पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले में 65 वर्षीय एक व्यक्ति मंगलवार सुबह अपने घर में फंदे पर लटका हुआ पाया गया। मृतक के परिजन ने दावा किया कि उसने मतदाता रिकॉर्ड में विसंगतियों के कारण उपजने वाली परेशानियों के डर से आत्महत्या कर ली। पुलिस ने यह जानकारी दी।
अब तक 17 की मौत
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने दावा किया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की घोषणा के बाद सदमे और चिंता के कारण राज्य में 17 लोगों की मौत हो गई है। कुमारगंज ब्लॉक में धनगरहाट पंचायत के अघाचा निवासी उस्मान मंडल (65) के परिवार ने दावा किया कि वह सरकारी दस्तावेजों में अपने उपनाम में गड़बड़ी के कारण कई दिनों से परेशान थे।
कहीं विदेशी न घोषित कर दिया जाए...
पुलिस ने कहा, ‘मृतक (उस्मान) के मतदाता पहचान पत्र में उसका नाम उस्मान मोल्ला लिखा था, जबकि 2002 की मतदाता सूची में उसका नाम उस्मान मंडल दर्ज था। उसके परिजन ने बताया कि मौजूदा एसआईआर के तहत जांच के दौरान उस्मान को इस अंतर से समस्याएं पैदा हो सकने की चिंता थी और उसे डर था कि उसे विदेशी घोषित किया जा सकता है।’
परिजनों का दावा, कई कार्यालयों के लगाए चक्कर
पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘उनके (उस्मान) परिजन ने दावा किया है कि विभिन्न कार्यालयों का चक्कर लगाने के बावजूद वह विसंगति को दूर करने में असफल रहे।’ पुलिस ने उस्मान के घर से उसका शव बरामद करने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कुमारगंज से टीएमसी के विधायक तोराफ हुसैन मंडल ने आरोप लगाया कि ‘एसआईआर के नाम पर मुसलमानों को परेशान करने और देश से बाहर निकालने की साजिश की जा रही है’। उन्होंने घटना की गहन जांच की मांग की। (भाषा के इनपुट के साथ)