Viral Video : मुंबई के एक पेशेवर ने भारत में वर्कप्लेसेस की टॉक्सिक कल्चर पर बहस छेड़ दी है। उन्होंने तीन ऐसे व्यवहारों को उजागर किया है जिन्हें उनके अनुसार देश भर के वर्कप्लेसेस में बहुत लंबे समय से इन आदतों को सामान्य मान लिया गया है। उनकी टिप्पणियों ने कई कॉर्पोरेट कर्मचारियों को प्रभावित किया, जिन्होंने कहा कि उन्होंने अपने वर्कप्लेसेस पर भी इसी तरह की समस्याओं का सामना किया है।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @thinksage.in नामक हैंडल से शेयर किया गया है। आईआईएम के पूर्व छात्र और करियर कोच विजय चंदोला ने कर्मचारियों के अत्यधिक तनाव को महिमामंडित करने, कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और व्यक्तिगत सीमाओं की अनदेखी करने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा, 'तीन हानिकारक चीजें जो भारतीय वर्कप्लेसेस में सामान्य मानी जाती हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं होना चाहिए।' इसके बाद उन्होंने इन व्यवहारों की सूची दी।
"बर्नआउट को गर्व की तरह मानते हैं"
उन्होंने कहा कि पहला कारण यह है कि कर्मचारी और मैनेजर अत्यधिक काम के बोझ को गर्व की बात मानते हैं। उन्होंने बताया, 'पहले तो वे सुबह 4 या 5 बजे तक जागकर कोई महत्वपूर्ण काम पूरा करने का दावा करते हैं और उस थकावट को गर्व के प्रतीक की तरह दिखाते हैं।'
लोगों पर चिल्लाना
विजय चंदोला ने कहा कि, कर्मचारियों की सार्वजनिक रूप से आलोचना करने की प्रथा थी। उन्होंने समझाया, 'दूसरा, लोगों पर चिल्लाना, दूसरों के सामने उन्हें खरी-खोटी सुनाना, लगातार तुलना करना और उनसे यह उम्मीद करना कि वे ऐसा करके अपने प्रदर्शन में सुधार करेंगे।'
लोगों को लगातार फोन करना
उनके अनुसार, तीसरा व्यवहार कुछ वर्कप्लेसेस द्वारा व्यक्तिगत सीमाओं की अनदेखी करने की प्रवृत्ति है। उन्होंने आगे कहा, 'तीसरा, छुट्टी पर होने, बीमार होने, अस्पताल में भर्ती होने, शोक में होने या किसी व्यक्तिगत आपात स्थिति से निपटने के दौरान लोगों को लगातार फोन करना। व्यक्तिगत सीमाओं का कोई सम्मान नहीं, मानो कंपनी ही उनकी मालिक हो।' आगे वे कहते हैं कि, 'इनमें से कुछ भी ठीक नहीं है। इनमें से कुछ भी ठीक नहीं होना चाहिए। और अगर आपको बड़े होने या सहनशील बनने के लिए कहा जा रहा है, तो याद रखें, समस्या वे हैं, आप नहीं।' कैप्शन में लिखा, 'वर्कप्लेस पर कुछ व्यवहार इतने लंबे समय से सामान्य माने जाते रहे हैं कि बहुत से लोग उन पर सवाल भी नहीं उठाते। लेकिन कर्मचारियों पर चिल्लाना, अत्यधिक तनाव को बढ़ावा देना और व्यक्तिगत सीमाओं की अनदेखी करना उच्च प्रदर्शन के संकेत नहीं हैं, बल्कि ये खराब कार्यस्थल संस्कृति के संकेत हैं। हम बेहतर कर सकते हैं, और हमें बेहतर की उम्मीद करनी चाहिए।'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
इस पोस्ट ने तुरंत यूजर्स का ध्यान आकर्षित किया और कई यूजर्स ने टॉक्सिक कल्चर के अपने अनुभवों को साझा किया। एक यूजर ने लिखा कि, '।'
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'मैंने ये सब झेला है। मैं वो व्यक्ति था जो वीकेंड, देर रात आदि में महत्वपूर्ण डिलीवरी करता था। जब मूल्यांकन का समय आया, तो मुझे प्रमोशन के लिए बहुत अहम माना गया, लेकिन मुझे अच्छा मुआवला मिला।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'मेरी पिछली कंपनी में, मेरे मैनेजर ने मुझे दरवाजे के सामने खड़े होकर उन लोगों को रोकने के लिए कहा था जो लक्ष्य पूरा किए बिना लॉग आउट कर रहे थे।'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'हां। मैंने इसे वापस कर दिया और इसी वजह से मुझे नौकरी से निकाल दिया गया।'
पांचवें यूजर ने लिखा कि, 'बिग4 में देर रात तक काम करना आम बात है और वे इसे गर्व के प्रतीक के रूप में भी दिखाते हैं।'
छठे यूजर ने लिखा कि, 'सभी भारतीय बॉस बिना माफी मांगे ऐसा करते हैं।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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