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जब यहां कोई पहाड़ नहीं तो क्यों कहलाता है 'पहाड़गंज,' दिल्ली के इस बाजार को कैसे मिला ये नाम; जानिए

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Sep 16, 2026 10:12 am IST,  Updated : Sep 16, 2026 10:12 am IST

सोशल मीडिया पर आपने भारत के अलग-अलग क्षेत्रों के बारे में कई रोचक तथ्यों के बारे में पढ़ा होगा। मगर, क्या आपको पता है कि दिल्ली के पहाड़गंज को उसका नाम कैसे मिला ?

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दिल्ली का बाजार। Image Source : PEXELS

दिल्ली के मध्य भाग में स्थित पहाड़गंज आज पर्यटकों, बैकपैकर्स और सस्ते सामानों का प्रमुख केंद्र है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पश्चिम में बसा यह इलाका होटलों, गलियों और बाजारों से भरा पड़ा है। लेकिन नाम सुनकर कई लोग हैरान होते हैं यहां कोई पहाड़ नजर नहीं आता, फिर इसे पहाड़गंज क्यों कहा जाता है? इतिहासकारों और पुराने दस्तावेजों के अनुसार, इसका नाम भौगोलिक और ऐतिहासिक कारणों से जुड़ा है।

कैसे बना पहाड़गंज शब्द

‘पहाड़गंज’ दो शब्दों से मिलकर बना है-‘पहाड़’ यानी पहाड़ी या ऊंचाई, और ‘गंज’ यानी बाजार या व्यापारिक क्षेत्र। शाब्दिक अर्थ है ‘पहाड़ी पड़ोस’ या ‘पहाड़ी बाजार।’ मुगल काल में यह शाहजहानाबाद (पुरानी दिल्ली) की दीवारों के बाहर अजमेरी गेट के पास बसा एक महत्वपूर्ण उपनगरीय मोहल्ला था। इतिहासकार स्टीफन ब्लेक अपनी पुस्तक ‘शाहजहानाबाद: द सॉवरेन सिटी इन मुगल इंडिया 1639-1739’ में इसे शहर के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण उपनगरीय बाजारों में बताते हैं। यह अनाज का प्रमुख थोक बाजार था और शाही सीमा शुल्क घर भी यहीं था। 

मुगल काल में इस नाम से प्रचलित थी ये जगह 

मुगल काल में इसे ‘शाहगंज’ या ‘किंग्स गंज’ भी कहा जाता था, यानी राजा का बाजार। लेकिन वर्तमान नाम इसकी भौगोलिक स्थिति से जुड़ा है। यह रायसीना हिल के निकट था, जहां आज राष्ट्रपति भवन खड़ा है। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, यहां कभी छोटी-बड़ी पहाड़ियां या रिज (चट्टानी ऊंचाई) थीं, जो समय के साथ शहरी विकास और समतलीकरण के कारण गायब हो गईं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में इसे “समय द्वारा समतल किए गए रिज पर बसा बाजार” बताया गया है। आज भी करोल बाग की ओर एक पहाड़ी पर ईदगाह मौजूद है, जो इस बात का संकेत देती है। 

पहाड़गंज में क्या-क्या 

आज पहाड़गंज विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद है। मुख्य बाजार में सस्ते होटल, रेस्टोरेंट, कपड़े, बैग और स्मृति चिह्न उपलब्ध हैं। लेकिन नाम की कहानी याद दिलाती है कि दिल्ली का भूगोल समय के साथ कितना बदल चुका है। जहां कभी पहाड़ियां थीं, वहां अब कंक्रीट के जंगल हैं। सरकारी दस्तावेजों में सीधे नामकरण का उल्लेख कम मिलता है, लेकिन ऐतिहासिक स्रोतों में रायसीना हिल और पुरानी रिज का जिक्र बार-बार आता है। यह नाम दिल्ली की बदलती काया का प्रतीक है। मुगल बाजार से आधुनिक पर्यटन केंद्र तक का सफर पहाड़गंज ने तय किया है। अगली बार जब आप यहां घूमें, तो याद रखें—नाम में छिपा इतिहास शहर की कहानी सुनाता है। पहाड़ भले गायब हो गए हों, लेकिन ‘पहाड़गंज’ नाम आज भी जीवित है। 

गौरतलब है कि, पहाड़गंज के अलावा विदेशी दिल्ली मेट्रो के भी बड़े फैन हैं। इससे पहले Delhi Metro की खूबियों से इंप्रेस हुई एक रशियन टूरिस्ट का वीडियो वायरल हुआ था। 

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