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'ओवैसी यूपी का मिजाज नहीं समझ पाए', सपा MLA का करारा पलटवार, पूछा- बेगुनाह मुसलमान का केस कभी लड़ा?

 Written By: Khushbu Rawal
 Published : Sep 21, 2026 09:23 pm IST,  Updated : Sep 21, 2026 09:28 pm IST

कानपुर में असदुद्दीन ओवैसी की जनसभा के बाद सपा नेताओं ने उनके बयानों पर पलटवार किया है। सपा विधायक मोहम्मद हसन रूमी ने तीखा जवाब दिया और AIMIM की राजनीति पर सवाल उठाए। रूमी ने ओवैसी से पूछा कि क्या उन्होंने कभी किसी बेगुनाह मुसलमान का मुकदमा लड़कर उसे बरी कराया।

ओवैसी के हमले पर सपा...- India TV Hindi
ओवैसी के हमले पर सपा विधायक ने किया पलटवार। Image Source : REPORTER INPUT

कानपुर: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की कानपुर जनसभा के बाद अब उनके बयानों को लेकर सियासी पलटवार शुरू हो गया है। कानपुर कैंट से सपा विधायक मोहम्मद हसन रूमी ने ओवैसी के क्षेत्रीय विकास और मुस्लिम मुद्दों को लेकर किए गए सवालों पर जवाब दिया है। रूमी ने AIMIM पर भाजपा के लिए काम करने और मुस्लिम नेतृत्व को कमजोर करने का आरोप लगाया। वहीं, सपा के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी ने कहा कि ओवैसी काबिल और पढ़े-लिखे नेता हैं, लेकिन उन्हें अभी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक मिजाज को पूरी तरह समझना बाकी है। ओवैसी ने रविवार को कानपुर में करीब 55 मिनट की जनसभा को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने भाजपा, सपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव में कानपुर की सभी 10 सीटों पर AIMIM के प्रत्याशी उतारने की बात कही। उन्होंने भाजपा को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए विपक्षी दलों को AIMIM के साथ गठबंधन का खुला प्रस्ताव भी दिया और कहा कि गठबंधन को लेकर 2 अक्टूबर तक इंतजार किया जाएगा।

सपा विधायक हसन रूमी बोले- अस्पताल और स्कूल बनाना सरकार की जिम्मेदारी

ओवैसी ने अपने भाषण में कैंट विधायक मोहम्मद हसन रूमी पर क्षेत्र के विकास को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि रूमी ने 100 बेड के अस्पताल का वादा किया था, लेकिन अस्पताल नहीं बन पाया। इसके जवाब में रूमी ने कहा कि अस्पताल और स्कूल बनाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी विधायक रहते हुए वह लगातार विधानसभा में क्षेत्र की समस्याएं उठाते रहे और उनके दबाव के बाद दक्षिण क्षेत्र में 100 बेड का अस्पताल बना, हालांकि भवन तैयार होने के बावजूद अस्पताल अभी शुरू नहीं हुआ है। रूमी ने कहा कि ओवैसी को कानपुर की स्थानीय जमीनी हकीकत को समझने की जरूरत है। उनके मुताबिक केवल मुस्लिम भावनाओं से जुड़े मुद्दे उठाने से स्थानीय समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।

AIMIM को भाजपा का पैकेज दिया जाता है

रूमी ने AIMIM की राजनीति पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जहां भी मुस्लिम नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश होती है, वहां AIMIM को भाजपा का ‘पैकेज’ दिया जाता है। रूमी ने यह भी आरोप लगाया कि AIMIM चुनाव के दौरान वोट काटने की राजनीति करती है, ओवैसी के गठबंधन के प्रस्ताव पर रूमी ने बिहार और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए उनकी राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि AIMIM की राजनीति को केवल भाषणों और मुस्लिम भावनाओं के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि जमीन पर लोगों के लिए पार्टी ने क्या काम किया है।

रूमी का सवाल- क्या कभी बेगुनाह मुस्लिम का मुकदमा लड़कर बरी कराया?

