कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लंबे दौरे ने जहां बीजेपी कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ा दिया है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में डटी हुई हैं। बताया जा रहा है कि अमित शाह ने बंगाल में 15 दिन तक रहने की योजना बनाई थी और पिछले तीन दिनों से वे लगातार राज्य में सक्रिय हैं। इस दौरान वे रोजाना करीब तीन रैलियां कर रहे हैं और साथ ही रोड शो के जरिए जनता से सीधा संपर्क साध रहे हैं। उनके इस आक्रामक प्रचार अभियान से बीजेपी कार्यकर्ताओं का मनोबल काफी ऊंचा हुआ है।
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ओवैसी और हुमायूं कबीर भी पूरी ताकत से जुटे
दूसरी ओर, अन्य राजनीतिक दल भी अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और नेता हुमायूं कबीर अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय होकर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा वामपंथी दल और कांग्रेस भी मैदान में पूरी मजबूती के साथ उतरे हुए हैं। हालांकि, इन सभी दलों की सक्रियता के बीच ममता बनर्जी ने एक अलग रणनीति अपनाई है। वह लगातार विपक्षी दलों, खासकर बीजेपी को 'बंगाल का दुश्मन' और अन्य पार्टियों को 'बीजेपी का प्रॉक्सी' बताकर जनता को एकजुट करने की कोशिश कर रही हैं।
'बाहरी बनाम बंगाली' करने में कामयाब हुईं ममता?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी की यह रणनीति कुछ हद तक असर दिखा रही है, क्योंकि वह इसे 'बाहरी बनाम बंगाली' के मुद्दे से जोड़कर पेश कर रही हैं। इससे राज्य की क्षेत्रीय भावना को भी बल मिल रहा है। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में सभी प्रमुख राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में हैं। एक तरफ बीजेपी आक्रामक प्रचार से माहौल बनाने में जुटी है, तो दूसरी ओर ममता बनर्जी भावनात्मक और क्षेत्रीय मुद्दों के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले दिनों में यह सियासी मुकाबला और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है।