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कनाडा में नदी किनारे भारतीयों ने की गंगा आरती, मामले को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Written By: Pankaj Yadav @ThePankajY Published : Jul 13, 2025 03:14 pm IST, Updated : Jul 13, 2025 03:14 pm IST

कनाडा में गंगा आरती का आयोजन प्रवासी भारतीयों द्वारा किया गया, जिसका फोटो और वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस भी हो रही है।

नदी किनारे आरती करते लोग- India TV Hindi
Image Source : SOCIAL MEDIA नदी किनारे आरती करते लोग

कनाडा के मिसिसॉगा शहर में क्रेडिट नदी के किनारे प्रवासी भारतीयों ने गंगा आरती की। जिसकी तस्वीरें और वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। इस मामले ने न केवल विदेश में भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की झलक दिखाई बल्कि इसने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी। नदी के किनारे हुई गंगा आरती को रेडियो धिशुम की टीम ने आयोजित किया था। उनके अनुसार यह भारतीय परंपराओं को विदेशी धरती पर जीवंत करने का एक प्रयास था। इस समारोह में भारतीय वाणिज्य दूतावास, टोरंटो के काउंसल संजीव सकलानी ने भी हिस्सा लिया। दूतावास ने इसे "दिव्य भजनों और पवित्र मंत्रों की आत्मीय संध्या" करार देते हुए सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो भी शेयर किए।

गंगा आरती की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

मिसिसॉगा के एरिनडेल पार्क में क्रेडिट नदी के तट पर आयोजित इस गंगा आरती में भारतीय मूल के लोग ट्रेडिशनल ड्रेस में शामिल हुए। दीयों की रोशनी, भक्ति भजनों और मंत्रों की गूंज ने वाराणसी और हरिद्वार के घाटों की याद दिला दी। आयोजन का उद्देश्य भारतीय डायस्पोरा को अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जोड़े रखना था। एक एनआरआई, प्रियंका गुप्ता ने इसे "कनाडा में भारत का एक हिस्सा" बताया और इसे अपने 10 साल के कनाडाई जीवन में एक "जादुई पल" करार दिया। उन्होंने इस आयोजन का वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है।

सोशल मीडिया पर आई मिलीजुली प्रतिक्रिया

हालांकि कई लोगों ने इस आयोजन को सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक जुड़ाव के प्रतीक के रूप में सराहा, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी आलोचना भी हुई। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्रेडिट नदी पर गंगा आरती करना कितना उचित है। एक यूजर ने लिखा, "क्रेडिट नदी गंगा नहीं है। वे किसकी पूजा कर रहे हैं?" एक अन्य ने टिप्पणी की, "किसी भी नदी के किनारे आरती करने से वह गंगा आरती नहीं हो जाती। अगर इतना ही शौक है, तो भारत लौटकर असली गंगा की सफाई करें।" कुछ ने इसे भारतीय परंपराओं का "मजाक" और "पवित्रता का अपमान" तक बता दिया। दूसरी ओर, समर्थकों ने तर्क दिया कि यह आयोजन भौगोलिक सीमाओं से परे आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। एक यूजर ने लिखा, "आस्था का संबंध इरादे से है, न कि भौगोलिक स्थिति से।" कई एनआरआई ने इस आयोजन को अपनी जड़ों से जुड़ने का एक भावनात्मक अवसर बताया।

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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