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मथुरा: सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन में किया बड़ा बदलाव, हाई पावर कमेटी में नहीं चलेगी अधिकारियों की मनमानी

 Edited By: Mangal Yadav
 Published : May 26, 2026 09:42 pm IST,  Updated : May 26, 2026 09:55 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने वृंदावन, मथुरा में स्थित बांके बिहारी जी महाराज मंदिर का प्रबंधन करने वाली समिति को निर्देश दिया कि वह भीड़ प्रबंधन और दैनिक कार्यों में सुधार करते हुए, जहां तक संभव हो पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं को बहाल करे।

बांके बिहारी मंदिर- India TV Hindi
बांके बिहारी मंदिर Image Source : REPORTER

मथुरा: वृंदावन के प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। कोर्ट ने साफ किया है कि मंदिर की हाई पावर कमेटी में गोस्वामी समाज के प्रतिनिधियों के चयन में अब प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी नहीं चलेगी। अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने हुए प्रतिनिधि ही इस समिति में समाज की आवाज बनेंगे।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने जारी किया ये आदेश

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने आदेश जारी करते हुए राजभोग और शयन भोग सेवाधिकारियों में से दो-दो चुने हुए प्रतिनिधियों को शामिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने शयन भोग सेवायत परंपरा से गोपेश गोस्वामी व हिमांशु गोस्वामी और राजभोग सेवायत परंपरा से रजत गोस्वामी व शैलेंद्र गोस्वामी को समिति का सदस्य नियुक्त किया है। ये प्रतिनिधि मंदिर की सेवा परंपरा और प्रबंधन से जुड़े मामलों में कमेटी को अपने सुझाव देंगे, जिन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया ये आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को बांके बिहारी मंदिर के अंदर और आसपास श्रद्धालुओं की सहूलियत व सुरक्षा के लिए शीघ्र कदम उठाने का आग्रह किया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सड़कों के चौड़ीकरण, व्यावसायिक गतिविधियों के नियमन, पेयजल, रेस्ट रूम, वेटिंग एरिया, अस्पताल, आपातकालीन निकास और बुजुर्गों के लिए बैटरी चालित वाहनों जैसी व्यवस्थाओं पर त्वरित अमल किया जाए। कोर्ट ने कमेटी को निर्देश दिया है कि वे गोस्वामी समाज और स्थानीय निवासियों के सुझाव सुनकर एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें और उसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें।

गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस अशोक कुमार की अगुवाई में एक कमेटी गठित की गई थी। इसमें मथुरा के डीएम सहित अन्य अधिकारियों के साथ गोस्वामी समाज के चार लोगों को रखा गया था। उस समय अधिकारियों द्वारा अपनी पसंद से प्रतिनिधि चुने जाने पर भारी विरोध हुआ था, जिसके बाद यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत पहुंचा था।

रिपोर्ट- विपिन सारस्वत

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