दिल्ली में हुए ‘फैट डॉग्स ऑफ दिल्ली’ प्रतियोगिता के वायरल होने के बाद अब बेंगलुरु ने भी अपनी खुद की ऐसी ही अनोखी प्रतियोगिता शुरू कर दी है। ‘फैट डॉग्स ऑफ बीएलआर’ (Fat Dogs of BLR) नाम की इस प्रतियोगिता में शहर के सबसे मोटे और प्यारे कुत्तों को ताज पहनाया जा रहा है। 1 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई इस प्रतियोगिता में शुरू में 64 कुत्तों ने हिस्सा लिया था। कई नॉकआउट राउंड और ऑनलाइन वोटिंग के बाद अब सिर्फ दो फाइनलिस्ट बचे हैं- गूफी और बाचोंकर मैकचोंकेथ (Bachonker McChonketh)।
इंस्टाग्राम पर वायरल हुई पोस्ट
इस पोस्ट को इंस्टाग्राम पर @fatdogsofblr और @fave.finds.blr नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसमें बताया गया कि, गूफी एक काला कुत्ता है, जिसे एचएसआर इलाके से नॉमिनेट किया गया था। इसकी खासियत है कि इसके दांत जबड़े के बाहर निकले हुए हैं। दूसरी तरफ बाचोंकर मैकचोंकेथ हल्के रंग का, फूला-फुला और बुल जैसा दिखने वाला कुत्ता है, जिसकी तस्वीरें इंदिरानगर के आसपास ली गई थीं। दोनों ही पड़ोस के सामुदायिक या स्ट्रीट डॉग हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों ने प्यार से पाला और नाम दिया है।
टूर्नामेंट में इस तरह वोटिंग
प्रतियोगिता नॉकआउट फॉर्मेट में चलाई जा रही है। समर्थक अपने पसंदीदा कुत्ते के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चला रहे हैं, पोस्टर बना रहे हैं और वोट मांग रहे हैं। यह माहौल लगभग चुनाव जैसा बन गया है, हालांकि उम्मीदवार खुद अपनी लोकप्रियता से अनजान हैं। फाइनल राउंड की वोटिंग 16 अक्टूबर 2026 को शाम 8 बजे IST से शुरू हुई। लोग इंस्टाग्राम पेज या आधिकारिक वेबसाइट के जरिए वोट डाल सकते हैं। यह प्रतियोगिता पूरी तरह सामुदायिक प्रयास है। इसमें चार्लीज एनिमल रेस्क्यू सेंटर (C.A.R.E.), जेन-जेड के लिए यूपीआई ऐप फावे (Fave) और एआई सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म इमर्जेंट (Emergent) का समर्थन मिला है। इमर्जेंट की मदद से प्रतियोगिता की वेबसाइट बनाई गई, जहां मैच-अप और प्रगति को ट्रैक किया जा सकता है। आयोजकों का कहना है कि इसका मकसद शहर के कुत्तों के प्रति लोगों के प्यार को एक मजेदार तरीके से जोड़ना है। हालांकि वे कुत्तों के स्वास्थ्य पर भी जोर देते हैं और मोटापे को सामान्य बनाने से बचने की सलाह देते हैं।
दिल्ली से शुरू हुई थी ट्रेंड की शुरुआत
इस ट्रेंड की शुरुआत दिल्ली से हुई थी। सितंबर 2026 में ‘फैट डॉग्स ऑफ दिल्ली’ इंस्टाग्राम पेज ने 64 कुत्तों के साथ नॉकआउट प्रतियोगिता शुरू की। इसमें कट्टा सिंह, महाकुट्टेश्वर, गोला (केबाब या राजपाल सिंह), गूगू जैसे नाम वायरल हुए। अंतिम राउंड में गोला (जो कि अब जीवित नहीं है) ने गूगू को करीब 39,904 वोटों से हराकर खिताब जीता। दिल्ली की इस प्रतियोगिता ने पड़ोस के स्ट्रीट डॉग्स को सोशल मीडिया सेलिब्रिटी बना दिया और मुंबई, चंडीगढ़ जैसे शहरों में भी इसी तरह की प्रतियोगिताएं शुरू हो गईं। यह आइडिया अलास्का के फैट बियर वीक से प्रेरित था, लेकिन भारत में इसे शहरी स्ट्रीट डॉग्स के साथ जोड़ दिया गया।
बेंगलरु के डॉग लवर्स में जबरदस्त उत्साह
बेंगलुरु में भी लोग अपने पसंदीदा कुत्तों के लिए जोर-शोर से समर्थन कर रहे हैं। कुछ यूजर्स गूफी के पक्ष में लिख रहे हैं—“Goofy all day” या “Goofyyy is gonna win”, तो कुछ बाचोंकर के लिए—“Lesssgooo Bachonker!” जो कुत्ते फाइनल तक नहीं पहुंच पाए, उनके लिए भी लोग प्यार जता रहे हैं और ट्रीट्स व बेली रब की कामना कर रहे हैं। यह प्रतियोगिता सिर्फ मनोरंजन नहीं है। यह शहर के स्ट्रीट डॉग्स के प्रति लोगों के लगाव को दिखाती है और समुदाय को एकजुट करती है। कई कुत्ते किसी एक मालिक के नहीं बल्कि पूरे इलाके के होते हैं, जिन्हें दुकानदार, निवासी और वॉलंटियर्स मिलकर देखभाल करते हैं। प्रतियोगिता के जरिए इन कुत्तों की देखभाल और स्वास्थ्य के मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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