देशभर में गुरुवार 2 अप्रैल को हनुमान जयंती का पर्व धूमधाम से मनाया गया है। इस मौके पर महाराष्ट्र से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जो कि लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। हनुमान जयंती के पावन अवसर पर महाराष्ट्र के अकोला जिले में एक बेहद अनोखी और दिलचस्प परंपरा देखने को मिली, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बार्शिटाकळी तालुका के कोथळी बुजुर्ग गांव में पिछले 20 वर्षों से एक खास आयोजन किया जाता है। यहां इंसानों के लिए नहीं, बल्कि बंदरों के लिए मिठाइयों की भव्य पंगत सजाई जाती है।
बंदरों के लिए मिठाइयों का भोज
सामने आई जानकारी के मुताबिक, बंदरों के लिए इस भोज का आयोजन मुंगसाजी महाराज संस्थान की ओर से किया जाता है। इस परंपरा में बंदरों को उनकी पसंदीदा मिठाइयों का भोज कराया जाता है। हैरानी की बात यह है कि जैसे ही भोजन परोसा जाता है, बंदर खुद-ब-खुद पेड़ों से उतरकर आते हैं और पूरी शालीनता के साथ कतार में बैठ जाते हैं।
बंदरों का अनुशासन देखकर सभी हैरान
इस परंपरा के अनुसार, सबसे पहले मंदिर परिसर में थालियां सजाई जाती हैं, फिर बिना किसी निमंत्रण के बंदर वहां पहुंचते हैं और एक-एक कर अनुशासन में बैठ जाते हैं। इसके बाद हर बंदर को एक-एक थाली परोसी जाती है, जिसमें मिठाइयां होती हैं। बंदरों का यह अनुशासित व्यवहार देखने वालों को चकित कर देता है।
परंपरा देती है खास संदेश
महाराष्ट्र के अकोला में घने जंगल के बीच स्थित इस मंदिर में चल रही यह परंपरा न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि इंसानों को भी अनुशासन और सह-अस्तित्व का संदेश देती है। हनुमान जयंती पर ‘वानर सेना’ का यह अनोखा स्वागत हर साल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है। इस मौके पर मुंगसाजी महाराज संस्थान के पुजारी रामदास शिंदे महाराज ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर साल इसे बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया जाता है।
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