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क्या पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगेगा? राज्यपाल ने गृह मंत्रालय को मुर्शिदाबाद दंगे की सौंपी रिपोर्ट

 Published : May 04, 2025 07:15 pm IST,  Updated : May 04, 2025 07:36 pm IST

राज्यपाल ने वक्फ (संशोधन) विधेयक के बाद मुर्शिदाबाद में पूर्व नियोजित हिंसा और पूर्व चेतावनियों के बावजूद पुलिस की निष्क्रियता का भी उल्लेख किया है।

West bengal governor- India TV Hindi
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने हिंसा सौंपी रिपोर्ट Image Source : PTI

कोलकाता:  पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने वक्फ संशोधन अधिनियम के विरोध में प्रदर्शन के दौरान मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा से जुड़ी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी है। उन्होंने 18-19 अप्रैल, 2025 को दंगा प्रभावित मालदा और मुर्शिदाबाद का दौरा किया था। 

कट्टरपंथ और उग्रवाद की दोहरी समस्या 

उन्होंने रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया है कि कट्टरपंथ और उग्रवाद की दोहरी समस्या राज्य के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। बंगाल में प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं और कहा गया है कि उनका पतन हो रहा है। टारगेटेड सांप्रदायिक हमलों के मामले बढ़े हैं।  राज्यपाल ने वक्फ (संशोधन) विधेयक के बाद मुर्शिदाबाद में पूर्व नियोजित हिंसा और पूर्व चेतावनियों के बावजूद पुलिस की निष्क्रियता का भी उल्लेख किया है।

रिपोर्ट में कई उपाय सुझाए

उन्होंने संवेदनशील सीमावर्ती जिलों में कट्टरपंथ और राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक पहचान के दुरुपयोग की चेतावनी दी। बोस ने अपनी रिपोर्ट में कई उपाय सुझाए हैं, जिनमें एक जांच आयोग का गठन और बांग्लादेश की सीमा से लगे जिलों में केंद्रीय बलों की चौकियां स्थापित करना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने लिखा, ‘‘यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत प्रावधान भी विकल्प बने रहेंगे।’’ 

संवैधानिक विकल्पों पर विचार करना चाहिए

रिपोर्ट में ‘‘संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत प्रावधानों’’ के उल्लेख के बारे में पूछे जाने पर एक अधिकारी ने बताया, ‘‘राज्यपाल ने अनुच्छेद 356 के कार्यान्वयन का प्रस्ताव नहीं दिया है। उनका मतलब यह था कि यदि राज्य में स्थिति और बिगड़ती है तो संविधान के अनुच्छेद 356 के प्रावधानों पर केंद्र विचार कर सकता है।’’ संविधान के अनुच्छेद 356 के लागू होने का मतलब राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होना है। राज्यपाल ने मुर्शिदाबाद हिंसा का प्रभाव राज्य के अन्य जिलों पर पड़ने की आशंका व्यक्त की और सिफारिश की कि केंद्र सरकार को ‘‘लोगों में कानून के शासन के प्रति विश्वास पैदा करने के अलावा मौजूदा स्थिति पर नियंत्रण रखने के लिए संवैधानिक विकल्पों पर विचार करना चाहिए।’’ 

मुर्शिदाबाद और मालदा में हालात चिंताजनक

बोस ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘‘कट्टरपंथ और उग्रवाद की दोहरी समस्या पश्चिम बंगाल के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है, विशेषकर बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करने वाले दो जिलों- मुर्शिदाबाद और मालदा में। इन दोनों जिलों में प्रतिकूल जनसांख्यिकीय संरचना है और हिंदू अल्पसंख्यक हैं।’’ राज्यपाल ने हिंसा के बाद के हालात में उठाए जाने वाले कई उपाय सुझाए। इस हिंसा में एक व्यक्ति और उसके बेटे सहित कम से कम तीन लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए। यह दंगा वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन के बीच हुआ था। (इनपुट-एजेंसी)

रिपोर्ट-ओंकार सरकार 

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