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बृजभूषण सिंह को जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट ने दिया आखिरी मौका, बरी किए जाने के खिलाफ पहलवानों ने दाखिल की है याचिका

 Reported By: Atul Bhatia,  Written By: Mangal Yadav
 Published : Oct 28, 2026 12:43 pm IST,  Updated : Oct 28, 2026 02:25 pm IST

दिल्ली की एक अदालत ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को आखिरी मौका दिया है कि वे महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपील का जवाब दें।

बृजभूषण शरण सिंह - India TV Hindi
बृजभूषण शरण सिंह Image Source : PTI

नई दिल्ली: राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को बृजभूषण शरण सिंह को उनके बरी होने के खिलाफ दायर अपील पर जवाब दाखिल करने का एक आखिरी मौका दिया। आरोपी के वकील ने ऑनलाइन पेश होकर जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा। मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी। सेशंस कोर्ट ने कहा कि इसके बाद बृजभूषण सिंह को जवाब दाखिल करने का कोई और मौका नहीं दिया जाएगा।

महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के मामले में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के बरी होने को चुनौती दी है। 3 अगस्त को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के मामले में WFI के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह और तत्कालीन सचिव विनोद तोमर को बरी कर दिया था।  

कोर्ट ने पूर्व सांसद को जारी किया था नोटिस

राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक (APP) मनीष रावत पेश हुए। 28 सितंबर को राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पीड़ितों के नाम वाले मूल हलफनामे और आदेशों को एक सीलबंद लिफाफे में रखा जाए। कोर्ट ने अपीलकर्ता को यह भी निर्देश दिया था कि वे याचिका की एक ऐसी प्रति दाखिल करें जिसमें से पीड़ितों के नाम हटा दिए गए हों। पहलवानों ने बरी करने के फैसले को चुनौती देते हुए तर्क दिया है कि यह कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों की पूरी तरह से गलत और चुनिंदा व्याख्या पर आधारित है। 

याचिका में कही गई हैं ये बातें

अपील में कहा गया है कि यह आदेश केवल अटकलों और अनुमानों पर आधारित है, इसमें कानून के स्थापित सिद्धांतों को लागू नहीं किया गया है। साथ ही, इसका तर्क यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की शिकार महिलाओं के "अपेक्षित" व्यवहार के बारे में "पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं" पर टिका है, न कि पीड़ितों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सबूतों के आधार पर किए गए निष्पक्ष मूल्यांकन पर। यह मामला उस FIR से जुड़ा है जिसे महिला पहलवानों ने तब दर्ज कराया था, जब बृजभूषण शरण सिंह भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के प्रमुख थे।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 354, 354 D, 354 A, 506 (1) और 109 लगाई थी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्व पंवार ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया। सुनवाई एक बंद कमरे (बंद अदालत) में हुई। बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर पर उस मामले में मुकदमा चलाया गया था, जो भारत और विदेशों में महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। 

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