एक फ्रांसीसी योग और फिटनेस प्रशिक्षक रोक्सेन ने भारत यात्रा से लौटने के बाद एक इंस्टाग्राम वीडियो में उन 11 चीजों की सूची साझा की है, जो उनके अनुसार यूरोपीय लोग भारत से सीख सकते हैं। योग के साथ-साथ प्राचीन भारतीय मार्शल आर्ट कलारीपायट्टू में विशेषज्ञता रखने वाली रोक्सेन ने फ्रांस और कनाडा में योग सिखाने के बाद भारत आकर प्रमाणपत्र हासिल किया। उन्होंने कहा कि भारत में योग का दृष्टिकोण पश्चिम से काफी अलग है। यूरोप लौटने पर उन्हें एहसास हुआ कि भारत की छोटी-छोटी आदतें उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन गई हैं।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @yog.rox नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में रोक्सेन ने साफ कहा, “मैं यह नहीं कह रही कि भारत परफेक्ट है या कोई संस्कृति बेहतर है। बस यूरोप लौटकर महसूस किया कि कितनी छोटी-छोटी चीजें मेरी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गईं।” उनका वीडियो ‘यूरोपीय लोगों को भारतीयों से सीखने योग्य चीजें’ शीर्षक से वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर सराहना मिल रही है।
समुदाय की भावना और एकजुटता
पहली बात उन्होंने भारत में सामुदायिक भावना की कही। यूरोप में लोग अति-स्वतंत्र होते हैं, जिससे कभी-कभी अलगाव महसूस होता है। भारत में परिवार, पड़ोसी, दोस्त और यहां तक कि अजनबी भी आसपास मौजूद रहते हैं। “यूरोप में हम सब कुछ खुद करने के आदी हैं। भारत में मुझे लगा कि लोग बस वहां मौजूद हैं,” उन्होंने बताया।
रोजमर्रा की जिंदगी में आध्यात्मिकता
भारत में भक्ति को रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से अपनाया जाता है। यहां आध्यात्मिक होना अजीब नहीं लगता। बिना किसी जजमेंट के प्रैक्टिस, जाप या मौजूदगी महसूस की जा सकती है।
बाहर समय बिताना
भारतीय लोग ज्यादा समय बाहर बिताते हैं। प्लास्टिक की कुर्सियों पर बैठे चाचा-चाची, चाय हाथ में लिए पड़ोसी और बस जिंदगी को देखते रहना—यह दृश्य उन्हें याद रहे।
खाने का महत्व
यहां “कैसे हो?” के बजाय अक्सर “खा लिया?” पूछा जाता है। खाने से प्यार करने वाली रोक्सेन ने कहा कि उन्हें यह बहुत समझ में आया।
भारतीय खाने की विविधता
चावल, दाल, दही, पनीर, डोसा, सब्जियां और नारियल—इतने संयोजन और स्वाद। उन्होंने दावा किया कि भारत में उनका पाचन जीवन का सबसे अच्छा रहा।
बैठकर बात करना और कुछ न करना
यूरोपीय लोगों ने बस बैठकर बात करने और कुछ न करने की कला भुला दी है। भारत में यह आम है।
रंगों का इस्तेमाल
यूरोप धीरे-धीरे बेज, ग्रे और काले रंगों में सिमट रहा है। भारत में चमकीले कपड़े, गहने, फूल, साड़ी और चूड़ियां हर जगह नजर आती हैं। रोक्सेन ने यूरोपवासियों से रंग अपनाने की अपील की।
बिना वजह मुस्कान
लोग बिना किसी खास वजह के मुस्कुराते हैं और यह कभी जबरन नहीं लगता।
सीधा संवाद
भारत में बातचीत में “दस परतें विनम्रता और छोटी-मोटी बातचीत” की जरूरत नहीं पड़ती। लोग सीधे लेकिन सम्मान के साथ बात करते हैं।
दिन में कई बार चाय
चाय या चाय की आदत दिन में कई बार-यह भी उनकी सूची में शामिल है।
पानी का इस्तेमाल
अंत में उन्होंने साफ कहा कि यूरोप को टॉयलेट पेपर के साथ पानी की आदत भी अपनानी चाहिए। “मैंने जो कहा, वही कहा,” उन्होंने जोड़ा।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
रोक्सेन का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। यूजर्स ने फैशन में रंगों की कमी, “बस जिंदगी देखने” और उत्पादकता के दबाव से मुक्त बैठने जैसी बातों से सहमति जताई। कई पूर्व प्रवासियों ने भी कहा कि भारत में रहने से उन्होंने सीखा कि हर पल उत्पादक होना जरूरी नहीं। यह सूची संस्कृतियों की तुलना नहीं बल्कि उन छोटी आदतों को रेखांकित करती है, जो लंबे समय तक किसी जगह रहने पर जीवन का हिस्सा बन जाती हैं। रोक्सेन जैसे अनुभव बताते हैं कि भारत की सामुदायिक भावना, खुली आध्यात्मिकता, रंगीन जीवनशैली और धीमी गति यूरोपीय जीवनशैली में संतुलन ला सकती है। उनके अनुसार, ये सब सीखने लायक हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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