रूमी ने ओवैसी से उनके कानूनी और सामाजिक हस्तक्षेप को लेकर भी सवाल किए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के घरों पर बुलडोजर की कार्रवाई हुई, क्या ओवैसी ने उनके मामलों में कानूनी मदद की? देशभर में ऐसे मामलों में उन्होंने कितने लोगों के मुकदमों की जानकारी ली और कितने मामलों में कानूनी लड़ाई लड़ी? रूमी ने सवाल किया कि क्या ओवैसी ने कभी किसी ऐसे मुस्लिम व्यक्ति का मुकदमा लड़कर उसे बरी कराया, जिसे वह निर्दोष मानते हों। उन्होंने दिल्ली में AIMIM से चुनाव लड़ चुके एक व्यक्ति को सजा मिलने का भी संदर्भ देते हुए ओवैसी की भूमिका पर सवाल उठाए।

2017 में भी भीड़ जुटी थी, वोट में नहीं बदली

ओवैसी की जनसभाओं में जुटने वाली भीड़ को लेकर भी रूमी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 2017 में कानपुर के जीआईसी मैदान में ओवैसी की सभा में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे, लेकिन इसका चुनावी वोट में कोई स्पष्ट असर नहीं दिखाई दिया। रूमी के मुताबिक सभा में लोग भाषण सुनने के लिए पहुंच सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति चुनाव में उसी पार्टी को वोट देगा। उन्होंने कहा कि कैंट के लोगों ने उन्हें चुनाव में समर्थन दिया है और आने वाले चुनाव में भी उन्हें जनता के साथ होने की उम्मीद है।

इरफान सोलंकी बोले- ओवैसी काबिल हैं, लेकिन यूपी को अभी नहीं समझ पाए

सपा के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी ने ओवैसी के राजनीतिक प्रभाव और यूपी की राजनीति को लेकर अलग प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ओवैसी काबिल और पढ़े-लिखे व्यक्ति हैं। उनमें राजनीतिक समझ और समझदारी है, लेकिन उत्तर प्रदेश के राजनीतिक मिजाज को वह अभी पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं। इरफान ने कहा कि जब ओवैसी पहली बार कानपुर के जीआईसी मैदान में जनसभा करने आए थे, तब वह खुद विधायक थे। अब ओवैसी बाबूपुरवा आए हैं तो कैंट से मोहम्मद हसन रूमी विधायक हैं। उन्होंने कहा कि ओवैसी अगर उनका नाम लेते हैं तो इसमें उनके लिए कोई बुरी बात नहीं है।

इमरान मसूद बोले- यूपी और हैदराबाद का राजनीतिक माहौल अलग

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी ओवैसी के गठबंधन प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा को हराना प्राथमिक लक्ष्य है और केवल मुस्लिम वोटों के जरिए भाजपा को हराना संभव नहीं है। मसूद ने कहा कि उत्तर प्रदेश और हैदराबाद का राजनीतिक माहौल अलग है। मसूद के मुताबिक अगर AIMIM कुछ सीटें जीतती है तो इससे विपक्षी वोटों के बंटवारे का असर पड़ सकता है और भाजपा को लाभ मिलने की स्थिति बन सकती है। उन्होंने मतदाताओं से चुनाव में सोच-समझकर फैसला लेने की अपील की। इसी तरह की प्रतिक्रिया पर हालिया रिपोर्टों में भी मसूद ने कहा है कि केवल मुस्लिम वोटों के दम पर भाजपा को हराना संभव नहीं है।

ओवैसी ने 2 अक्टूबर तक गठबंधन का दिया समय

कानपुर की जनसभा में ओवैसी ने कहा था कि AIMIM उन राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन के लिए तैयार है जो उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार को लगातार तीसरी बार बनने से रोकना चाहते हैं। ओवैसी ने कहा कि पार्टी 2 अक्टूबर तक इंतजार करेगी और उसके बाद गठबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट करेगी। ओवैसी ने अपने भाषण में सपा सरकार के दौरान मुजफ्फरनगर दंगों, मुस्लिम प्रतिनिधित्व, शिक्षा और राजनीतिक हिस्सेदारी जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने भाजपा के साथ-साथ सपा और कांग्रेस को भी निशाने पर लिया और कहा कि मुस्लिम समाज को केवल चुनावी समय में वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने के बजाय राजनीतिक हिस्सेदारी और बुनियादी मुद्दों पर जवाब मांगा जाना चाहिए।

कानपुर में ओवैसी की यह तीसरी बड़ी जनसभा बताई गई। इससे पहले वह 2021 में जाजमऊ और जीआईसी मैदान में कार्यक्रम कर चुके हैं। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनकी सक्रियता और सभी 10 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की घोषणा के बाद कानपुर की सियासत में AIMIM को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।

(रिपोर्ट- अनुराग श्रीवास्तव)

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