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हरिद्वार में कपड़ों और प्लास्टिक से दबी गंगा नदी, वॉलंटियर्स चला रहे महा-सफाई अभियान; गंदगी देख सचमुच हैरानी होगी

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Oct 23, 2026 09:13 am IST,  Updated : Oct 23, 2026 09:13 am IST

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इसमें हरिद्वार में कपड़ों और प्लास्टिक से दबी गंगा नदी को कुछ वॉलंटियर्स साफ करते दिख रहे हैं।

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गंगा की सफाई में जुटे युवा। Image Source : IG/@APNAA.HARIDWAR

जिसे करोड़ों लोग माँ मानते हैं, जिसकी एक डुबकी से पापों से मुक्ति की मान्यता है, उसी मोक्षदायिनी गंगा का इन दिनों एक चिंताजनक चेहरा सामने आया है। हरिद्वार के हर की पौड़ी और मायापुर डैम के पास गंगा की धारा सूखते ही नदी की तलहटी में पुराने कपड़े, जूते, प्लास्टिक, पॉलीथीन और कचरे का अंबार दिखने लगा है। तस्वीरें देखकर हर श्रद्धालु का मन व्यथित हो रहा है। लेकिन इस काले सच के बाद एक उम्मीद भरी तस्वीर भी आई है। गंगा को इस कचरे से मुक्त कराने के लिए प्रशासन, नगर निगम के कर्मचारी और कई समाजसेवी संस्थाओं के वॉलंटियर्स नहर में उतर गए हैं और महा-सफाई अभियान शुरू कर दिया है। हाल ही में एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है, इसे @apnaa.haridwar नामक हैंडल से शेयर किया गया है।  

क्यों दिखा कचरे का ढेर 

दरअसल हर साल दशहरे से दिवाली के बीच ऊपरी गंगनहर की वार्षिक सफाई और रखरखाव के लिए पानी रोका जाता है। इस बार यूपी सिंचाई विभाग ने 20 अक्टूबर की रात को गंगनहर का पानी बंद कर दिया। अधिकारियों के अनुसार यह बंदी 18 दिनों के लिए है और 7 नवंबर की मध्यरात्रि को नहर को दोबारा खोला जाएगा, 8 नवंबर सुबह तक हर की पौड़ी पर जल प्रवाह सामान्य होने की उम्मीद है। पानी के तेज बहाव में जो कचरा नीचे दबा रहता था, पानी कम होते ही वही कचरा सतह पर आ गया। घाटों की सीढ़ियों, रेलिंग और रेगुलेटरों के पास जगह-जगह पुराने कपड़े लटके मिले। स्थानीय निवासी ने बताया, "गंगा स्नान के बाद लोग अपने पुराने कपड़े-जूते नदी में ही छोड़ जाते हैं, मानते हैं कि ऐसा करने से पाप धुल जाएंगे। इससे यहां कपड़ों का ढेर जमा हो गया है। 

आस्था के नाम पर प्रदूषण क्यों?

गंगा नदी को करोड़ों लोग मां का दर्जा देते हैं, लेकिन आस्था के नाम पर ही उसमें कपड़े और प्लास्टिक फेंका जा रहा है, जिससे जलीय जीवों को भी नुकसान पहुंच रहा है। जबकि लोगों और पुजारियों का मानना है कि, धर्म के नाम पर लोगों को ऐसे काम के लिए प्रेरित नहीं किया जाना चाहिए जिससे मां गंगा प्रदूषित हों। गंगा को गंदा करके कोई पुण्य नहीं मिलता। अगर कुछ अर्पित करना ही है तो दूध चढ़ाएं और मछलियों को आटा खिलाएं, लेकिन पुराने वस्त्र न डालें। फिलहाल हरिद्वार प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि 7 नवंबर तक अनावश्यक यात्रा टालें और गंगा में कपड़े न छोड़ें। यह वार्षिक बंदी गंगा की सफाई का एक मौका है, और वॉलंटियर्स की मेहनत दिखा रही है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो गंगा नदी में फैली गंदगी को दूर किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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