 'वैसे भी मंदिर फंड से रेलिंग लगाने का काम नहीं किया जा रहा है, बल्कि CSR फंड से काम किया जा रहा है।' डीएम ने अपील की है कि इस बारे में किसी भी तरह की अफवाह न फैलाई जाए और प्रशासन का सहयोग किया जाए। (रिपोर्ट: मोहन श्याम शर्मा)

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