जर्मन दूतावास के एक वरिष्ठ राजनयिक द्वारा भारतीय ग्रामीण जीवन का अनुभव करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। इसमें मैरियस ओसवाल्ड (Marius Osswald), जो जर्मन दूतावास नई दिल्ली में मिनिस्टर काउंसलर और राजनीतिक मामलों के प्रमुख हैं, एक भारतीय किसान के साथ खेत और पशुओं की देखभाल करते दिख रहे हैं। लोग उनकी विनम्रता, स्थानीय संस्कृति के सम्मान और हाथों से काम करने की पहल की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर उनके आधिकारिक हैंडल @germanyinindia से शेयर किया गया है। कैप्शन में लिखा गया, “शायद ही किसी राजनयिक ने काम पर मैरियस जितने गंदे हाथ किए हों।” दूतावास ने आगे कहा कि अगर हम चाहते हैं कि भारतीय जर्मनी में सफल हों, तो हमें भी यह साबित करना होगा कि हम भारत में भी सफल हो सकते हैं। इस बार चुनौती पारंपरिक खेती की थी। क्या मैरियस सफल रहे?
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किसान से मिलकर देखी ग्रामीण जीवन की झलक
वीडियो में ओसवाल्ड स्थानीय किसान प्रमोद शर्मा से मिलते हैं। शर्मा उन्हें बताते हैं कि भारतीय जर्मनी कौशल सीखने और नौकरी के लिए जाते हैं, जबकि जर्मन अधिकारी भारतीय ग्रामीण जीवन का अनुभव करने आए हैं। शर्मा ने हल्के-फुल्के अंदाज में चुनौती दी कि क्या वे गांव की जिंदगी संभाल सकते हैं।गर्मी की वजह से ओसवाल्ड ने कहा, “बहुत गर्मी है।” प्रमोद शर्मा ने सुझाव दिया कि ब्लेजर उतार दें और पारंपरिक गमछा (तौलिया) गले में लपेट लें। इसके बाद दोनों पशुओं के आश्रय स्थल पर पहुंचे। शर्मा ने बताया कि दिन का पहला काम जानवरों को खाना खिलाना है।
पशुओं के लिए राजदूत ने तैयार किया चारा
ओसवाल्ड ने पशुओं के लिए चारा तैयार करने में मदद की। उन्होंने हाथ से चलने वाले भूसा काटने की मशीन को चलाने की कोशिश की और फिर मवेशियों को चारा खिलाया। वीडियो का सबसे चर्चित पल तब आया जब उन्हें गोबर उठाने और बाहर फेंकने को कहा गया। ओसवाल्ड ने थोड़ा हिचकिचाते हुए पूछा कि क्या यह गंदा है। शर्मा ने गर्मजोशी से समझाया, “नहीं, नहीं। ये हमारे पशु हैं, इनमें कोई गंदगी नहीं होती। ये परिवार का हिस्सा हैं।” ओसवाल्ड ने जवाब दिया, “प्रमोद, मुझे आप पर भरोसा है” और नंगे हाथों से गोबर उठाया। वीडियो के अंत में जर्मन राजनयिक ने स्वीकार किया, “खेती की जिंदगी आसान नहीं है।”
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। यूजर्स ने इसे सराहा। एक यूजर ने लिखा, “शाबाश सर... अज्ञात क्षेत्र में पूरे दिल से उतरने के लिए सम्मान।”
दूसरे ने कहा, “यह स्थानीय लोगों को समझने और अपनाने की अच्छी पहल है। असली खेत की जिंदगी आसान नहीं। आगे की सीख के लिए शुभकामनाएं।।”
एक और टिप्पणी में कहा गया, “भारतीय खेती का पहला पाठ: गायों को खिलाओ। दूसरा: उनके बाद सफाई करो”
गौरतलब है कि, इससे पहले नवरात्र पर गरबा खेलतीं स्विट्जरलैंड की एंबेसडर का वीडियो वायरल हुआ था।
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