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यूपी के कई शहरों को दहलाने की थी साजिश, अलकायदा की प्लानिंग में शामिल तीन को NIA कोर्ट ने सुनाई सजा

 Edited By: Amar Deep @amardeepmau
 Published : Apr 14, 2026 04:53 pm IST,  Updated : Apr 14, 2026 04:53 pm IST

एनआईए की कोर्ट ने तीन आरोपियों को यूपी में धमाके के लिए साजिश करने के मामले में सजा सुनाई है। ये तीनों अलकायदा के साथ जुड़े हुए थे और यूपी के कई शहरों में धमाके की प्लानिंग पर काम कर रहे थे।

धमाके की प्लानिंग कर रहे तीन को कोर्ट ने सुनाई सजा। - India TV Hindi
धमाके की प्लानिंग कर रहे तीन को कोर्ट ने सुनाई सजा। Image Source : PEXELS/REPRESENTATIVE IMAGE

एनआईए की कोर्ट ने यूपी में हमले करने की अल-कायदा की आतंकी साजिश में शामिल होने के जुर्म में तीन लोगों को सजा सुनाई है। अधिकारियों ने बताया कि तीनों की पहचान लखनऊ के मुसीरुद्दीन उर्फ ​​राजू और मिन्हाज अहमद उर्फ ​​मिन्हाज तथा जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के तौहीद अहमद शाह उर्फ ​​सोबू शाह के रूप में हुई है। अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ की एनआईए कोर्ट ने सोमवार को तीनों को पांच साल के कठोर कारावास से लेकर उम्रकैद तक की अलग-अलग सजाएं सुनाईं। उन्होंने बताया कि इन अपराधियों पर 20,000 रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले में तीन अन्य आरोपियों-- शकील, मोहम्मद मुस्तकीम और मोहम्मद मोईद (सभी लखनऊ निवासी) को पहले ही शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराया जा चुका है, क्योंकि उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था।

6 के खिलाफ दाखिल किया था आरोपपत्र

दरअसल, एनआईए ने 2022 में इस मामले में इन सभी छह लोगों के खिलाफ दो आरोपपत्र दाखिल किये थे। जुलाई 2021 में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन अल-कायदा के सदस्यों- मुशीरुद्दीन और मिन्हाज की गिरफ्तारी के बाद यूपी पुलिस ने यह मामला दर्ज किया था। यूपी पुलिस की एटीएस टीम ने दोनों को गिरफ्तार किया था। एनआईए के एक बयान में कहा गया है कि दोनों आरोपी लखनऊ में 'अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट '(AQIS) के एक मॉड्यूल के रूप में अंसार गजवातुल हिंद (एजीएच) को खड़ा करने के लिए युवाओं को कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाने तथा उनकी भर्ती करने में शामिल पाए गए थे। बयान में कहा गया है कि इस साजिश का मकसद 2021 में स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले लखनऊ समेत राज्य के विभिन्न शहरों में आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देना था। 

आंतकी कृत्यों को अंजाम देने के लिए कर रहे थे भर्ती

एनआईए ने मामले को अपने हाथ में लेने के बाद पाया कि मिन्हाज को तौहीद और एक अन्य आरोपी आदिल नबी तेली उर्फ ​​मूसा ने कट्टरपंथी बनाया था। बयान में कहा गया है कि इन तीनों व्यक्तियों ने मिलकर प्रतिबंधित एजीएच के लिए सदस्यों की भर्ती करने की साजिश रची थी, ताकि वे आतंकवादी कृत्यों को अंजाम दे सकें। जांच में यह भी पता चला कि मिन्हाज ने मुसीरुद्दीन को भी इस साजिश में शामिल किया था और यहां तक ​​कि उसने मिन्हाज के कहने पर बैयत (निष्ठा की शपथ) भी ली थी। एनआईए ने बताया कि इसके बाद, मुसीरुद्दीन और मिन्हाज ने शकील, मुस्तकीम और मोईद की मदद से भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की आतंकी साजिश के तहत हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री प्राप्त की थी। 

मुठभेड़ में मारा गया था मूसा

जांच के दौरान मूसा को प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के विस्तारित संगठन टीआरएफ से संबद्ध घोषित आतंकवादी पाया गया। जांच में पता चला कि मूसा को तौहीद के माध्यम से मिन्हाज से धनराशि प्राप्त हुई थी। बयान में कहा गया है कि मूसा मार्च 2022 में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। एनआईए ने अगस्त 2022 में उसके खिलाफ संशोधित आरोप पत्र दाखिल किया था। 

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