अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत की जिसके बाद ऐलान हुआ कि भारत पर लगने वाला 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा। अमेरिका से भारत आयातित होने वाली वस्तुओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा।
सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं ने इस डील के बारे में ऐलान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर लिखा : "मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि मेड इन इंडिया वस्तुओं पर टैरिफ घटा कर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इस चमत्कारिक ऐलान के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को भारत की 140 करोड़ जनता की तरफ से धन्यवाद। जब विश्व की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दो सबसे बड़े लोकतंत्र मिल कर काम करते हैं, तो इससे दोनों देशों की जनता को लाभ पहुंचता है और इससे आपसी फायदे वाले सहयोग के लिए व्यापक संभावनाओं के द्वार खुलते हैं।"
मोदी ने लिखा : "राष्ट्रपति ट्रंप का नेतृत्व वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए ज़रूरी है। भारत शांति के लिए उनके द्वारा किये जा रहे प्रयासों का पूरा समर्थन करता है। मैं उनके साथ मिल कर हमारी साझेदारी को अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक ले जाना चाहता हूं। "
मंगलवार को एनडीए सांसदों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मालाएं पहना कर उनका स्वागत किया गया। एनडीए संसदीय दल की बैठक में मोदी ने कहा, " विश्व पटल के केंद्र में भारत का आना इस सदी की सबसे बड़ी घटना है...। जब भारत पर अमेरिका की तरफ से टैरिफ लगा तो विपक्षी दल हमें कटघरे में खड़ा करने लग गए, अलग-अलग सवाल पूछने लगे... कुछ लोग राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ के फैसले से टूट पड़े थे... भारत की अब दुनिया भर में पूछ हो रही है, विश्व शक्ति संतुलन में भारत की भूमिका अहम हो गई है।" मोदी ने एनडीए सांसदों से कहा कि वे अपने अपने इलाकों में जाएं, मैन्यूफैक्चरर्स और निर्यातकों से मिलें, निर्यात बढाने के लिए माहौल बनाएं और मेड इन इंडिया वस्तुओं की गुणवत्ता पर फोकस करें... पत्थर पर लकीर खींचने की आदत हम छोड़ें।"
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से इंडोनेशिया औैर पाकिस्तान (19 प्रतिशत टैरिफ), बंगलादेश और वियतनाम (20 प्रतिशत) और चीन (34 प्रतिशत) की तुलना में भारतीय निर्यतकों को प्रतिस्पर्धा में बढ़त ज़रूर मिलेगी। एक नज़र डालते हैं, अमेरिका को होने वाले भारतीय वस्तुओं के निर्यात पर।
भारत अमेरिका को 8.8 अरब डॉलर की दवा सामग्री, 7.4 अरब डॉलर के टेलीकॉम के सामान, 5.7 अरब डॉलर के कीमती पत्थर, 4.4 अरब डॉलर की पेट्रोलियम वस्तुएं, 3.5 अरब डॉलर के सोने और जवाहरात, 3.1 अरब डॉलर के RMCG cotton, 2.9 अरब डॉलर के लोहा और इस्पात, 2.7 अरब डॉलर के cotton fabrics, 2.7 अरब डॉलर के बिजली के सामान और 2.6 अरब डॉलर के marine products का निर्यात करता है। जो निर्यातक पिछले तीन महीने से 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण परेशान थे, उन्हें न सिर्फ राहत मिलेगी बल्कि उनके कारोबार में उछाल आएगा।
कुल मिलाकर भारत अमेरिका को 80.8 अरब डॉलर वस्तुओं का निर्यात करता है और बदले में अमेरिका से 44.4 अरब डॉलर का आयात करता है। इस समय अमेरिका की तुलना में भारत का ट्रेड सरप्लस 36.4 अरब डॉलर है। दोनों देशों के व्यापार और उद्योग संगठनों ने इस नये डील का स्वागत किया है। भारत अमेरिका से रक्ष हथियार, कृषि वस्तुएं और पेट्रोलियम खरीदेगा, लेकिन इसका पूरा ब्यौरा समझौते पर दस्तखत होने के बाद ही पता चलेगा।
इस ऐतिहासिक डील का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है। तमाम कठिनाइयों और चुनौतियों के बीच मोदी ने अपना धैर्य नहीं खोया और अंतिम क्षण तक अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखा। 27 जनवरी को यूरोपियन यूनियन के साथ मोदी ने मुक्त व्यापार समझौता किया था। मोदी ने सूझबूझ के साथ अपनी गोटियां बैठाई और अन्ततोगत्वा राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ घटाने के लिए प्रेरित किया। ट्रंप ने ही सोमवार रात मोदी को फोन किया, बातें हुई और भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 18 प्रतिशत तक घटाने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही पिछले तीन महीने से चल रहा सस्पेंस खत्म हुआ, भारतीय निर्यातकों के मन में अनिश्चितताएं खत्म हुई।
कुल मिला कर भारत-ईयू मुक्त व्यापार डील, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और केंद्रीय बजट में मैन्यूफैक्चरिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भारी पूंजीनिवेश के ऐलान से अब वह मार्ग प्रशस्त हो गया है, जहां से होकर भारत बहुत जल्द विश्व की तीसरे सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। (रजत शर्मा)
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