संयुक्त राष्ट्र: अमेरिका और इजरायल ने जब ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया तो उसके बाद वहां क्या हुआ? क्या क्षतिग्रस्त परमाणु केंद्रों की मरम्मत की गई? ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार की स्थिति क्या है? संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी के ताजा बयान ने इन सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। ग्रॉसी ने कहा है कि जून 2025 से अब तक ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि ईरान ने 2025 और 2026 के सैन्य हमलों में क्षतिग्रस्त हुए परमाणु केंद्रों की मरम्मत या उनका पुनर्निर्माण करने की कोशिश की हो।
IAEA को यूरेनियम भंडार की स्थिति की जानकारी नहीं
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में ईरान से अपने सभी परमाणु केंद्रों का निरीक्षण करने की इजाजत देने का आग्रह किया। इसमें सैन्य हमलों में क्षतिग्रस्त हुए केंद्र भी शामिल हैं। IAEA के मुताबिक ईरान के पास 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है, जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया गया है। परमाणु हथियारों में इस्तेमाल के लिए यूरेनियम को आमतौर पर लगभग 90 प्रतिशत तक संवर्धित किया जाता है। पिछले साल जून में अमेरिकी हमलों के बाद से एजेंसी इस भंडार की मौजूदा स्थिति की पुष्टि नहीं कर सकी है।
ट्रंप ने किया था परमाणु कार्यक्रम तबाह करने का दावा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह दावा करते रहे हैं कि 28 फरवरी को ईरान के परमाणु ठिकानों पर भी हमले किए गए थे। अमेरिकी हमलों ने इरान परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह तबाह कर दिया था। ट्रंप ने 28 फरवरी को ईरान के साथ युद्ध शुरू करने की एक प्रमुख वजह उसे परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना बताया है। हालांकि, IAEA प्रमुख के बयान से यह स्पष्ट नहीं होता कि हमलों में परमाणु केंद्रों को कितना नुकसान पहुंचा था या ईरान के परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति क्या है। इसके लिए निरीक्षण और परमाणु सामग्री की निगरानी जरूरी होगी।
सुरक्षा परिषद में अमेरिका और ईरान आमने-सामने
आईएईए ने परमाणु अप्रसार संबंधी दायित्वों का पालन नहीं करने को लेकर ईरान का मामला सुरक्षा परिषद को भेजा था। इसके बाद बहरीन, डेनमार्क, लातविया, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के अनुरोध पर मंगलवार को परिषद की बैठक बुलाई गई। ईरान के सहयोगी रूस और चीन ने बैठक रोकने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हुए। परमाणु अप्रसार संधि के तहत ईरान के लिए अपने सभी परमाणु पदार्थों और गतिविधियों की जानकारी देना तथा आईएईए के निरीक्षकों को उनकी जांच करने की अनुमति देना कानूनी रूप से अनिवार्य है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इनका इस्तेमाल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के अलावा किसी अन्य काम के लिए नहीं किया जा रहा।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उपराजदूत गुलामहुसैन दारजी ने अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद सुरक्षा परिषद की चुप्पी की आलोचना की। उन्होंने इन हमलों को ''ईरान के खिलाफ आक्रामक युद्ध'' करार दिया और अमेरिका पर ईरानी लोगों के खिलाफ युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया। दारजी ने निरीक्षकों को ईरान आने की अनुमति देने की मांग पर कुछ नहीं कहा। इसके बजाय उन्होंने कहा, ''इजरायल के पास परमाणु हथियार हैं, लेकिन आपको चिंता इस बात की है कि ईरान में निरीक्षक मौजूद नहीं हैं।''
क्रूर तानाशाही वाला देश है ईरान-माइक वाल्ट्ज
इजरायल ने कभी इस बात की पुष्टि नहीं की है कि उसके पास परमाणु हथियार हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने ईरान को ''क्रूर तानाशाही वाला देश'' करार दिया और सवाल किया कि क्या ईरानी राजदूत बहरीन पर हमला करने के लिए उसके राजदूत से माफी मांगना चाहेंगे। वाल्ट्ज ने कहा, ''हमने अमेरिका के खिलाफ लगातार आरोप सुने हैं, लेकिन आज हमें इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला कि ईरान परमाणु सामग्री की निगरानी और जांच संबंधी अपने दायित्वों को पूरा करने में लगातार विफल क्यों रहा है।'' उन्होंने कहा कि आईएईए ने ईरान से कुछ सवालों के जवाब मांगे हैं और बेहतर होगा कि ईरानी प्रतिनिधि उनके जवाब देना शुरू करें। वाल्ट्ज ने कहा, ''यहां आपके झूठ नहीं चलेंगे।''
बता दें कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ नए मिलिट्री एक्शन का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि अगर तेहरान किसी समझौते के लिए तैयार नहीं होता है, तो वाशिंगटन एक और ऑपरेशन शुरू कर सकता है। इससे कुछ घंटे पहले ही एक अमेरिकी दूत ने कहा था कि इसी सप्ताहांत तक ईरान पर फिर से बड़े हमले हो सकते हैं।
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